(ग्रूमिंग टोली अर्थात छोटी लडकियां अथवा युवतियां इन्हें जाल में फंसाकर उनका लैंगिक शोषण करनेवाले)

लन्दन (ब्रिटेन) – ब्रिटिश संसद में अभी कुछ दिन पूर्व ही में ‘ग्रूमिंग टोली’ के विषय में पुनः एक बार चर्चा प्रारम्भ हुई है । ग्रेट यारमाउथ के सांसद रूपर्ट लोव ने संसद में अनेक पीड़ित महिलाओं एवं लडकियों के साक्ष्य पढकर सुनाए । इन साक्ष्यों में पुलिस अधिकारी द्वारा बलात्कार एवं जातीय आधार पर ब्रिटिश लडकियों को लक्ष्य करने जैसी अत्यन्त पीडादायक घटनाएं सामने आई हैं ।
१. संसद में लोव ने कहा कि, अनेक पीडिताओं ने अनेक वर्ष अत्याचार सहन किए; परन्तु उनकी शिकायतों को गम्भीरता से नहीं लिया गया । यह केवल घटनाएं नहीं थीं, अपितु एक संघटित अपराध था, जिसे रोकने में अनेक संस्थाएं असफल रहीं ।
२. सांसद लोव ने इन ग्रूमिंग टोली प्रकरणों की स्वतन्त्र जांच की । जांच में ऐसा पाया गया कि, इन बाल लैंगिक शोषण के प्रकरणों में स्थानीय क्षेत्रों से अधिक प्रमाण मिले हैं ।
३. लोव ने एक महिला की पीड़ा का उल्लेख किया । उस महिला के पिता इमाम (इस्लाम के अध्येता) थे । उस महिला ने बताया कि, अनेक वर्षों तक उस पर ६०० से ७०० भिन्न-भिन्न पुरुषों ने बलात्कार किया । एक छोटी लडकी ने बताया कि, उसके मुख पर सिगरेट से दागा गया था । एक अन्य पीडिता ने बताया कि, जब वह १२ से १३ वर्ष की थी, तब उसके गुप्तांग में मदिरा की कूपी (बोतल) डालकर उसे तोडा गया था । एक पीडिता ने साक्ष्य दिया कि, ग्रूमिंग टोली चलानेवाले लोग जातीय टिप्पणियां भी करते थे । वे कहते थे, ‘श्वेतवर्णीय (गोरी) लडकियों पर संस्कार मुसलमान लडकियों से कम होते हैं ।’
एक पीडिता ने बताया कि, इस्लाम के पर्वों के समय उन पर होनेवाले अत्याचार बढ जाते थे । विशेष रूप से ईद के आस-पास अधिक दावतों का आयोजन होता था, तब उन्हें लक्ष्य किया जाता था, जिसमें दावत में सहभागी होनेवाले अन्य लोग भी उन पर बलात्कार करते थे ।
धर्म एवं जातीय भेदभाव के आधार पर किया लक्ष्य !
अनेक पीडिताओं ने शारीरिक हिंसा के साथ मानसिक शोषण का भी उल्लेख किया । एक पीडिता ने बताया कि, उसे उसके ईसाई होने के कारण लक्ष्य किया गया । शोषण करते समय वे लोग ‘क्रॉस’ की ओर देखते और कहते, ‘अब तुम्हारा ईश्वर कहां है ? तुम्हारे ईश्वर ने तुम्हें त्याग दिया है क्या ?’
ब्रिटिश श्वेतवर्णीय लडकियां लक्ष्य !
ग्रूमिंग टोली ने बहुधा ब्रिटिश मूल की श्वेतवर्णीय लडकियों को लक्ष्य किया । पीडिताओं ने बताया कि, जातीय भेदभाव किया जाता था । मेरे साथ जो लडकियां थीं, वे सभी श्वेतवर्णीय (मूल ब्रिटिश) थीं ।
ऐसी ही एक अन्य पीडिता ने बताया कि, उसने १५ से २० लडकियों को कुत्तों के पिंजरों में बन्द देखा था । ये सभी मूल ब्रिटिश थीं ।
इतना ही नहीं, इन प्रकरणों में पुलिस अधिकारियों की भी सहभागिता होने की बात उजागर हुई है । एक पीडिता ने बताया कि, देश के भिन्न-भिन्न स्थानों पर उस पर अनेक पुलिस अधिकारियों ने बलात्कार किया ।
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