म्हार्दोळ (गोवा) में राज्यस्तरीय मंदिर न्यास परिषद

म्हार्दोळ (गोवा), ३१ मई (वार्ता.) – मंदिरों के प्रतिनिधियों को अपने दायित्व को समझना चाहिए । आज मंदिर न्यासियों (विश्वस्तों) को संगठित होने के लिए निरंतर क्यों कहना पड रहा है ? गोमंतक में पूर्वजों ने प्राण की चिंता त्यागकर संघर्ष करके यहां के देवताओं की मूर्तियों तथा मंदिरों की रक्षा की । इस इतिहास की पुनरावृत्ति नहीं हो सकती, ऐसा नहीं है । संभल, उत्तर प्रदेश में श्री हरिहर मंदिर में हिन्दू प्रवेश नहीं कर सकते तथा यह विषय न्यायाधीन है, साथ ही बंगाल में १५ वर्षों से बंद पडा श्री दुर्गा मंदिर नवीन सरकार ने अभी-अभी खोला है । स्वतंत्र भारत में सभी को समान अधिकार होते हुए भी मंदिरों की यह स्थिति है । ऐसी स्थिति गोवा सहित देश में अन्य स्थानों पर भी उत्पन्न हो सकती है । इसके लिए मंदिरों के प्रतिनिधियों तथा हिन्दुओं का संगठित होना अत्यंत आवश्यक है, ऐसा आह्वान हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री. रमेश शिंदे ने किया ।

पुर्तगालियों के ४५० वर्षों के क्रूर शासनकाल में भी यह संस्कृति अक्षुण्ण रही है । गोवा में आने वाले पर्यटकों को समुद्र तटों से मंदिर संस्कृति की ओर आकर्षित करने के लिए गोवा सरकार ‘एकादश तीर्थ’ जैसी अनेक योजनाओं के माध्यम से प्रयासरत है । ‘गोवा भोगभूमि है’ ऐसा दुष्प्रचार हो रहा है, जबकि गोवा को ‘योगभूमि’, ‘परशुरामभूमि’, ‘मंदिर संस्कृति युक्त भूमि’ के रूप में सामने लाया जा रहा है । इसी पृष्ठभूमि पर ३१ मई को राज्य के म्हार्दोळ स्थित श्री महालसा नारायणी मंदिर के पवित्र प्रांगण में एक दिन की द्वितीय राज्यस्तरीय मंदिर न्यास परिषद प्रातः १० से सायं ६.३० बजे तक आयोजित की गई थी । इस अवसर पर श्री. शिंदे बोल रहे थे । यह मंदिर परिषद मंदिर संस्कृति के महत्त्व को रेखांकित करने वाली, साथ ही उसकी रक्षा के लिए मंदिर प्रतिनिधियों के संगठित होने के महत्त्व को प्रतिपादित करने वाली सिद्ध हुई ।
श्री. शिंदे ने आगे कहा, ‘‘मंदिर के न्यासी अथवा महाजनों को ‘हम ईश्वर का राज्य चला रहे हैं’, ऐसा भाव रखकर मंदिर का कार्य करना चाहिए । अयोध्या में श्रीराम मंदिर के निर्माण के पश्चात अब तक २३ करोड ८२ लाख भक्तों ने श्रीराम के दर्शन किए हैं । इससे मंदिर को १२ सहस्र करोड रुपये की आय प्राप्त हुई है । इससे मंदिर की क्षमता को सभी को ध्यान में रखना चाहिए । महाराष्ट्र में ‘महाराष्ट्र देवस्थान इनाम निर्मूलन अधिनियम-२०२६’ आने वाला है । इस विधान (कानून) के कारण मंदिरों की भूमि नष्ट हो जाएगी । मंदिरों की रक्षा के लिए सरकार हमारी ही क्यों न हो, किंतु कानून निरस्त होने तक हम संघर्ष करेंगे । ईश्वर के नाम पर समर्पित भूमि को अधिग्रहित करने का अधिकार किसी भी सरकार को नहीं है । ऐसा कानून भविष्य में गोवा में भी आ सकता है तथा इसके लिए मंदिर प्रतिनिधि अभी से ही भक्तों का संगठन करें । यदि मंदिरों का संगठन हो गया, तो सरकार ऐसे कानून बनाने का साहस नहीं करेगी ।’’
इस प्रकार संपन्न हुआ मंदिर परिषद का प्रातःकालीन सत्र !
१. सनातन के सद्गुरु नंदकुमार जाधव, ह.भ.प. सुहास बुवा वझे, गोमंतक मंदिर महासंघ के सचिव श्री. जयेश थळी, हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री. रमेश शिंदे तथा श्री महालसा नारायणी देवस्थान के अध्यक्ष श्री. प्रेमानंद कामत के कर-कमलों द्वारा दीप प्रज्वलन कर एवं शंखनाद से परिषद का शुभारंभ हुआ ।
२. पुरोहित श्री. दामोदर वझे ने वेदमंत्र पाठ किया ।
३. सूत्रसंचालिका श्रीमती गौरी नायक ने इस अवसर पर सनातन संस्था के संस्थापक सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले जी के मंदिर परिषद के लिए भेजे गए ‘राष्ट्र एवं धर्म रक्षा के लिए मंदिर संस्कृति का पुनरुज्जीवन अपरिहार्य’ इस विषय पर संदेश का वाचन किया ।
४. श्रीक्षेत्र तपोभूमि के श्री दत्त पद्मनाभ पीठ के पीठाधीश्वर (पद्मश्री पुरस्कार प्राप्त) विभूषित धर्मभूषण सद्गुरु ब्रह्मेशानंदाचार्य स्वामीजी के मंदिर न्यास परिषद के संदेश का ‘स्वामी ब्रह्मानंद वैदिक गुरुकुल एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट श्रीक्षेत्र तपोभूमि गुरुपीठ’ के प्रधानाचार्य वेदमूर्ति अनुप शांताराम शेलार ने वाचन किया ।
परिषद के प्रातःकालीन सत्र में महानुभावों का प्रबोधक मार्गदर्शन
परिषद के उद्घाटन सत्र में ह.भ.प. सुहास बुवा वझे ने ‘भक्तों को मंदिर से जोडने के लिए किए जाने वाले प्रयास’ इस विषय पर मार्गदर्शन किया । सद्गुरु नंदकुमार जाधव ने ‘मंदिर न्यासियों के लिए कालानुसार साधना’ इस विषय पर प्रबोधन किया । श्री. रमेश शिंदे ने ‘ हिन्दुओं के संगठन की दृष्टि से मंदिरों का संगठन, यह समय की आवश्यकता’ इस विषय पर मार्गदर्शन किया । सनातन संस्था की श्रीमती शुभा सावंत ने ‘मंदिर : कालानुसार धर्मप्रसार का केंद्र बिंदु’ इस विषय में जानकारी दी । कार्यक्रम का सूत्रसंचालन श्री. रोहन देसाई तथा श्रीमती गौरी नायक ने किया ।
मंदिरों की रक्षा के लिए विविध प्रस्ताव स्वीकृत कर परिषद का समापन हुआ
परिषद के सायंकालीन सत्र में ‘मंदिरों को धर्मशिक्षा का केंद्र कैसे बनाया जाए ?’, ‘मंदिर न्यासियों के सम्मुख आने वाली वैधानिक तथा अन्य कठिनाइयां’, ‘मंदिर महासंघ संगठन की दिशा’ आदि विषयों पर विमर्श किया गया, साथ ही उपस्थित महानुभावों ने इस विषय पर मार्गदर्शन किया । परिषद के समापन सत्र में मंदिर रक्षा हेतु विविध प्रस्ताव प्रस्तुत किए गए । इस अवसर पर मुंबई में संपन्न हुए श्री राजमातंगी यज्ञ का चलचित्र (वीडियो) भी प्रदर्शित किया गया ।
पंढरपुर के श्री विठ्ठल की मूर्तियों के रासायनिक विलेपन पर न्यायालय ने रोक लगाई !
Ram Mandir Donation Theft : श्रीराम मंदिर में दान की गणना करने वाले कर्मचारियों को हटाया गया !
देश के मंदिरों के लिए एक स्वतंत्र ‘सनातन संरक्षण मंडल’ या समिति का गठन किया जाना चाहिए ! – Shankaracharya Sadanand Saraswati
Hindu Temple Funds : मंदिरों के २४६ करोड रुपयों से निर्मित होने वाली व्यावसायिक संकुल (कॉम्प्लेक्स) की परियोजनाएं निरस्त !
Kolhapur Mahalakshmi Devi : १ सहस्र ४४५ करोड रुपए के ‘श्री महालक्ष्मीदेवी मंदिर विकास प्रारूप’ का केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के हाथों शुभारंभ ।
Dhaka Hindu Protest : ढाका में हिन्दुओं ने निकाला विशाल मशाल जुलूस !