५ अप्रैल को २ मंदिरों के बाहर आंदोलन करेंगे, धक्का – मुक्की करेंगे !

  • कनाडा में हिन्दुओं को खलिस्तान समर्थकों द्वारा धमकी

  • हम धमकियों के सामने झुकेंगे नहीं ! – ‘हिन्दू कैनेडियन फाउंडेशन’ का प्रत्युत्तर

ओटावा (कनाडा) – कनाडा के खलिस्तानी संगठनों ने ५ अप्रैल २०२६ के दिन ब्राम्पटन स्थित त्रिवेणी मंदिर तथा सरे स्थित श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर, इन २ विशाल हिन्दू मंदिरों के बाहर ‘खलिस्तान जिंदाबाद’ मोर्चा निकालने एवं प्रदर्शन करने की धमकी दी है । उन्होंने कहा है कि, ‘जब हिन्दू पूजा हेतु इन मंदिरों में आएंगे, तब उन्हें नारे सुनना पडेगा, धक्का – मुक्की हो सकती है ।’

इस पर ‘हिन्दू कैनेडियन फाउंडेशन’ ने तत्काल निवेदन प्रसारित करते हुए कहा कि, हमारे मंदिर पूजा के पवित्र स्थल हैं, वे प्रदर्शन के मैदान नहीं हैं । हम धमकियों के सम्मुख झुकेंगे नहीं । संपूर्ण कनाडा के पुलिस एवं सुरक्षा तंत्र को चेतावनी देते हुए फाउंडेशन ने कहा है कि, इन आतंकवादियों को रोकें, अन्यथा हिन्दू समुदाय का कनाडा की पुलिस तथा सरकार पर से विश्वास उठ जाएगा । खलिस्तान समर्थकों ने कनाडा में पूर्व में भी मंदिरों के बाहर वातावरण बिगाडने का प्रयास किया है ।

‘हिन्दू कैनेडियन फाउंडेशन’ का कहना है कि :

१. यह कोई शांतिपूर्ण विरोध नहीं अपितु वातावरण को जानबूझकर भडकाने का षड्यंत्र है । मंदिर को राजनीतिक मंच बनाने का प्रयास किया जा रहा है । इससे पूर्व ३ नवंबर २०२४ के दिन ब्राम्पटन स्थित हिन्दू सभा मंदिर पर खलिस्तान समर्थकों ने दिनदहाडे आक्रमण किया था । महिलाओं, बालकों तथा वृद्धों पर लाठियां चलाई थीं । यह उन्होंने केवल इसलिए किया क्योंकि वे महिलाएं आदि वहां शांतिपूर्वक पूजा कर रही थीं । यह केवल एक आक्रमण नहीं है, अपितु अनेक मंदिरों को निरंतर लक्ष्य किया जा रहा है । भक्तों को भयभीत किया जा रहा है ।

२. हमारे मंदिर पवित्र हैं । ये विरोध प्रदर्शन के स्थल नहीं हैं, तथा न ही राजनीतिक मंच हैं । यदि इस समय कोई अप्रिय घटना हुई, तो हम मौन नहीं रहेंगे ।

३. हिन्दू समुदाय कनाडा का अविभाज्य अंग है । हिन्दू शांतिप्रिय हैं । लोकतंत्र पर उनका विश्वास है; परंतु अब बहुत हो चुका है । सरकार हिन्दुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करे ।

४. कनाडा की संसद ने पूर्व में ही ‘सी-९’ विधेयक पास किया है । इसमें प्रार्थना स्थलों पर द्वेष, धमकी एवं बाधा उत्पन्न करने वालों के लिए कठोर दंड का प्रावधान है । ब्राम्पटन में पहले से ही मंदिरों के निकट ‘बबल ज़ोन’ निर्मित किए गए हैं, जहां प्रदर्शन करना निषिद्ध है । किसी को लक्ष्य करना कोई विरोध नहीं है, यह धमकी है । पूजा में बाधा डालना कोई अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं है, यह बलप्रयोग है ।

५. खलिस्तान समर्थक हिन्दू समुदाय को दबाने का प्रयास कर रहे हैं । यह केवल हिन्दुओं का विषय नहीं है, अपितु संपूर्ण कनाडा की सुरक्षा, विधि-व्यवस्था तथा सामाजिक सौहार्द के लिए संकट है । कनाडा स्थित खलिस्तानी आतंकवादी आंतरिक सुरक्षा के लिए बड़ा संकट बन गए हैं । जो लोग हिंसा भडकाते हैं, उनकी पहचान कर उत्तरदायित्व निर्धारित किया जाना चाहिए ।

संपादकीय भूमिका 

कनाडा की नई सरकार को इस पर कठोर कार्रवाई करते हुए खलिस्तानियों को कारागृह में डालना चाहिए तथा हिन्दुओं एवं उनके मंदिरों का रक्षण करना चाहिए । इसके लिए भारत सरकार को भी कनाडा सरकार पर दबाव बनाना चाहिए !