US Gold Reserve : यूरोपीय देश अमेरिका से वापस ले रहे हैं अपना सहस्रों टन सोना ।

  • ट्रम्प की तुगलकी मानसिकता का परिणाम

  • पालैंड, हंगरी, जर्मनी आदि देशों का समावेश ।

नई दिल्ली – ईरान युद्ध तथा अमेरिका के राष्ट्पति ट्रम्प की तुगलकी मानसिकता के कारण यूरोप के अनेक देशों में चिंता का वातावरण है । ट्रम्प की संभावित व्यापार नीति के कारण उत्पन्न होनेवाले तनाव की पृष्ठभूमि पर यूराेप के अनेक देश अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में ‘फेडरल रिजर्व’में रखे गए उनके सोने के भंडार वापस ले जाने की तैयारी में हैं ।

सोने के भंडारों का फ्रीज किए जाने की आशंका ।

पिछले अनेक दशकों से यूरोप के अनेक देशों ने सुरक्षा कारणों से अपने सोने के भंडार ‘फेडरल रिजर्व’ के कोष में रखे हैं । ट्रम्प की ‘अमेरिका फर्स्ट’ की नीति के कारण यूरोप एवं अमेरिका के संबंधों में तनाव आने की संभावना है । यूरोपीय देशों को यह आशंका है कि अमेरिका ने यदि आर्थिक प्रतिबंध लगाए अथवा व्यापार युद्ध छोडा, तो उससे यूरोपीय देशों के सोने के भंडार फ्रीज किए जा सकते हैं अथवा उनका उपयोग दबाव बनाने के लिए किया जा सकता है ।
पोलैंड, हंगरी तथा अन्य कुछ मध्य यूरोपीय देशों ने उनके सोने के भंडारों को वापस लेने की गति बढाई है । जर्मनी जैसी बडी अर्थव्यवस्था ने इससे पहले ही उसका आधा सोना न्यूयॉर्क से फ्रैंकफर्ट )जर्मनी) में स्थानांतरित किया है । अब शेष भंडारों के संदर्भ में ही गतिविधियां चल रही हैं ।

सोने के भंडार का महत्त्व ।

किसी भी देश की मुद्रा का मूल्य एवं आर्थिक स्थिरता उस देश के सोने के भंडार पर निर्भर होती है । युद्ध अथवा वैश्विक मंदी के समय में सोने को सबसे सुरक्षित साधन माना जाता है । रूस-युक्रेन युद्ध के उपरांत पाश्चात्त्य देशों ने रूस की विदेशी मुद्रा के भंडारों को फ्रीज किया था । उससे सबक सीखकर अब यूरोप के देश स्वयं की संपत्ति पर अपना संपूर्ण नियंत्रण स्थापित करना चाहते हैं ।

डॉलर के वैश्विक वर्चस्व को झटका लगने की संभावना ।

यदि बडे स्तर पर सोना अमेरिका से बाहर निकाला गया, तो उससे डॉलर के वर्चस्व को झटका लग सकता है । इसके साथ ही विश्व के बाजार में सोने के मूल्य में बडी अस्थिरता आने की संभावना विशेषज्ञों ने व्यक्त की है ।