US-Iran War : अमेरिका-ईरान युद्ध समाप्त होगा !

  • दोनों देशों के मध्य शांति समझौता होने की ट्रम्प द्वारा घोषणा

  • १९ जून को दोनों देश करेंगे समझौते पर हस्ताक्षर

  • हॉर्मुझ से तेल-परिवहन पुनः आरंभ होगा

  • ईरान का यद्यपि मौन, इजराइल को भी समझौता अमान्य

वाशिंगटन/तेहरान – अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ‘ट्रुथ सोशल’ सामाजिक माध्यम द्वारा अमेरिका तथा ईरान के मध्य १४ सूत्रीय शांति समझौता होने की घोषणा की है । इस कारण अमेरिका तथा ईरान के मध्य विगत १०७ दिनों से चल रहा युद्ध समाप्त होगा, यह अंततः स्पष्ट हो गया । १९ अप्रैल को स्विट्जरलैंड के जेनेवा नगर में ट्रम्प की उपस्थिति में इस शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए जाएंगे । तदुपरान्त संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद इस पर अंतिम मुहर लगाएगी एवं उसके पश्चात इस युद्ध की आधिकारिक समाप्ति होगी ।

हॉर्मुझ जलडमरूमध्य की नाकाबंदी हटाएंगे ! – ट्रम्प

हॉर्मुझ जलडमरूमध्य (२ जलाशयों को जोडने वाले जलमार्ग) के परितः अमेरिकी नौसेना द्वारा की गई नाकाबंदी पूर्ण रूप से हटाने का आदेश भी ट्रम्प ने अपनी नौसेना को दिया है । इस कारण हॉर्मुझ से पूर्ववत पुनः तेल-परिवहन होगा । परिणामस्वरूप वैश्विक स्तर पर अनेक देशों में उत्पन्न ऊर्जा-संकट दूर होकर शिथिल हुई अर्थव्यवस्था को संबल प्राप्त होगा ।

ईरान द्वारा मौन धारण करने के कारण शांति समझौते पर प्रश्नचिह्न !

ट्रम्प द्वारा की गई घोषणा पर ईरान ने यद्यापि आधिकारिक प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की है । पाकिस्तान ने भी अमेरिका तथा इरान के मध्य शांति समझौता होने की बात कही है ; परंतु ईरान ने उस पर भी कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की है । इस कारण शांति समझौते के विषय में प्रश्नचिह्न यथावत है ।

डोनाल्ड ट्रम्प ने क्या कहा ?

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने ‘ट्रुथ सोशल’ इस सामाजिक माध्यम से अमेरिका तथा ईरान के मध्य शांति समझौते की घोषणा की है । ट्रम्प ने कहा कि, ‘इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान से समझौता पूर्ण हो चुका है । सभी को बधाई । मैं इस माध्यम से घोषणा करता हूं कि, हॉर्मुझ जलडमरूमध्य भी पुनः क्रियाशील होगा । मैं अमेरिकी नौसेना को भी नाकाबंदी हटाने की अनुमति प्रदान कर रहा हूं । इस जलडमरूमध्य से ईंधन की आपूर्ति जिन देशों को होती है, वे तेल-परिवहन आरंभ करें ।’

तेल के मूल्यों में भारी गिरावट : शेयर बाजार भी संभला

ट्रम्प की घोषणा के कारण तेल के मूल्यों में भारी गिरावट आई है तथा तेल प्रति बैरल ८३ डॉलर तक (७ सहस्र ८५४ रुपयों तक) नीचे आने की बात कही जा रही है । इसके साथ ही विगत अनेक दिनों से संकुचित हुआ शेयर बाजार भी संभल गया है ।

इजराइल को समझौता अमान्य !

अमेरिका द्वारा किया गया यह समझौता इस्रायल को पूर्ण रूप से मान्य नहीं है, ऐसा कहा जा रहा है । विशेष रूप से अमेरिका द्वारा लेबनान पर आक्रमण रोकने के समझौते पर इजराइल की आपत्ति होने की बात कही जा रही है । इस समझौते के कारण इजराइल के एक मंत्री ने ‘इजराइल अमेरिका का दास नहीं है’, ऐसे शब्दों में क्रोध व्यक्त किया है ।

संपूर्ण क्षेत्र में पुनः स्थिरता आएगी ! – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका तथा इरान के मध्य शांति समझौते का स्वागत किया है । उन्होंने कहा कि, ‘पश्चिम एशिया में चल रहा संघर्ष समाप्त करने के लिए दोनों देशों के मध्य हुआ समझौता, यह एक अत्यंत प्रशंसनीय चरण है । इस युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर गंभीर आर्थिक संकट उत्पन्न हुआ है तथा अनेक देशों में जन-धन की भारी हानि हुई है । इस शांति समझौते के क्रियान्वयन से संपूर्ण क्षेत्र में पुनः स्थिरता आएगी तथा समुद्र में सुरक्षित नौवहन तथा व्यापार पूर्ववत होगा । अवशिष्ट सूत्रों पर दोनों देश चर्चा बनाए रखें एवं भविष्य में एक चिरस्थायी एवं सक्षम अंतिम समझौता हो, ऐसी भारत की अपेक्षा है ।’

क्या हैं समझौते के १४ सूत्र ?

१. कच्चे तेल तथा पेट्रोकेमिकल्स से संबंधित इरान पर लगे प्रतिबंध हटाए जाएंगे ।

२. इरान की वित्तीय संस्थाओं को पूर्ण अधिकार प्राप्त होगा, अमेरिका अपने प्रतिबंध वापस लेगा ।

३. ६० दिनों में इरान के अवरुद्ध किए गए २४ अरब डॉलर पर से (अनुमानतः २ लाख २८ सहस्र करोड रुपयों पर से) प्रतिबंध हटाए जाएंगे ।

४. इरान के पुनर्निर्माण के लिए अमेरिका तथा मित्र राष्ट्र इरान को ३०० अरब डॉलर की (अनुमानतः २८ लाख ३९ सहस्र ५९ करोड रुपयों की) विभिन्न योजनाओं द्वारा सहायता करेंगे ।

५. लेबनान के विरुद्ध युद्ध तत्काल रोका जाएगा ।

६. अमेरिका इरान के आंतरिक विषयों में हस्तक्षेप न करने का तथा इरान की संप्रभुता का आदर करने का वचन देगा ।

७. अमेरिका द्वारा हॉर्मुझ के निकट की गई नाकाबंदी ३० दिनों के भीतर पूर्ण रूप से हटा ली जाएगी ।

८. अमेरिका की सेना इरान से वापस जाएगी ।

९. हॉर्मुझ जलडमरूमध्य पूर्ण सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ३० दिनों के भीतर पुनः आरंभ होगा ।

१०. इरान के परमाणु कार्यक्रम के विषय पर निर्णय लेने के लिए ६० दिनों का चर्चा काल होगा ।

११. इरान परमाणु अस्त्र निर्माण न करने की प्रतिबद्धता को पुनः दोहराएगा ।

१२. अमेरिका इस क्षेत्र में सैन्य उपस्थिति न बढाने अथवा नवीन प्रतिबंध न लगाने पर सहमति दर्शाएगा ।

१३. इस समझौते के क्रियान्वयन पर दृष्टि रखने के लिए एक तंत्र की व्यवस्था की जाएगी । किसी भी अंतिम समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव द्वारा मान्यता प्रदान की जाएगी ।

१४. इरान का मिसाइल (प्रक्षेपास्त्र) कार्यक्रम इस समझौते का भाग नहीं होगा ।