
मुंबई – राज्य के विभिन्न मंदिरों में पीढियों से सेवा दे रहे पुजारियों को आर्थिक स्थिरता प्रदान करने के लिए तथा उन्हें संरक्षण देने के लिए सरकार बहुत शीघ्र एक सर्वसमावेशी नीति की घोषणा करेगी । इस नीति के अनुसार आय का पारदर्शी वितरण एवं पुजारियों का मानदेय सुनिश्चित करने पर बल दिया जाएगा । उन्हें सुनिश्चित वेतन तथा कानूनी संरक्षण दिया जानेवाला है, ऐसी जानकारी सहायता एवं पुनर्वास राज्यमंत्री आशिष जायसवाल ने दी । पारंपरिक पुजारियों, गुरुओं, तांबोळी (पान बेचने वाले) आदि घटकों को सामाजिक एवं आर्थिक संरक्षण देना सरकार का व्यापक उद्देश्य है, ऐसा बताया गया ।
१. इस संदर्भ में हुई बैठक में धर्मादाय आयुक्त एस्.एस्. कलोती, विधि एवं न्याय विभाग के अवर सचिव, उपसचिव, गुरु समाज के सलाहकार मुकुंद आगलावे, कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय शिंदे, देवस्थान समिति के प्रदेशाध्यक्ष धनंजय दरे, महासचिव रंगनाथ गुरु, समीर गुरु सहित विभिन्न प्रतिनिधि उपस्थित थे ।
२. सुरक्षा रक्षक, माथाडी श्रमिक एवं ‘स्वतंत्र ठेकेदार ’ की भांति पुजारियों को स्वतंत्र एवं सुसंगत श्रेणी प्रदान करने का प्रयास किया जाएगा ।
३. मंदिरों की संपत्ति, भूमि एवं आय व्यवस्थापन के लिए स्वतंत्र ‘एंडोमेंट ट्रस्ट’ (आर्थिक सहायता करनेवाला न्यास) का गठन करने का प्रस्ताव विचाराधीन है ।
४. मंदिरों के प्रकार, वर्तमान कार्यपद्धतियां एवं न्यायालयीन निर्णयों का अध्ययन कर अ, ब, क जैसी श्रेणियाें में उनका वर्गीकरण किया जाएगा ।
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