मद्रास उच्च न्यायालय में नियुक्त !

चेन्नई – देश के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के प्रकरण में मृत्युदण्ड की दंड प्राप्त अपराधी ए . जी . पेरारीवलन् ३१ वर्षों के पश्चात अधिवक्ता बन गया है तथा वह मद्रास उच्च न्यायालय में सम्मिलित हुआ है । वर्तमान में पेरारीवलन् की आयु ५४ वर्ष है । जिस न्यायव्यवस्था के आदेश से पेरारीवलन् ने अपने जीवन के अनेक वर्ष कारागार में व्यतीत किए, उसी न्यायव्यवस्था में आज वह अधिवक्ता के रूप में नियुक्त हुआ है ।
वर्ष १९९१ में तमिलनाडु के श्रीपेरंबुदूर में निर्वाचन सभा के समय हुए आत्मघाती बम विष्फोट में राजीव गांधी की मृत्यु हुई थी । उनकी हत्या के पश्चात कुछ ही सप्ताहों में पेरारीवलन् सहित कुल ७ व्यक्तियों को बंदी बनाया गया । तदुपरान्त उन्हें मृत्युदण्ड की सजा सुनाई गई । इसके विरुद्ध उसके परिजनों ने अनेक वर्षों तक संघर्ष किया । तत्पश्चात पेरारीवलन् की मृत्युदण्ड की सजा को आजीवन कारावास में परिवर्तित कर दिया गया । तदनंतर मई २०२२ में सर्वोच्च न्यायालय ने पेरारीवलन् की मुक्ति का आदेश दिया ।
मुक्त होने के पश्चात प्राप्त की कानूनी शिक्षा !
कारागार से मुक्त होते ही पेरारीवलन् ने सीधे बेंगलुरु गया तथा कर्नाटक राज्य विधि विश्वविद्यालय के अन्तर्गत ‘डॉ . बी . आर . आंबेडकर लॉ कॉलेज’ में प्रवेश लिया । वर्ष २०२५ में उसने अपनी विधि स्नातक की उपाधि प्राप्त की एवं उसी वर्ष ‘ऑल इंडिया बार काउंसिल’ की परीक्षा उत्तीर्ण कर अधिवक्ता का प्रमाणपत्र (सनद) भी प्राप्त किया ।
कारागार के सहस्रों बंदीयों के लिए संघर्ष करना है ! – पेरारीवलन्मद्रास उच्च न्यायालय में अधिवक्ता के रूप में नियुक्त होने के पश्चात एक अंग्रेजी समाचार वाहिनी के प्रतिनिधि से संवाद करते हुए पेरारीवलन् ने कहा, ‘‘मुझे सुप्रसिद्ध अधिवक्ता इत्यादि बनने की तनिक भी इच्छा नहीं है । वह मेरा ध्येय भी नहीं है । विधि सहायता न मिलने के कारण कारागार में वर्षों से कष्ट भोग रहे सहस्रों बंदीयों के लिए मुझे संघर्ष करना है । विशेष रूप से जिन्हें आजीवन कारावास का दंड मिला है, निर्धनता के कारण विधिक ( कानूनी) सहायता प्राप्त करना जिनके लिए असंभव है तथा केवल इसी कारण से जो अपनी मुक्ति के लिए अनेक वर्षों से प्रतीक्षा कर रहे हैं, उन बंदीयों के लिए मुझे कार्य करना है ।’’ |
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