हिन्दूबहुल तमिलनाडु में हिन्दूजागृति की आवश्यकता !

१. दिव्य आध्यात्मिक क्षेत्रों की भूमि तमिलनाडु !

तमिलनाडु एक हिन्दू बहुल राज्य है और वहां ८० प्रतिशत हिन्दू  रहते हैं । यह राम एवं शिव की भूमि है । ‘पंचभूतस्थलम्’ इसी राज्य में है । दक्षिण भारत के ५ पवित्र शिव मंदिरों को पंचभूतस्थलम् कहा जाता है । उनमें से प्रत्येक मंदिर पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश, इन तत्त्वों का प्रतिनिधित्व करता है । इन मंदिरों में से ४ मंदिर तमिलनाडु में तथा एक मंदिर आंध्र प्रदेश में है । इसके साथ ही तमिलनाडु एक विष्णु भूमि भी है । भारत के १०८ दिव्य क्षेत्रों में से ७० क्षेत्र अकेले तमिलनाडु में हैं ।

२. हिन्दू बहुल तमिलनाडु की देवता-धर्म विरोधी मानसिकता

तमिल लोगों ने सनातन धर्म का बहुत अनुकरण किया है । वहां ८० प्रतिशत हिन्दू, १३ प्रतिशत मुसलमान और ७ प्रतिशत लोग ईसाई हैं । वहां के हिन्दुओं को यह समझ ही नहीं आता कि वे ‘हिन्दू’ हैं । वे गर्व से बताते हैं कि ‘हम तमिल हैं’ । तमिल और हिन्दू  में कोई भेद नहीं है; परंतु सभी राजनीतिक दल उन्हें बताते हैं कि ‘तमिल हिन्दुओं से अलग हैं’ । तमिलनाडु में देवता, देश, हिन्दू  धर्म, संस्कृति और ब्राह्मणों का विरोध करनेवाला द्रविड आंदोलन बहुत बडे स्तर पर बढा । वे हिन्दू मंदिरों के सामने ही लिखते हैं कि ‘ईश्वर का अस्तित्व नहीं है और हम कोई भी हिन्दू  नहीं हैं ।’ यह करने के लिए हिन्दूद्रोही उन्हें उकसाते रहते हैं । इसके लिए उन्हें ईसाई प्रचारकों से वित्तीय सहायता मिलती है । हिन्दू विरोध के लिए तमिल फिल्म उद्योग का बडे स्तर पर उपयोग किया जाता है । फिल्मों के संवाद हिन्दू विरोधी लिखे जाते हैं । तमिल लोग इतने फिल्मप्रेमी हैं कि वे फिल्म अभिनेता-अभिनेत्रियों में से ही अपने राजनीतिक नेता ढूंढते रहते हैं ।

श्री. अर्जुन संपथ

३. तमिलनाडु की हिन्दू विरोधी राजनीति

वर्ष १९६७ में तमिल फिल्म अभिनेता एम.जी. रामचंद्रन् के कारण अन्नादुराई ने लोकप्रिय नेता कामराज को हराकर द्रविड सरकार की स्थापना की । उन्होंने सभी हिन्दू मंदिरों पर नियंत्रण पा लिया । हिन्दू सलाहकार मंडल के नाम पर उन्होंने मंदिरों के प्रबंधन पर हिन्दू कार्यकर्ताओं की नियुक्ति की । सार्वजनिक सभाओं में वे कहते हैं कि ‘ईश्वर का अस्तित्व नहीं है’; परंतु वास्तव में मंदिरों का प्रबंधन उनका प्रिय विषय है । ‘द्रविड मुनेत्र कडगम’ (द्रमुक) के नेता एम.के. स्टालिन ने अपने कार्यकाल में २०० से अधिक हिन्दू मंदिर ध्वस्त किए । स्टालिन के दामाद तिरुचेंदूनर मंदिर में जाकर ‘शत्रु संहार यज्ञ’ करते हैं; परंतु उनका पुत्र उदयनिधि स्टालिन साम्यवादियों के सम्मेलन में सनातन धर्म को समाप्त करने की बातें करता है, साथ ही ‘सनातन धर्म डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों के समान है’, ऐसा खुला वक्तव्य देता है । तमिलनाडु में ‘क्रिप्टो क्रिश्चियन कार्य’ (छद्म ईसाई कार्य) अधिक चलता है । उनके नाम तमिल हिन्दू होते हैं; परंतु उनका आचरण ईसाई पंथ के अनुसार होता है । वे लोग ईसाई प्रचारकों के कार्यों में भी सम्मिलित होते हैं । उदयनिधि स्टालिन ने एक ईसाई लडकी से विवाह किया है और उसने स्वयं ईसाई पंथ स्वीकार किया है; परंतु कागजों पर उसने अपनी प्रविष्टि ‘हिन्दू’ ही रखी है ।

४. कन्याकुमारी व तोताकुरा जनपद पर ईसाइयों का नियंत्रण

‘हिन्दू नियमित मंदिर जाते हैं व ईश्वर की उपासना करते हैं; परंतु चुनावों में हिन्दू विरोधी दलों को मतदान करते हैं’, ऐसी तमिलनाडु की दयनीय स्थिति है । तमिलनाडु के तटीय क्षेत्रों में व कन्याकुमारी जनपद में हिन्दुओं का बहुत बडे स्तर पर धर्मांतरण हुआ है । कन्याकुमारी क्षेत्र ईसाईबहुल बन जाने से वहां बिशप का राज है । संपूर्ण मछुआरा समाज के १०० प्रतिशत लोगों ने ईसाई पंथ अपना लिया है । उस क्षेत्र में जिलाधिकारी की कुछ नहीं चलती । बिजली का बिल, कर वसूली, मछली बाजार का मूल्य निश्चित करना इत्यादि सभी बातें चर्च ही तय करता है । जहां ईसाई लोग बहुसंख्यक होते हैं, वहां उनका शासन चलने लगता है । कन्याकुमारी और तोताकुरा, ये दो जनपद पूर्ण रूप से चर्च के नियंत्रण में हैं । वहां हिन्दू तमिल लोग अल्पसंख्यक हो गए हैं ।

५. हिन्दू धर्म की रक्षा के लिए हिन्दुत्वनिष्ठ संगठन सक्रिय

तमिलनाडु एक सनातन भूमि है । हिन्दू जनजागृति समिति, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और ‘हिन्दू मक्कल कत्छी’ (हिन्दू  जनता पार्टी) के कार्यों के कारण तमिल हिन्दुओं में जागृति आ रही है । तमिलनाडु में मुसलमानों की जनसंख्या बढ रही है और हिन्दुओं की जनसंख्या घटती जा रही है । चेन्नई के कुछ क्षेत्रों में बहुसंख्यक मुसलमान हैं । वहां मुसलमानों का ‘जमात-ए-कायदा’ कार्यान्वित किया जाता है । वहां के धर्मांधों ने पिछले ४० वर्षों से हिन्दू कार्यकर्ताओं के विरोध में फतवा निकाला है । वे हिन्दू कार्यकर्ताओं को चुन-चुनकर मार रहे हैं । अब तक उन्होंने १६० से अधिक कार्यकर्ताओं की हत्या की है । वहां अत्यंत संकट उठाकर हिन्दुत्व का कार्य करना पडता है ।

– श्री. अर्जुन संपथ, संस्थापक अध्यक्ष, ‘हिन्दू मक्कल कच्छी’.