सबरीमला प्रकरण में सर्वोच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ता संस्था को फटकारते हुए पूछा प्रश्न l

नई दिल्ली – सबरीमला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई के समय सर्वोच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ता ‘इंडियन यंग लॉयर्स एसोसिएशन’ को कडे शब्दों में फटकार लगाई । न्यायालय ने वर्ष २००६ में प्रविष्ट की गई जनहित याचिका को कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग बताते हुए कहा, “आपने यह याचिका क्यों प्रविष्ट की ? क्या आप देश के मुख्य पुजारी हैं ?”
१. न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा कि किसी भी कानून में कोई संस्था व्यक्तिगत आस्था अंगीकार नहीं कर सकती । किसी व्यक्ति की किसी पर श्रद्धा हो सकती है, किन्तु संस्था की किसी पर श्रद्धा होना संभव नहीं है । आपके पास उचित विवेक नहीं है ।
"Are you the Chief Priest of the country?" ⚖️
The Supreme Court slams the Indian Young Lawyers Association (IYLA) over the 2006 Sabarimala PIL, calling it an "abuse of the legal process."
#Sabarimala #SupremeCourt #LegalNews #CJISuryakant#JusticeMMSundresh
PC: @LawChakra pic.twitter.com/2nOUGPGbgj— Sanatan Prabhat (@SanatanPrabhat) May 5, 2026
२. न्यायमूर्ति अरविंद कुमार ने भी संस्था से पूछा कि क्या याचिका प्रविष्ट करने के लिए कोई औपचारिक प्रस्ताव पारित किया गया था ? एवं क्या संस्था के अध्यक्ष ने उसे अनुमति दी थी ?
३. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि ऐसी याचिकाएं प्रविष्ट करने की जगह संस्था को युवा अधिवक्ताओऺ के हित में काम करना चाहिए ।
४. न्यायमूर्ति नागरत्ना ने यह भी कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले प्रतिभाशाली युवा अधिवक्ताओऺ को सहयोग करना एवं उनके लिए अवसर निर्माण करना अधिक महत्वपूर्ण है ।
५. संस्था के अधिवक्ताओऺ ने कहा कि संस्था का उद्देश्य भगवान अयप्पा के भक्तों की आस्था को चुनौती देना नहीं, अपितु उसे बनाए रखना है । मंदिर के मुख्य पुजारी ने पहले यह मत व्यक्त किया था कि कम आयु वर्ग की महिलाओं का प्रवेश देवता की इच्छा के विरुद्ध है ।
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