
ढाका (बांग्लादेश) — बंगाल एवं असम में भाजपा की सत्ता आने के उपरांत इसका पडोसी बांग्लादेश पर क्या प्रभाव पडेगा, इस पर चर्चा आरंभ हो गई है । बंगाल के एग्जिट पोल में भाजपा की जीत की संभावना जताए जाने के पश्चात स बांग्लादेश की संसद में एक सांसद ने आशंका जताई थी कि बंगाल से विस्थापित लोग बांग्लादेश आ सकते हैं, जिससे एक नया संकट उत्पन्न हो सकता है । अब बांग्लादेश के पत्रकार अल्ताफ परवेज ने भी इस विषय पर टिप्पणी की है ।
बांग्लादेशी अखबार ‘प्रथोम आलो’ में परवेज ने लिखा है कि भारतीय जनता पार्टी को वर्ष २०११ के बंगाल विधानसभा चुनाव में एक भी सीट नहीं मिली थी; परंतु १५ वर्षों के भीतर उसने २०० का आंकडा पार कर लिया । दक्षिण एशिया की राजनीति के लिए यह ‘राइट शिफ्ट’ (दक्षिणपंथ की ओर झुकाव) का एक ऐतिहासिक संकेत है । बंगाल के चुनाव परिणामों ने सीमा पार बांग्लादेश में असहजता उत्पन्न कर दी है । वर्तमान के वर्षों में भारत के किसी भी चुनाव ने बांग्लादेश में इतनी हलचल नहीं मचाई थी ।
बांग्लादेश का ध्यान क्यों था ?
अल्ताफ परवेज के अनुसार, बंगाल में ‘बंगाली पहचान’ का विषय राजनीतिक रूप से पीछे छूटना एवं भाजपा तथा तृणमूल कांग्रेस की रणनीतियों पर काफी चर्चा हो रही है । इस चुनाव के परिणामों ने बांग्लादेश में बेचैनी बढाई है । इसके पीछे एक कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं गृह मंत्री अमित शाह का आक्रामक चुनाव प्रचार भी माना जा रहा है ।
बांग्लादेश क्यों चिंतित है ?
- बंगाल के चुनावों के समय हुए राजनीतिक विवादों में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से बांग्लादेश का उल्लेख होता रहा है । अमित शाह के बयानों से वहां की चिंता और बढ गई, क्योंकि वे केंद्र सरकार के एक प्रभावशाली मंत्री हैं । परवेज का दावा है कि बंगाल में भाजपा की जीत का असर भारत की सीमाओं के बाहर भी पड सकता है । मतदाता सूची की समीक्षा के समय हटाए गए लाखों लोगों को सीमा पार भेजने का प्रयास किया जा सकता है, ऐसा कुछ नेताओं के बयानों से संकेत मिलता है । अब भाजपा दिल्ली के साथ-साथ बंगाल में भी सत्ता में है ।
(और इनकी सुनिए..)‘घुसपैठियों को हटाने’ से संबंधों में तनाव की आशंका
परवेज का कहना है कि लोगों को सीमा पार भेजने के प्रयास भारत एवं बांग्लादेश के संबंधों में तनाव उत्पन्न कर सकते हैं । कुछ दिन पूर्व के हफ्तों में दोनों देशों के संबंधों में जो सुधार हुआ है, वह प्रभावित हो सकता है । यह स्थिति कई जटिल कूटनीतिक एवं मानवीय प्रश्न खडे कर सकती है ।
उनके अनुसार, आसाम एवं बंगाल जैसे सीमावर्ती राज्यों में भाजपा के दृढ होने से बांग्लादेश पर दीर्घकालीन दबाव बना रह सकता है । यदि भारतीय नेताओं के ऐसे बयान आगे भी जारी रहते हैं, तो भविष्य में बांग्लादेश में भी इस सूत्रों पर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो सकती हैं ।
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