शिळफाटा (ठाणे) के हिन्दू सम्मेलन में मंत्री नितेश राणे का आवाहन

ठाणे, ४ अप्रैल (वार्ता.) – मुंब्रा परिसर को भगवामय करने हेतु कार्यकर्ताओं को संगठित होना चाहिए । आप अकेले नहीं हैं, कोई भी समस्या हो तो हमें सूचित करें । जब तक ‘मुंब्रादेवी’ के प्रत्येक घर पर भगवा ध्वज फहराता हुआ न दिखे, तब तक विश्राम नहीं करना है, ऐसा तीक्ष्ण प्रहार मत्स्यपालन एवं पत्तन विकास मंत्री तथा सिंधुदुर्ग जनपद के पालकमंत्री नितेश राणे ने मुंब्रा में किया । छत्रपति शिवाजी महाराज की पुण्यतिथि की पूर्वसंध्या पर शिळफाटा में आयोजित हिन्दू सम्मेलन में मंत्री नितेश राणे संबोधित कर रहे थे । सकल हिन्दू समाज की ओर से आयोजित इस सम्मेलन के मंच पर अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे ।
मंत्री नितेश राणे ने आगे कहा कि :
१. आज मुंब्रा के हिन्दुओं को ‘लव जिहाद’, ‘लैंड जिहाद’ तथा कभी धर्मांतरण के नाम पर भयभीत करने का षड्यंत्र चल रहा है । यदि किसी ने भी हिन्दुओं की ओर कुदृष्टि से देखा, तो मैं बिना सूचना दिए यहां आऊंगा एवं तांडव कर जाऊंगा, यह स्मरण रहे । जो मस्जिदों से मेरा भाषण सुन रहे हैं, वे जान लें कि यह आपके ‘अब्बू’ का पाकिस्तान नहीं, अपितु मेरे छत्रपति शिवाजी महाराज का महाराष्ट्र है । स्वराज्य, शौर्य तथा न्यायनिष्ठा ही आज की पीढी की प्रेरणा है । राज्य में धर्म-स्वातंत्र्य अधिनियम का कठोरता से अनुपालन होगा । हिन्दुओं को किसी भी प्रकार की धमकी अथवा दबाव के सम्मुख झुकना नहीं चाहिए ।
२. आज कोई भी उठकर हमें चुनौती देने की भाषा में बोलता है । वे आज कल के बालक हैं । जनप्रतिनिधि बनने के पश्चात कहते हैं, ‘इसको हम पराजित कर देंगे’ । उनकी मानसिकता को पहचानें तथा समझें । उन लोगों को बाल्यकाल से ही यह सिखाया जाता है । मदरसों में बैठे लोग यह शिक्षा देते हैं । वहां से आतंकवादी निर्मित किए जाते हैं एवं इसीलिए उनके मुख से ये विचार निकलते हैं । हम अब धर्म-स्वातंत्र्य अधिनियम तक पहुंच चुके हैं । अब अगला चरण मदरसों का है ।
मुंब्रा का नामकरण ‘मुंब्रादेवी’ करेंगे !सांगली के इस्लामपुर का नामकरण ‘ईश्वरपुर’ हुआ । मुंब्रा का भी ‘मुंब्रादेवी’ के रूप में नामकरण करके दिखाएंगे, ऐसा विश्वास राणे ने उपस्थित जनसमुदाय को दिलाया । इस कथन पर सभा स्थल पर उपस्थित कार्यकर्ताओं ने उद्घोष (नारे लगाकर) कर प्रत्युत्तर दिया । |
मृतक के नाम पर अभियोग चलाकर मंदिर प्रशासन के विरुद्ध अचलपुर के तहसीलदार के द्वारा दिया गया आदेश न्यायालय ने किया निरस्त ।
अधिक मास के निमित्त निरंतर धर्मप्रसार का कार्य करनेवाले सनातन के आश्रमों को अन्नदान देकरपुण्यसंचय के साथ ही आध्यात्मिक लाभ भी प्राप्त करें !
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छत्रपती के मंदिर के लिए प्राप्त होनेवाला अनुदान क्रूरकर्मा औरंगजेब की कब्र की देखभाल के लिए दिए जा रहे अनुदान की तुलना में अत्यल्प !
Bhojshala : ७०० वर्षों के उपरांत शुक्रवार को भोजशाला में नमाज नहीं, अपितु हिन्दुओं ने की अखंड पूजा ।
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