Surajya Abhiyan : वर्षाऋतु में पेडों का गिरना मनुष्यनिर्मित आपदा – अभिषेक मुरुकटे, समन्वयक, सुराज्य अभियान

पेडों के जडों का दमन कर नागरिकों के प्राण संकट में डालनेवालों पर सदोष मनुष्यवध का अपराध पंजीकृत करने की मांग ।

बाईं ओर से श्री. सतीश कोचरेकर तथा बोलते हुए श्री. अभिषेक मुरुकटे

मुंबई – वर्षाऋतु में बार-बार पेड गिरने की घटनाएं होना, केवल प्राकृतिक आपदा नहीं है, अपितु पेडों के इर्द-गर्द हो रहा अवैध कांकरीटीकरण, पेडों की कटाई में होनेवाली लापरवाही, प्रशासनिक लापरवाही तथा राष्ट्रीय हरित आयोग के आदेशों के खुलेआम उल्लंघन से निर्मित मनुष्यनिर्मित आपदा है, ऐसा प्रतिपादन ‘सुराज्य अभियान’के महाराष्ट्र राज्य समन्वयक श्री. अभिषेक मुरुकटे ने मुंबई में आयोजित पत्रकार परिषद में बताया । पूरे राज्य में पेड गिरने की बढती घटनाओं की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए प्रशासन के दायित्व पर गंभीर प्रश्न उठाए । इस अवसर पर हिन्दू जनजागृति समिति के प्रवक्ता श्री. सतीश कोचरेकर भी उपस्थित थे ।

श्री. अभिषेक मुरुकटे ने कहा कि,

१. प्रतिवर्ष वर्षाऋतु में सैकडों पेड गिरते हैं, सडकें बंद हो जाती हैं, वाहनों को क्षति पहुंचती है, नागरिक घायल होते हैं तथा निर्दाेष नागरिकों को प्राण गंवाने पडते हैं, परंतु हर बार इसका कारण केवल मूसलधार वर्षा अथवा तूफानी हवा बताकर विषय को समाप्त किया जाता है, परंतु ये पेड अंदर से खोखले क्यों हुए ?, क्या उनकी जडों को पर्याप्त हवा-पानी मिला ? तथा ‘क्या पेडों की संरचनात्मक पडताल हुई ?’, इसका अन्वेषण नहीं होता ।

२. ‘सुराज्य अभियान’ने विश्व वसुंधरा दिवस के उपलक्ष्य में मुंबई, पुणे, कोल्हापुर, सातारा, सांगली एवं सोलापुर में पत्रकार वार्ताएं कर इस गंभीर सूत्र पर समाज एवं प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया ।

३. मुंबई, पुणे, नासिक, नागपुर एवं जलगांव में जिलाधिकारी, आयुक्त, मुख्याधिकारी एवं वृक्ष अधिकारियों को ज्ञापन प्रस्तुत कर उनके तत्काल डी-कांकरीटीकरण का अभियान चलाने की मांग की गई थी ।

४. सुराज्य अभियान ने ज्ञापनों में इसका सुस्पष्टता से उल्लेख किया कि वृक्षों को चोट पहुंचाना ‘महाराष्ट्र वृक्षों का संरक्षक एवं जतन अधिनियम, १९७५’ के अंतर्गत दंडनीय अपराध है, साथ ही पेडों की जडों के इर्द-गिर्द किए गए कांकरीटीकरण के कारण पेड गिरकर जनहानि अथवा वित्तहानि होने पर संबंधित विभाग के कार्यकारी अभियंता एवं ठेकेदारों को व्यक्तिगतरूप से उत्तरदायी मानने की मांग भी की गई थी; परंतु इन पूर्वसूचनाओं की अक्षम्य अनदेखी की गई ।

५. छुटपुट ‘वृक्ष रक्षा’ अभियान जैसे अभियानों को छोडकर सडकें, पदपथ, मलनिःस्सारण, मेट्रो, पुनर्विकास एवं सौंदर्यीकरण आदि कामों में पेडों के तनों के पास कंक्रीट, डांमर एवं पेवल ब्लॉक्स लगाने का काम जारी ही है ।

६. जब पेड गिरता है, तब हम केवल उसके गिरने से होनेवाला परिणाम देखते हैं, परंतु उसकी जडों की पहले से ही घुटन हुई होती है । प्रश्न वर्षा का नहीं है, अपितु पेडों की जडों की सांस कौन रोक रहा है ?, इसका है ।

७. पेडों की जडों के इर्द-गिर्द होनेवाला अवैध कांक्रीटीकरण तथा पेडों की कटाई में होनेवाली लापरवाही के कारण पेडों का नैसर्गिक संतुलन बिगड रहा है । पेड ऊपर से भले ही हरा दिखाई देता हो, तब भी अंदर से वह आधारहीन होकर अकस्मात गिर जाता है । ऐसी घटनाओं में केवल संबंधित अधिकारियों एवं ठेकेदारों के विरुद्ध लापरवाही का अपराध पंजीकृत करना पर्याप्त नहीं है, अपितु भारतीय न्यायसंहिता के अनुच्छेद १०५ के अनुसार उनके विरुद्ध सदोष मनुष्यवध का अपराध पंजीकृत कर उन्हें उत्तरदायी माना जाए ।

ठेकेदार एवं संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध भी अपराध पंजीकृत कीजिए – श्री. सतीश कोचरेकर

१. ३० जून को चेंबूर में एक बहुत बडा वृक्ष विद्यालय की बस पर गिर जाने से ११ वर्षीय विहान श्रीवास्तव की मौके पर ही मृत्यु हुई । १० मई को खार की लिंकिंग सडक पर ऑटोरिक्शा पर पेड गिरकर १५ वर्षीय आरिका श्रीवास्तव की मृत्यु हुई थी । उसके उपरांत सांताक्रूज (पश्चिम) में रहेजा महाविद्यालय के पास के एक निजी भवन के परिसर में पेड गिरकर ८ लोग घायल हुए । चर्चगेट रेल स्थानक के पास एवं मरीन लाईंस परिसर में भी बरगद के बडे पेड गिर गए ।

२. आधिकारिक ब्योरे के अनुसार हाल ही की वर्षाऋतु में मुंबई में कुल ९१ वृक्ष तथा वृक्षों की बडी शाखाओं के गिरने की घटनाएं हुई हैं । उनमें से १३ घटनाएं शहरी क्षेत्रों में, २२ घटनाएं पूर्व उपनगरों में, जबकि ५६ घटनाएं पश्चिम उपनगरों में हुईं । ये आंकडे स्थिति की गंभीरता दर्शानेवाले हैं ।

३. उच्च न्यायालय की देखरेख में किए गए संयुक्त सर्वेक्षण में सडकों से सटे ६५ प्रतिशत वृक्ष कंक्रीट के जाल में फंस गए हैं । ३ सहस्त्र ६९१ पेड सीमेंट के घेरे में होने के कारण मुंबई उच्च न्यायालय ने तीव्र अप्रसन्नता व्यक्त की है ।

४. राष्ट्रीय हरित आयोग के आदेश का उल्लंघन करने के प्रकरण में ठेकेदारों एवं संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध अपराध पंजीकृत किए जाने चाहिए ।

सुराज्य अभियान की मांगें ।

१. राज्य में सर्वत्र पेडों के जडों की संरचनात्मक पडताल की जाए ।

२. पेड गिरने की घटना के उपरांत उसके गिरने के मूल कारणों का वैज्ञानिक अन्वेषण करना अनिवार्य किया जाए ।

३. अवैध कांक्रीटीकरण करनेवाले दोषी अधिकारियों एवं ठेकेदारों के विरुद्ध आपराधिक कार्यवाही की जाए ।

४. सभी पेडों के इर्द-गिर्द न्यूनतम १ मीटर मिट्टी का खाली स्थान बनाए रखने का आदेश तत्काल लागू किया जाए ।

५. पूरे राज्य में विशेष डी-कांक्रीटीकरण अभियान चलाकर उसका कार्यान्वयन ब्योरा सार्वजनिक किया जाए ।

६. पिछले ३ वर्षां में किए गए वृक्षारोपण एवं प्रत्यारोपण के स्वतंत्र तृतीय पक्षीय ब्योरे तैयार कर उसका ब्योरा जनता के सामने रखा जाए ।

‘एक ओर वृक्षसंवर्धन के फलक लगाना तथा दूसरी ओर पेडों की जडों को सीमेंट में गाड देने की यह दोहरी नीति अब बंद होनी चाहिए । यह विषय केवल पर्यावरण का नहीं है, अपितु वह नागरिकों के प्राणों की सुरकशा से संबंधित गंभीर समस्या है । इस समस्या का तुरंत प्रभावी समाधान नहीं निकाला, तो न्यायालयीन लडाई, अवमानना याचिका एवं लोकजागरण आंदोलन के माध्यम से अगले कदम उठाए जाएंगे’, यह चेतावनी भी श्री. मुरुकटे ने दी ।