मंदिर महासंघ का छत्तीसगढ राज्य में विस्तार

रायपुर (छत्तीसगढ) – महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक आदि राज्यों में मंदिरों का प्रभावी संगठन निर्माण करने के उपरांत अब छत्तीसगढ राज्य में भी मंदिर महासंघ की स्थापना की गई है । वैशाख शुक्ल तृतीया अर्थात अक्षय तृतीया के पवित्र मुहूर्त पर १९ अप्रैल २०२६ को मंदिर महासंघ की औपचारिक स्थापना की जाएगी ।
मंदिर महासंघ के राष्ट्रीय संयोजक श्री. सुनील घनवट की उपस्थिति में ८० से अधिक मंदिर ट्रस्टी, पुजारी एवं अर्चक (देवता की शास्त्रानुसार, आगम शास्त्र के अनुसार नियमित सेवा करनेवाले) की बैठक में यह निर्णय लिया गया । मंदिर महासंघ छत्तीसगढ के रायपुर जिला संयोजक पद पर श्री. मदनमोहन उपाध्याय तथा सह-संयोजक पद पर श्री. परवेश तिवारी की नियुक्ति की गई है । यह जानकारी रायपुर प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार परिषद में श्री. सुनील घनवट एवं श्री. मदनमोहन उपाध्याय ने दी । इस पत्रकार परिषद में सह-संयोजक श्री. परवेश तिवारी, हिन्दू जनजागृति समिति के श्री. कमल बिस्वाल, श्री. हेमंत कानस्कर, श्री. आशीष परिदा तथा नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर के पू. नीलकंठ त्रिपाठी महाराज उपस्थित थे ।
पूरे राज्य में मंदिरों को जोडने का अभियान
श्री. मदनमोहन उपाध्याय ने बताया कि छत्तीसगढ में मंदिरों के संगठन को दृढ करने के लिए स्थानीय स्तर पर कार्य आरंभ हो चुका है । इसके अंतर्गत पूरे राज्य में व्यापक संपर्क अभियान चलाकर मंदिर ट्रस्टी तथा पुजारियों से भेंट की जा रही है । इस अभियान को और गति देने के लिए जून माह में भव्य मंदिर न्यास परिषद आयोजित की जाएगी, जिसमें राज्य के सभी मंदिरों को एक साथ जोडकर उनके संरक्षण के लिए प्रयास किए जाएंगे । मंदिर महासंघ ने राज्य के सभी मंदिर प्रतिनिधियों से इस धर्मकार्य में सहभागी होने का आह्वान किया है ।
मठ एवं मंदिरों के संरक्षण के लिए महत्त्वपूर्ण कदम
पू. नीलकंठ त्रिपाठी महाराज ने कहा कि महाराष्ट्र में जिस प्रकार मंदिर महासंघ के माध्यम से मठ, मंदिर एवं परंपराओं के संरक्षण के लिए प्रभावी संगठन बना है, उसी प्रकार छत्तीसगढ में भी यह कार्य प्रारंभ हो गया है । मंदिर महासंघ छत्तीसगढ राज्य में मठों तथा मंदिरों की सुरक्षा तथा उन्हें सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार का केंद्र बनाने के लिए कार्य करेगा तथा संत समाज का इस पहल को पूर्ण समर्थन रहेगा ।
महासंघ के उद्देश्य एवं मांगें
१. मंदिर महासंघ के उद्देश्यों के अनुसार सरकारी नियंत्रण में आनेवाले मंदिरों को मुक्त कर उन्हें भक्तों के नियंत्रण में देना, मंदिरों की पवित्रता बनाए रखने के लिए वस्त्र संहिता लागू करना तथा मंदिर संस्कृति पर होनेवाले आघातों का संवैधानिक मार्ग से उत्तर देना – इन विषयों पर कार्य किया जाएगा ।
२. मंदिरों एवं मठों की भूमि पर हुए अतिक्रमण को हटाने के लिए कठोर ‘एंटी लैंड ग्रैबिंग’ कानून लागू करने, वक्फ बोर्ड द्वारा अवैध रूप से अधिग्रहित मंदिर भूमि को मुक्त करने तथा भक्तों द्वारा दान में दी गई भूमि पर लगनेवाले स्टांप शुल्क को पूरी तरह समाप्त करने की मांग भी की गई है ।
३. राज्य में मंदिर ट्रस्टियों एवं पुजारियों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यशालाएं आयोजित कर मंदिर प्रबंधन तथा धार्मिक विधियों को शास्त्रानुसार संपन्न करने के लिए मंदिर महासंघ छत्तीसगढ आगे कार्य करेगा ।
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