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पुणे, २९ मार्च (वार्ता) – दत्त परंपरा के अग्रणी संतश्रेष्ठ एवं शक्तिपातयोग के अध्वर्यु प.पू. गुळवणी महाराज जी के दीक्षा ग्रहण को ११५ वर्ष पूर्ण हुए हैं । इस उपलक्ष्य में ‘श्री परमहंस परिव्राजकाचार्य वासुदेवानंद सरस्वती टेंबे स्वामी महाराज एवं श्री परमहंस परिव्राजकाचार्य श्री लोकनाथतीर्थ स्वामी महाराज ट्रस्ट’ की ओर से ‘श्रीगुरु गौरव दीक्षा शताब्दी महोत्सव २०२० से २०२६’ कार्यक्रम आयोजित किया गया था ।
वर्तमान वर्ष २०२६ एरंडवणे, पुणे स्थित ‘श्रीवासुदेव निवास स्थापना का हीरक महोत्सव’, प.पू. गुळवणी महाराज जी के शिष्य ‘प.पू. ब्रह्मश्री श्री दत्तमहाराज कवीश्वर पुण्यतिथि रजत महोत्सव’, ‘प.पू. योगतपस्वी श्री नारायणकाका ढेकणे महाराज जयंती शताब्दी महोत्सव’, एवं इस दत्त परंपरा के वर्तमान उत्तराधिकारी पू. शरदभाऊ जोशी जी के ‘योगभक्ति का अमृत महोत्सव’ के रूप में मनाया जा रहा है ।


इस निमित्त २८ मार्च को १५ एवं २९ मार्च को ११, ऐसे कुल २६ संतों का सम्मान किया गया । इस अवसर पर सनातन संस्था के संस्थापक सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत बाळाजी आठवले जी के धार्मिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक क्षेत्रों में योगदान तथा सेवाकार्य के लिए उनका सम्मान किया गया ।
A moment of pride! ✨
Sachchidananda Parabrahman (Dr) Athavale honoured at the ‘Shri Guru Gaurav Diksha Centenary Festival 2020–2026’ in Pune!
The award recognises His immense contributions to religious, cultural & social causes. 🙏
Representing @SanatanSanstha Sadguru Swati… pic.twitter.com/uPmNmBrAfH
— Sanatan Prabhat (@SanatanPrabhat) March 29, 2026
उनके प्रतिनिधि के रूप में सनातन संस्था की सद्गुरु स्वाती खाड्ये जी ने यह सम्मान स्वीकार किया । उन्हें शाल, श्रीफल, मोती की माला एवं सम्मान-चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया गया । समाज को सन्मार्ग दिखाने का महान कार्य भारतवर्ष के एवं विशेषतः संतभूमि के रूप में विख्यात महाराष्ट्र के अनेक संतों एवं सत्पुरुषों ने किया है । ऐसी परंपरा के सत्पुरुषों का आशीर्वाद प्राप्त हो, इस उद्देश्य से संतों के इस समागम का आयोजन किया गया था ।

इस समय पू. शरदभाऊ जोशी जी का सनातन संस्था की ओर से सद्गुरु स्वाती खाड्ये जी ने शाल, श्रीफल एवं भेंटवस्तु देकर सम्मान किया । माननीय अतिथियों के आगमन पर फूलों की वर्षा कर उनका स्वागत किया गया । तत्पश्चात श्रीगुरुओं का पादुका पूजन, वेदमंत्रपाठ, भजन एवं ‘दिगंबरा दिगंबरा श्रीपाद वल्लभ दिगंबरा’ के जयघोष से कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ । उपस्थित संतों ने अपने आशीर्वचनों के माध्यम से विचार व्यक्त किए । अंत में श्री शिरीशकुमार उपाध्ये एवं श्री अरुणकुमार उपाध्ये बंधुओं द्वारा वायलिन पर बजाई गई प.प. श्रीटेंबे स्वामी महाराज विरचित ‘श्रीदत्त त्रिपदी’ से कार्यक्रम का समापन हुआ । एरंडवणे स्थित ‘श्रीवामन निवास’ में यह कार्यक्रम संपन्न हुआ ।

“गुरु की कृपा का पात्र बनने हेतु प्रत्येक व्यक्ति को कम से कम २ घंटे साधना करना आवश्यक है !” — प.पू. सुगंधेश्वरी प्रभु बा, काशी शिवपुरी आश्रम, उदयपुर खेडा
मेरे पुत्र को ब्लड कैंसर था l प.पू. गुळवनी महाराज की कृपा से वह ठीक हो गया; मात्र गुरु की कृपा का लाभ होने के लिए हर एक को कम से कम दो घंटा साधना करना आवश्यक है l
“गुरु के शब्दों का मान रखना तथा आज्ञापालन महत्त्वपूर्ण है !” — पू. अण्णामहाराज इंदौर, मध्य प्रदेश

प.पू.नारायण काका ढेकने महाराज ने द्विसहस्त्रीघृत ग्रंथ का हिंदी में भाषांतर करने के लिए कहा l यह ग्रंथ गुरु की कृपा से एक का भाषांतर किया l इंदौर के हिंदी विभाग के एक व्यक्ति आ गये, उन्होंने जांच कर सुधार किया तथा ग्रंथ पूर्ण हो गया l गुरुं का संकल्प कार्यरत रहता है उनके शब्दों का मान रखना एवं आज्ञा पालन करना महत्वपूर्ण रहता है l समाज में समानता, सात्विकता एवं सामंजस्य लाने का कार्य संत करते हैं l
“धर्मकर्तव्य की क्षुधा (ईक्षा) प्रत्येक व्यक्ति को होनी चाहिए !” – अजितदादा तुकदेव, अध्यक्ष, वेद वासुदेव प्रतिष्ठान

यह देश आत्मग्लानि से ग्रस्त है । ‘क्या हमारी यात्रा आत्मचिंतन एवं आत्मगौरव की ओर हो रही है ?’, इसका चिंतन प्रत्येक व्यक्ति को करना चाहिए । अनेक मंदिर दयनीय स्थिति में हैं । स्वामी विवेकानंद जी ने कहा था, ‘मुझे १०० उत्साही युवक दें, मैं भारत का कायाकल्प कर दूंगा’ । विवेकानंद जी को अपेक्षित उन १०० युवकों में से एक बनकर हमें राष्ट्रहित की आधारशिला रखनी चाहिए । समर्थ साधकों का निर्माण होना चाहिए । धर्मकर्तव्य की क्षुधा प्रत्येक व्यक्ति को जागृत करनी चाहिए l
श्री दत्त परंपरा !परमपूज्य योगीराज सद्गुरु श्री गुळवणी महाराज जी ने १९६५ में ‘श्रीवासुदेव निवास’ की स्थापना एरंडवणे, पुणे में की थी । यह स्थान शक्तिपात योगविद्या का आद्यपीठ एवं नित्य प्रकाशित दीपस्तंभ के रूप में विश्वविख्यात है । भगवान श्री दत्तात्रेय के प्रसादरूप में प्राप्त ‘श्रीप्रसाद पादुका’ एवं श्रीगुरु महाराज की कुलदेवी श्री तुळजाभवानी ‘श्रीवासुदेव निवास’ में प्रतिष्ठित हैं । प.प. श्रीवासुदेवानंद सरस्वती उपाख्य टेंबे स्वामी महाराज जी के वेदतुल्य समग्र वांग्मय को सर्वप्रथम मुद्रित कर प्रकाशित करने का कार्य प.पू. श्रीगुळवणी महाराज एवं प.पू. ब्रह्मश्री श्रीदत्त महाराज कवीश्वर जी ने १९५४ में किया था । तत्पश्चात योगतपस्वी प.पू. श्रीनारायणकाका ढेकणे महाराज एवं वर्तमान प्रधान न्यासी श्री शरदभाऊ जोशी जी ने ज्ञानयज्ञ की यह परंपरा अनवरत जारी रखी है । |

सम्मान प्राप्त पूजनीय संत गण एवं अतिथि !
२८ मार्च के दिन उपस्थित संत गण
१. प.प. श्री सुरेशानंद तीर्थ स्वामी महाराज नारायण कुटी आश्रम देवास, मध्य प्रदेश,
२. प.प. श्री धनुर्धरतीर्थ स्वामी महाराज शिवोम महायोग आश्रम छपरी, कवर्धा, छत्तीसगड
३. श्री अविनाश खेडेकर, श्री गुरु मंदिर श्री नृसिंह सरस्वती स्वामी महाराज संस्थान श्री क्षेत्र कारंजा
४. श्री दीपक साघले श्री क्षेत्र मानगांव
५. प.पू. श्री बाबा महाराज तरानेकर अखिल भारतीय त्रिपदी परिवार इंदौर
६. श्री नितिनजी देशपांडे, श्री गरुड़ेश्वर दत्त संस्थान,गरुड़ेश्वर गुजरात
७.प.पू. सुगंधेश्वरी प्रभु बा, काशी शिवपुरी आश्रम, उदयपुर, राजस्थान
८. श्री योगेश भाई व्यास, श्री अवधूत निवास ट्रस्ट, नारेश्वर
९. श्री राजेश भाई देसाई, श्री योगानंद सरस्वती संस्थान,मुंज खुर्द
१०. प.पू. श्री अन्ना महाराज, दत्त माउली सद्गुरु अन्ना महाराज संस्थान, इंदौर मध्य प्रदेश
११. प. श्री विजय काका पोफली, श्री वासुदेव आश्रम अभ्यासिका, वाशिम
१२. सद्गुरु स्वाती खाड़ये सनातन संस्था
१३. श्री अजित दादा तुकदेव, वेद वासुदेव प्रतिष्ठान, पुणे
१४. प.पू. श्री प्रकाश प्रभुने महाराज, महायोग ट्रस्ट गंगापुर रोड, नासिक
१५. प.पू. मोरेश्वर चरहोलिकर जोशी महाराज कर्वे नगर, पुणे
२९ मार्च के दिन संमाननीय गण
१६. प.पू. योगी निरंजन नाथ, प्रमुख विश्वास्त संत ज्ञानेश्वर महाराज संस्थान कमिटी आलंदी
१७. ह.भ.प. श्री जालींधर महाराज मोरे, संतश्रेष्ठ श्री तुकाराम महाराज संस्थान, देहू
१८. प.पू. श्री मंदार महाराज देव, श्री मोरया गोसावी संस्थान, चिंचवड़, पुणे
१९. प.पू. श्री बालासाहेब स्वामी, श्री रामदास स्वामी संस्थान, सज्जनगढ़, सतारा
२०. श्री केशव विद्वान्स, श्री मोरया गोस्वामी देवस्थान, चिंचवड़, पुणे
२१. श्री सुनील रासने, श्रीमंत दगडूशेठ हलवाई गणपती ट्रस्ट, पुणे
२२. श्री हेमंतजी करंदीकर, ओम सद्गुरु प्रतिष्ठान, बोरीवली, मुंबई
२३. श्री रमेश भागवत, श्री देव देवेश्वर संस्थान, सारस बाग, पुणे
२४. अधिवक्ता मा.शिवराज कदम, श्रीमती लक्ष्मीबाई दगडूशेठ हलवाई दत्त मंदिर, पुणे
२५. वेद मूर्ति श्री. सुहास जोशी, श्रीविद्या शक्तिपात महायोगाश्रम, कोल्हापुर
२६. प.पू. डॉ.श्रीनिवास आबा जामदार, श्री गुरु माऊली आश्रम, अकलुज, सोलापुर
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