Satyaki Savarkar : प्रतिवादी की प्रतिपृच्छा में स्वतंत्रता सेनानी सावरकर के पोते सात्यकी सावरकर ने सधे हुए उत्तर देकर राहुल गांधी के अधिवक्ताओऺ के कुत्सित मनोरथ उड़ा दिए !

स्वतंत्रता सेनानी सावरकर के संबंध में अपमानजनक वक्तव्य देने का प्रकरण

उजवीकडे सात्यकी सावरकर

पुणे – स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर के संबंध में निराधार आरोप एवं आपत्तिजनक वक्तव्य देने के प्रकरण में कांग्रेस के नेता राहुल गांधी के विरुद्ध चल रहे मानहानि के परिवाद की सुनवाई पुणे की विशेष न्यायपीठ में चल रही है । इस समय सावरकर के पोते एवं याचिकाकर्ता श्री सात्यकी सावरकर की प्रतिपृच्छा ली गई । राहुल गांधी के अधिवक्ताओ द्वारा सावरकर की देशभक्ति एवं ‘वीर’ उपाधि पर उठाई गई सभी आपत्तियों का श्री सात्यकी सावरकर ने सधे एवं निर्णायक उत्तर देकर खंडन किया । न्यायालयीन कार्यकाल समाप्त होने के कारण सावरकर की प्रतिपृच्छा १ जुलाई २०२६ तक स्थगित कर दी गई ।

न्यायालय में श्री सात्यकी सावरकर द्वारा प्रस्तुत सत्य पक्ष:

१. अंदमान कारावास के पूर्व ही सावरकर ‘वीर’ थे

सुनवाई के समय राहुल गांधी के अधिवक्ताओ ने सावरकर को प्राप्त ‘वीर’ उपाधि पर आपत्ति उठाई । इस पर ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए श्री सात्यकी सावरकर ने कहा, “प्रसिद्ध ‘गदर आंदोलन’ के साहित्य में भी सावरकर का उल्लेख ‘वीर सावरकर’ के रूप में मिलता है । यह उपाधि सरकारी समर्थन से मिली नहीं है, अपितु जनता ने उनके क्रांतिकारी कार्यों को देखते हुए उन्हें यह सर्वोच्च लोकसम्मान दिया था ।”

२. ब्रिटिश शासन को सावरकर से भय लगता था

ब्रिटिश राज में याचिका प्रविष्ट करना एक नियमित एवं कानूनी प्रक्रिया थी । सावरकर की सभी याचिकाएं ब्रिटिश सरकार ने निरस्त कर दी थीं । ब्रिटिश अधिकारियों के आंतरिक सूचना संग्रह के अनुसार, सावरकर की मुक्तता पर ‘वे पुन: से ब्रिटिश साम्राज्य के विरुद्ध क्रांति कर देंगे’ ऐसी भय भावना थी । (राहुल गांधी एवं उनके कानूनी समूह द्वारा सावरकर की उन ‘दया याचिकाओं’ पर हास्य उडाने का प्रयास केवल राजनीतिक द्वेष से प्रेरित प्रचार था । तत्कालीन ब्रिटिश कानून के अनुसार यह एक न्यायिक प्रक्रिया थी; परन्तु इसे न समझना कांग्रेस वालों की वैचारिक असमर्थता है! – संपादक)

३. अपनी मुक्तता के लिए नहीं, सभी बंदियों के लिए संघर्ष किया

सावरकर ने याचिकाओं के माध्यम से केवल अपनी मुक्तताकी मांग नहीं की थी, अपितु अंडमान की यातनाओं में सड रहे अन्य सभी राजनीतिक बंदियों की मुक्तता की भी मांग की लौ जला रखी थी । (स्वयं से बढकर दूसरों के अधिकार के लिए लडना-ऐसा इतिहास आज के स्वार्थी लोगों को समझ में नहीं आएगा ! – संपादक)

४. विभिन्न क्रांतिकारियों को भिन्न उपाधियां देकर सम्मानित किया गया

भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव एवं बटुकेश्वर दत्त जैसे महान क्रांतिकारियों के उदाहरण देते हुए श्री सात्यकी सावरकर ने स्पष्ट किया कि समाज ने विभिन्न क्रांतिकारियों के योगदानों का सम्मान अलग-अलग उपाधियों से किया है । जनता ने किसी को ‘वीर’, किसी को ‘महात्मा’ एवं किसी को ‘नेताजी’ कहा है । इस परिवादका मुख्य विषय सावरकर की दया याचिकाए नहीं, अपितु राहुल गांधी द्वारा सावरकर के संबंध में किए गए कथित अपमानजनक वक्तव्यों के संबंध में है । इस मानहानि के आरोप से संबन्धित सभी ठोस एवं आवश्यक साक्ष्य न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए जा चुके हैं ।