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(‘शाहीनबाग’ दिल्ली का एक मुसलमान बहुल क्षेत्र है, जहां मुसलमानों ने एकत्रित होकर अनेक महीनों तक आंदोलन कर सामान्य नागरिकों का जीवन ठप्प किया था ।)

पुणे – समस्त पुणेवासियों का आस्था का केंद्र, साथ ही ऐतिहासिक एवं धार्मिकदृष्टि से महत्त्वपूर्ण माना जानेवाला सारसबाग तथा उसमें स्थित श्री सिद्धिविनायक मंदिर परिसर की पवित्रता बनाए रखने की मांग को लेकर सारसबाग के पदपथ पर हिन्दुत्वनिष्ठों ने तीव्र आंदोलन किया । इस आंदोलन में विभिन्न हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता बडी संख्या में उपस्थित थे । पेशवाकालीन परंपरा प्राप्त इस पवित्रस्थल को संरक्षण देने में प्रशासन पूर्णरूप से असफल सिद्ध हुआ है । ‘रमजान ईद’ के दूसरे दिन इस परिसर में बडी संख्या में भीड इकट्ठा होने की पृष्ठभूमि पर इस वर्ष किसके दबाव में इसकी अनुमति मिली ?, यह सूत्र उठाकर हिन्दुत्वनिष्ठों ने प्रशासन की भूमिका पर प्रश्नचिन्ह उठाया ।

‘सारसबाग में हो रहे धार्मिक अतिक्रमण की कडी निंदा’, ‘सारसबाग में धार्मिक अतिक्रमण की अनुमति देनेवाले अधिकारियों पर कार्यवाही कीजिए’, ‘धार्मिक क्षेत्र की पवित्रता नष्ट करनेवालों का धिक्कार’ ‘हिन्दुओं के धार्मिक क्षेत्र का हराकरण सहन नहीं करेंगे’, ‘सारसबाग में चल रहा लैंड जिहाद सहन नहीं करेंगे’, ऐसी जोरदार नारेबाजी कर प्रशासन की निंदा की गई ।
२२ मार्च २०२६ को सारसबाग में भीड इकट्ठा हुई थी । रमजान ईद के समय यहां भीड इकट्ठा करने की अनुमति देनेवाले संबंधित अधिकारियों की जांच कर उन पर कठोर कार्यवाही की जाए, भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए ठोस उपाय किए जाएं, साथ ही मंदिर परिसर में गैरहिन्दुओं के सामूहिक कार्यक्रमों पर स्थाईरूप से प्रतिबंध लगाया जाए, ऐसी आंदोलनकारियों ने मांग की । (ऐसी मांगें करनी ही क्यों पडती हैं ? क्या प्रशासन इसके लिए सक्षम नहीं है ? – संपादक) २७ मई २०२६ को ‘बकरी ईद’ की पूर्वसंध्या पर सारसबाग परिसर में कोई भी अप्रिय घटना न हो; इसके लिए प्रशासन पहले ही प्रतिबंधात्मक आदेश लागू करे, यह भी मांग इस अवसर पर की गई । आंदोलनकारियों ने यह चेतावनी भी दी कि इन मांगों का यदि संज्ञान नहीं लिया गया, तो आनेवाले समय में लोकतांत्रिक पद्धति से तीव्र आंदोलन किया जाएगा ।
सहभागी मान्यवर
इस आंदोलन में लेखापरीक्षक श्री. सर्वेश मेहेंदळे, ‘पतित पावन संगठन’ पुणे के शहराध्यक्ष श्री. स्वपनिल नाईक, ‘वीर सावरकर विचार मंच’ के श्री. विद्याधर नारगोलकर, ‘महाराष्ट्र मंदिर महासंघ’ के ह.भ.प. दत्तात्रय चोरघे महाराज, विश्व हिन्दू परिषद के श्री. दादा वेदक, ‘वीर सावरकर युवा विचार मंच’ के श्री. दयानंद बंडगर, हिन्दू जनजागृति समिति के श्री. पराग गोखले, अधिवक्ता दत्तात्रय देवळे, ‘श्रीमंत दगडूशेठ हलवाई गणपति मंदिर ट्रस्ट’ के अध्यक्ष सुनील रासने, पूजनीय पप्पाजी पुराणिक, गोरक्षक ऋषिकेश कामथे, अधिवक्ता विवेक भोसले, फुरसुंगी के हिन्दुत्वनिष्ठ श्री. नीलेश पवार, भाजपा की सीमा लिमयेसहित अनेक संगठनों के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता बडी संख्या में उपस्थित थे ।
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