
नागपुर – वर्ष २००८ में मुंबई पर हुए आतंकवादी आक्रमण के मुख्य आरोपी अजमल कसाब ने कारागृह में मटन बिरयानी मांगी थी, यह समाचार जानबूझकर मैंने ही फैलाया था, ऐसा वक्तव्य राज्यसभा सदस्य एवं वरिष्ठ अधिवक्ता पद्मश्री उज्ज्वल निकम ने किया । यहां के एक पुरस्कार समारोह में वे बोल रहे थे ।
इस विषय का उद्देश्य स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा,
१. कसाब का अभियोग (मुकदमा) चलते समय रक्षाबंधन का दिन होने के कारण मेरे हाथ पर राखी बंधी हुई थी । कसाब द्वारा इस विषय में पूछने पर मैंने उसे रक्षाबंधन के दिन का महत्त्व बताया । इतने में न्यायाधीश महोदय न्यायासनासीन हुए ।
२. मेरा तथा कसाब का संवाद उन्हें बताने के पश्चात कसाब ने सिर नीचे झुकाया एवं आंखें पोंछने जैसा किया । न्यायालय के बाहर उपस्थित प्रसार माध्यमों ने तुरंत ‘कसाब की आंखों में आंसू’ ऐसा मुख्य समाचार प्रसारित किया । कसाब के प्रति सहानुभूति उत्पन्न न हो, इसके लिए मैंने प्रसार माध्यमों के पास जाकर कहा कि, कसाब ने मटन बिरयानी मांगी है । उसके पश्चात तुरंत ही वह समाचार दिखाया जाने लगा ।
३. दूसरे दिन न्यायालय में कसाब के अधिवक्ता ने पूर्व दिन की घटना के विषय में पूछा । मैंने कहा, ‘‘वह पाकिस्तान से आया है, प्रतिदिन मांसाहार करता होगा । फिर क्या उसने बिरयानी नहीं मांगी होगी ? उसी से पूछिए ।’’ न्यायालय की चर्चा कसाब को पूर्ण रूप से ज्ञात नहीं थी । बिरयानी देने के विषय में बात चल रही है ऐसा प्रतीत होने पर उसने तुरंत सिर हिला दिया । इस कारण ‘कसाब ने बिरयानी मांगी’, ऐसे समाचार दिखाए गए । उसने वास्तव में बिरयानी मांगी थी या नहीं, यह केवल उसी को ज्ञात होगा ।
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