‘महाराष्ट्र देवस्थान इनाम निर्मूलन प्रारूप अधिनियम’ के विरोध में राज्य के सहस्रों मंदिर हुए एकत्रित !
हिन्दू मंदिरों की भूमि अधिगृहीत करने की शासकीय नीति के विरोध में तीव्र असंतोष !

मुंबई – महाराष्ट्र शासन के राजस्व एवं वन विभाग द्वारा प्रस्तावित ‘महाराष्ट्र देवस्थान इनाम निर्मूलन प्रारूप अधिनियम, २०२६’ राज्य के सहस्रों हिन्दू देवस्थानों की भूमि छीननेवाला एवं उनके अस्तित्व को संकट में डालनेवाला है । सरकार आगामी वर्षाकालीन सत्र में यह विधि (कानून) बनाने की सिद्धता (तैयारी) में है, जिसके कारण इस अन्यायपूर्ण अधिनियम के विरोध में महाराष्ट्र मंदिर महासंघ सहित राज्य के अष्टविनायक मंदिर एवं सभी प्रमुख मंदिरों के १ सहस्र से अधिक न्यासी, मंदिर प्रतिनिधि तथा हिन्दू संगठन एकत्र आए हैं । इस अधिनियम के विरोध में राज्यभर के मंदिर न्यासियों ने स्वयं मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, अनेक मंत्रियों, राज्यमंत्रियों, विधायकों सहित विभिन्न विभागीय आयुक्तों, जिलाधिकारियों, प्रांताधिकारियों एवं तहसीलदारों को एक ही समय में ३०० से अधिक स्थानों पर निवेदन सौंपे हैं । इन निवेदनों के माध्यम से संगठित रूप से यह मांग की गई है कि ‘हिन्दू देवस्थानों के अस्तित्व को समाप्त करनेवाले इस दमनकारी अधिनियम को सरकार बिना किसी शर्त के तत्काल वापस ले’ । इस जनआक्रोश का संज्ञान लेते हुए राज्य के अनेक विधायकों ने भी जनभावनाओं का आदर करते हुए मंदिर प्रतिनिधियों के समक्ष यह दृढ भूमिका रखी कि ‘आगामी वर्षाकालीन सत्र में हम इस अधिनियम का प्रखर विरोध करेंगे’ ।

निवेदन में कहा गया है कि…,
१. छत्रपति शिवाजी महाराज एवं ऐतिहासिक राजवंशों ने मंदिरों में नैवेद्य, अन्नक्षेत्र एवं उत्सवों के सुचारू संचालन हेतु शत एकड भूमि ‘इनाम’ के रूप में मंदिरों के नाम समर्पित की थी ।
२. ‘महाराष्ट्र देवस्थान इनाम निर्मूलन प्रारूप अधिनियम’ नामक इस प्रस्तावित विधि की धारा ३ एवं ४ के माध्यम से इन समस्त इनामों को निरस्त करके देवताओं को दान की गई भूमि को निजी व्यक्तियों के अधिकार में देने का षड्यंत्र रचा गया है । इस अधिनियम की धारा १ (उपधारा २) अत्यंत पक्षपातपूर्ण है । इसके द्वारा वक्फ बोर्ड की भूमियों को इस अधिनियम से पूर्णतः मुक्त रखकर विशेष संरक्षण प्रदान किया गया है ।
३. हिन्दू मंदिरों की भूमियां छीनी जा रही हैं । जिस वक्फ ने सहस्रों हिन्दुओं की भूमियों को अवैध रूप से हडप लिया है, उस वक्फ की भूमियों को संरक्षण दिया जा रहा है । यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि हिन्दुओं के ही मतों पर निर्वाचित सरकार यह धार्मिक भेदभाव कर रही है ।
४. इस प्रारूप की धारा १८ के अनुसार, राजस्व अधिकारियों के किसी भी स्वेच्छाचारी (मनमाने) निर्णय के विरोध में श्रद्धालु अथवा न्यासी दीवानी न्यायालय (सिविल कोर्ट) की शरण नहीं ले सकेंगे । हिन्दुओं के लिए लोकतंत्र में न्यायालय के द्वार बंद किए जा रहे हैं । देवस्थानों की भूमियों से अवैध अतिक्रमण हटाने के स्थान पर, १ जनवरी २०११ से पूर्व के अतिक्रमणकारियों को सीधे स्वामित्व अधिकार पीप्रदान करना देवस्थानों की पवित्र संपत्ति की वैधानिक लूट के समान ही है ।
🚨 Massive opposition across Maharashtra against the proposed :Maharashtra Devasthan Inam Abolition Draft Act, 2026'
📜 Over 300 memorandums submitted – from the @CMOMaharashtra to Tehsildars
Thousands of temples unite against the move to seize Hindu temple lands
Key concerns… pic.twitter.com/21qWCvh3vB— Sanatan Prabhat (@SanatanPrabhat) May 22, 2026
अधिनियम के विरोध में राजस्व मंत्री के साथ बैठक करने का मुख्यमंत्री एवं उपमुख्यमंत्री का आश्वासन !

इस राज्यव्यापी आंदोलन का संज्ञान लेते हुए रत्नागिरी के पालकमंत्री उदय सामंत ने ‘यह अधिनियम लागू न किया जाए’, इस हेतु मुख्यमंत्री को पत्र लिखने का आश्वासन दिया है । मंदिर महासंघ के राष्ट्रीय संगठक श्री. सुनील घनवट ने स्वयं मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस एवं उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से प्रत्यक्ष भेंट कर इस अधिनियम का तीव्र विरोध प्रकट किया है । इस पर मुख्यमंत्री एवं उपमुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया है कि ‘हम राजस्व मंत्री के साथ इस विषय पर तत्काल बैठक करेंगे’ ।
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