Aland Dargah Conflict : आलंद लाडले मशाक दरगाह दंगों में सभी मुसलमान आरोपियों के विरुद्ध प्रकरण कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने वापस लिए ।

मुसलमानों ने शिवलिंग पर किया था मलमूत्र विसर्जन ।

आलंद लाडले मशाक दरगाह (बाएं) और यू.टी. खादर के लिखित अनुरोध का पत्र (दाएं)

कलबुर्गी (कर्नाटक) – कलबुर्गी जिले के आलंद शहर में स्थित प्रसिद्ध लाडले मशाक दरगाह दंगों से जुडे आपराधिक प्रकरणों को वापस लेने का निर्णय सरकार ने लिया है ।

विधानसभा अध्यक्ष यू.टी. खादर के लिखित अनुरोध पर यह निर्णय लिया गया है, जिससे दंगों में सम्मिलित मुसलमान युवकों तथा कुछ प्रमुख नेताओं को लाभ मिलेगा ।

गृहमंत्री डॉ. जी. परमेश्वर ने किया निर्णय का समर्थन ।

जब गृहमंत्री डॉ. जी. परमेश्वर से प्रकरणों की वापसी के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि वे विस्तृत जानकारी नहीं देंगे । मंत्रिमंडल में सभी पहलुओं पर चर्चा करने के उपरांत तथा कानूनी परिधि में रहकर ही यह निर्णय लिया गया है । कोई भी निर्णय अचानक नहीं लिया गया ।

क्या है प्रकरण ?

वर्ष २०२२ में महाशिवरात्रि के समय आलंद शहर की लाडले मशाक दरगाह परिसर में स्थित राघव चैतन्य शिवलिंग की पूजा को लेकर दोनों समुदायों के बीच बडा विवाद उत्पन्न हुआ था । आरोप लगाया गया कि “कुछ मुसलमानों ने पवित्र शिवलिंग पर मलमूत्र विसर्जन कर उसका अपमान किया”, जिसके पश्चात स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई थी । शिवलिंग अपवित्र होने की जानकारी मिलते ही तत्कालीन केंद्रीय मंत्री भगवंत खुबा, हिन्दू संगठनों के नेता और जनप्रतिनिधि उस स्थान को साफ कर पूजा करने के लिए आगे आए थे ।

इस समय कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पहुंचे तत्कालीन जिलाधिकारी तथा पुलिस अधीक्षक के वाहनों पर भी उग्र भीड ने पथराव किया था । डंडों से गाडियों पर तोडफोड की गई एवं जानलेवा हथियार दिखाकर सार्वजनिक संपत्ति को क्षति पहुंचाई गई थी ।

भाजपा का विरोध –

भाजपा विधायक सी.टी. रवि ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार एक ओर हिन्दू कार्यकर्ताओं को लक्ष्य बनाकर उनके विरुद्ध झूठे अभियोग प्रविष्ट करवा रही है एवं पुलिस के माध्यम से उन्हें परेशान कर रही है, जबकि दूसरी ओर मुसलमानों पर प्रविष्ट आपराधिक अभियोग वापस लिए जा रहे हैं । उन्होंने कहा कि आगजनी, सार्वजनिक संपत्ति को हानि पहुंचाने जैसे गंभीर प्रकरणों को वापस लेकर सरकार ने यह अनुचित संदेश दिया है कि “हम अपराधियों के साथ हैं ।”

इन हिंसक घटनाओं तथा जानलेवा आक्रमणों के संबंध में उस समय पुलिस ने विभिन्न मुसलमान नेताओं तथा युवकों के विरुद्ध कुल १३ गंभीर आपराधिक अभियोग प्रविष्ट किए थे । अब सिद्धारमैया के नेतृत्ववाली कांग्रेस सरकार ने ये सभी १३ प्रकरण पूरी तरह वापस ले लिए हैं ।

संपादकीय भूमिका

हिन्दू मंदिरों का अपमान करने के उपरांत दंगे करने वाले मुसलमानों पर प्रविष्ट अभियोग वापस लेकर कांग्रेस सरकार ने उन्हें संरक्षण दिया है तथा हिन्दुओं को यह भान कराया है कि वे मानो पाकिस्तान में रह रहे हों । ऐसी सरकार को सत्ता में बैठानेवाले हिन्दुओं को अब तो जागना चाहिए क्या ?