Trimbakeshwar Temple : शरद पवार गुट के नेता तथा मंदिर संस्थान के न्यासी सहित दो व्यक्ति बंदी बनाए गए !

  • त्र्यंबकेश्वर मंदिर में दर्शन का कालाबाजार !

  • अभियुक्तों को ७ दिन की पुलिस अभिरक्षा !

बंदी बनाए गए पुरुषोत्तम कडलग

नासिक – त्र्यंबकेश्वर स्थित ज्योतिर्लिंग मंदिर संस्थान में श्रद्धालुओं की आर्थिक लूट के प्रकरण में शरद पवार गुट के प्रदेश युवा कार्याध्यक्ष एवं मंदिर संस्थान के न्यासी पुरुषोत्तम कडलग सहित गोटीराम मनाजी पेहरे तथा अभिषेक कडलग (पुरुषोत्तम कडलग का भतीजा) को पुलिस ने बंदी बनाया है । संबंधितों के विरुद्ध अभियोग भी पंजीकृत किया गया है । (जब तक मंदिरों का व्यवस्थापन साधना करने वाले हिन्दुओं तथा धर्माभिमानी भक्तों के हाथों में नहीं आता, तब तक ऐसे कृत्य नहीं रुकेंगे । पुलिस को इस संपूर्ण श्रृंखला को नष्ट करने हेतु प्रयास करने चाहिए ! ईश्वर के दरबार में सबको समान न्याय प्राप्त हो, यही अपेक्षा है ! – संपादक) पुरुषोत्तम कडलग तथा गोटीराम पेहरे को न्यायालय ने ७ दिन की पुलिस अभिरक्षा सुनाई है । न्यायमूर्ति ए.जी. बेहरे के समक्ष यह सुनवाई संपन्न हुई । अभिषेक कडलग वर्तमान में पलायन कर गया है ।

त्र्यंबकेश्वर मंदिर में अतिविशिष्ट व्यक्तियों (VVIP) के प्रवेश हेतु कठोर नियम हैं । सुरक्षा रक्षक किसी को भी प्रत्यक्ष प्रवेश नहीं देते । उसके लिए न्यासियों की अनुमति अथवा दूरभाष आवश्यक होता है । पंजिका (रजिस्टर) में श्रद्धालु का नाम तथा किसके निर्देश पर प्रवेश दिया गया, इसका विस्तृत विवरण अंकित करना अनिवार्य होता है । श्रद्धालुओं द्वारा यह प्रश्न उपस्थित किया जा रहा है कि ‘ऐसी स्थिति में कोई बाह्य व्यक्ति श्रद्धालुओं को सीधे मंदिर के भीतर कैसे ले जा सकता है ?’

धनराशि महत्वपूर्ण नहीं, अपितु अन्य लोगों की सहभागिता की जांच आवश्यक ! – शासकीय अधिवक्ता

इस अवसर पर शासकीय अधिवक्ता ने तर्क प्रस्तुत करते हुए कहा कि, “यह देवस्थान १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक है । देवदर्शन हेतु न्यासी छद्म व्यक्तियों के नाम से पंजीकरण करके भोले-भाले श्रद्धालुओं के साथ छल करते हैं । यह गिरोह संबंधियों के नाम पर संचालित किया जाता है । क्या इसमें अन्य कुछ लोगों की भी संलिप्तता है ? इसकी जांच आवश्यक है । विश्व भर में त्र्यंबकेश्वर की एक विशिष्ट पहचान है तथा कुछ धार्मिक विधि विधान केवल यहीं संपन्न होते हैं । पूर्व से ही नासिक की छवि धूमिल हो रही है, उसमें इस घटना ने और अधिक वृद्धि की है ।’’

क्या है यह प्रकरण ?

त्र्यंबकेश्वर मंदिर में ११ अप्रैल को पंचवटी के श्रद्धालु अनंता मेहंदले तथा उनके मित्र दर्शन हेतु गए थे । १० मिनट में दर्शन का प्रलोभन देकर संदिग्धों ने उनसे ३ सहस्र रुपये नकद ऐंठ लिए । २०० रुपये का आधिकारिक प्रवेश-पत्र (पास) होने के उपरांत भी श्रद्धालुओं से ३ सहस्र से १२ सहस्र रुपयों तक की मांग की जाती है । देवस्थान न्यास की कोई भी आधिकारिक ‘सशुल्क (पेड) दर्शन’ सुविधा न होने पर भी श्रद्धालुओं के साथ ऐसा छल किया जाता है । इस प्रकरण में अनंता मेहंदले ने परिवाद (शिकायत) प्रविष्ट किया ।

पुलिस ने किया ‘स्टिंग ऑपरेशन’ (गुप्त अभियान) !

नासिक ग्रामीण पुलिस अधीक्षक बालासाहेब पाटिल ने कहा कि, त्र्यंबकेश्वर में अतिविशिष्ट दर्शन हेतु २०० रुपये शुल्क है । त्वरित दर्शन हेतु कुछ बिचौलिए कार्यरत थे । मंदिर समिति के अध्यक्ष एवं न्यायाधीश की ओर से कार्रवाई के आदेश प्राप्त हुए थे । श्रद्धालुओं को कैसे लूटा जाता है, इसका हमने ‘स्टिंग ऑपरेशन’ किया । पूर्व द्वार से न्यास के अधिकारों का दुरुपयोग कर धन लिए गए श्रद्धालुओं को प्रवेश दिया जा रहा था । ३ सहस्र रुपये लेकर १०० से १५० लोगों को छोडा जा रहा था । जिन्होंने न्यासी पद का दुरुपयोग किया है, उनकी जांच होगी । समस्त साक्ष्य न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए जाएंगे ।

प्रतिक्रिया

१. शरद पवार द्वारा नास्तिक विचारों के कार्यकर्ता निर्मित करने के कारण ही देवस्थानों में ऐसा भ्रष्टाचार व्याप्त है ! – श्री. तुषार भोसले, प्रमुख, भाजपा आध्यात्मिक आघाडी ।

२. न्यासी चयन की प्रक्रिया ही आर्थिक व्यवहारों के माध्यम से हुई है तथा कडलग सहित तीनों ने करोड़ों रुपये देकर यह पद प्राप्त किया है ! – ललिता शिंदे, पूर्व न्यासी, त्र्यंबकेश्वर देवस्थान ।

संपादकीय भूमिका

  • जब मंदिर शासन अथवा राजनीतिक नियुक्तियों वाली समितियों के नियंत्रण में जाते हैं, तब वहां भक्ति के स्थान पर व्यवसायीकरण का प्रवेश होता है । त्र्यंबकेश्वर की यह घटना मंदिर के सरकारीकरण के दुष्परिणामों को ही दर्शाती है !
  • मंदिर संस्थान का यह कृत्य केवल आर्थिक घोटाला नहीं, अपितु हिन्दुओं की अस्मिता पर आघात है । ‘अतिथि देवो भव ।’ मानने वाली इस धरा पर श्रद्धालुओं को लूटने के लिए न्यासियों द्वारा ही तंत्र संचालित किया जाए, इससे बडा दुर्भाग्य अन्य कोई नहीं है !
  • ऐसे अपराधियों को किसी भी धार्मिक न्यास (ट्रस्ट) में कार्य करने हेतु आजीवन प्रतिबंधित किया जाना चाहिए !