
मार्च २०२६ तक हिन्दी, अंग्रेजी, मराठी, गुजराती, कन्नड, तेलुगु, मलयालम, बांग्ला, ओडिया, असमिया, पंजाबी एवं नेपाली, इन १३ भाषाओं में सनातन के ३७० ग्रंथ-लघुग्रंथ प्रकाशित हुए हैं तथा उनकी १ करोड २ लाख प्रतियां प्रकाशित हुई हैं । सनातन के ग्रंथों की संख्या १ करोड तक पहुंचना सनातन के ग्रंथकार्य के लिए बडे गौरव की बात है !
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी द्वारा लगन से किए गए ज्ञानसंग्रह के कारण और ५,००० से अधिक ग्रंथ प्रकाशित हो सकेंगे, इतना लेखन संगणक में विषयों के आधार पर वर्गीकरण कर रखा गया है । इस ज्ञान का ग्रंथसंकलन अगले ३० वर्षाें तक अर्थात अगली १ – २ पीढियों तक चलेगा ।
– (पू.) संदीप आळशी
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के ओजस्वी विचार
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