प.पू. सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी की पाकिस्तान के संदर्भ में भूमिका।

नई दिल्ली – भविष्य में यदि भारत ने पाकिस्तान को संपूर्णतः पराजित किया, तो वहां के लोगों को भारत के प्रवाह में लाना पडेगा अथवा उन्हें उनके देश में ही शांति से जीना संभव होना चाहिए, इसके लिए संवाद के मार्ग खुले रखने आवश्यक हैं । हम हिटलर जैसे नहीं हैं । वह हमारा स्वभाव अथवा कार्यपद्धति भी नहीं है, ऐसा प्रतिपादन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प.पू. सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने एक संवाद कार्यक्रम को संबोधित करते हुए किया । इससे उन्होंने संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले के पिछले माह में पाकिस्तान के संदर्भ में ली गई भूमिका का समर्थन किया । उन्होंने आगे कहा कि अन्याय एवं अत्याचार का निर्मूलन किया जाना चाहिए, परंतु जो अच्छा है, उसे संजोया भी जाना चाहिए ।
किसी भी देश के विषय में संघ की कोई भी स्वतंत्र विदेशनीति नहीं है तथा संघ केंद्र सरकार की भूमिका का ही पालन करता है, इस पर प.पू. भागवतजी ने बल दिया ।
क्या कहा था दत्तात्रय होसबाले ने ?
एक भेंटवार्ता में संघ के सरकार्यवाह होसबाले को ‘भारत को पाकिस्तान तथा उसके द्वारा किए जा रहे आतंकवाद के पोषण के संदर्भ में किस प्रकार व्यवहार करना चाहिए ?’, यह प्रश्न पूछा गया था । उस पर उन्होंने कहा था कि देश की सुरक्षा एवं स्वाभिमान की रक्षा होनी चाहिए । सत्ता पर आसीन सरकार को उसका ध्यान रखना चाहिए, परंतु उसी समय हमें संवाद के मार्ग बंद नहीं करने चाहिए । उनके साथ (पाकिस्तान के साथ) संवाद करने के लिए हमें सदैव ही तैयार रहना चाहिए ।
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