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सातारा, २२ मार्च (संवाददाता) – महाराष्ट्र संतों एवं मंदिरों की पावन भूमि है । जिनकी मंदिरों की भूमि पर कुदृष्टि है अथवा जिन्होंने वहां अवैध अतिक्रमण करने का प्रयास किया है, उन्हें यह सरकार पाठ पढाए बिना नहीं रहेगी । जिसप्रकार तत्कालीन मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने साहस दिखाकर प्रतापगढ की तलहटी पर स्थित अफजलखान की कब्र के इर्द-गिर्द किया गया अतिक्रमण ध्वस्त किया, उसी साहस के साथ यह सरकार भी गढ-किलों एवं मंदिरों की भूमि पर किए गए अतिक्रमण भी बुलडोजल चलाकर नष्ट करेगी, ऐसा स्पष्टतापूर्ण प्रतिपादन राज्य के रोजगार आश्वस्तता एवं फलोत्पादन मंत्री श्री. भरतशेठ गोगावले ने यहां किया ।

महाराष्ट्र मंदिर महासंघ की ओर से २२ मार्च को सातारा की ऐतिहासिक भूमि में स्वराज सांस्कृतिक भवन में आयोजित ‘चतुर्थ महाराष्ट्र मंदिर न्यास परिषद’ में वे ऐसा बोल रहे थे । इस अवसर पर उन्होंने उपमुख्यमंत्री श्री. एकनाथ शिंदे के प्रतिनिधि के रूप में तथा एक हिन्दुत्वनिष्ठ के रूप में अपने विचार रखे ।
🚩 Big Move for Maharashtra’s Heritage & Temples🚩
At the 4th Maharashtra Temple Trust Conference in Satara, Minister Bharatseth Gogawale issued a bold warning: Encroachments on our historic forts will be cleared with bulldozers. 🚜🔥
Key Highlights:
🔹 Strict Action: The… pic.twitter.com/n9W6GilAaY— Sanatan Prabhat (@SanatanPrabhat) March 22, 2026
देवस्थान की भूमियों का उपयोग केवल ‘देवता के कार्य के लिए ही !![]() छत्रपति शिवाजी महाराज ने जिस भूमि में अफजलखान की आंतरियां बाहर निकाली, उसी पावन सातारा में आयोजित इस परिषद में १ सहस्र १०० से अधिक मंदिरों के प्रतिनिधि एकत्रित हुए हैं । मंदिरों की रक्षा करना हमारे लिए राजनीति नहीं है, अपितु वह हमारा धर्म एवं श्रद्धा का विषय है । वंदनीय हिन्दूहृदयसम्राट बालासाहब ठाकरे ने हमें ‘देवता एवं देश’ के लिए कभी भी समझौता न करने की सीख दी थी । ‘देवस्थान की भूमियों का वापर संबंधित देवता के कार्य के लिए ही हो’, यह निर्देश राजस्व विभाग को दिया गया है । वर्ष २०२६-२७ के अर्थसंकल्प में धार्मिक पर्यटन के लिए बडा प्रावधान किया गया है । इसमें राज्य के ५ ज्योतिर्लिंगों के विकास के लिए स्वतंत्र कोष एवं समन्वयक की नियुक्ति की गई है, साथ ही ५० चुनिंदा धार्मिक स्थलों के आधुनिकीकरण के लिए ‘प्रादेशिक पर्यटन विकास योजना’ से धन पारित किया गया है, ऐसा श्री. गोगावले ने बताया । इस अवसर पर उन्होंने राज्य के मंदिरों के विकास के लिए सरकार की ओर से लिए गए महत्त्वपूर्ण निर्णयों की जानकारी दी । |

मुख्यमंत्री एवं उपमुख्यमंत्री के साथ ‘विशेष बैठक’ सुनिश्चित कर मंदिरों की लंबित समस्याओं का समाधन निकालेंगे !मुंबई में अर्थसंकल्पीय अधिवेशन चल रहा है । मुझे जब भी अवसर मिलेगा, तब मैं मुख्यमंत्री एवं उपमुख्यमंत्री को इस परिषद की जानकारी दूंगा । मंदिर महासंघ किसी व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए सभा नहीं लेता, अपितु केवल हिन्दुत्व एवं मंदिरों के लिए ही यह परिषद है । मंदिरों के व्यवस्थापन में हस्तक्षेप करने का हमारा उद्देश्य नहीं है । मंदिरों की परंपरा में बाह्य हस्तक्षेप नहीं होगा, इसकी मैं आश्वस्तता देता हूं । मंदिर महासंघ हिन्दुत्व की रक्षा हेतु समाज में जागृति लाने का काम कर रहा है, जो प्रशंसनीय है । मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस एवं उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के साथ मंदिर महासंघ के प्रतिनिधियों की ‘विशेष बैठक’ आयोजित कर कानून की चौखट में रहकर मंदिरों की सभी लंबित समस्यों का समाधान किया जाएगा, ऐसा भी श्री. गोगावले ने बताया । |
🛕सातारा येथे चतुर्थ महाराष्ट्र मंदिर न्यास परिषदेस दीपप्रज्वलनाने प्रारंभ!
दीपप्रज्वलन करतांना (डावीकडून) :
श्री. गिरीष शहा,
श्री. सुनील घनवट (@SG_HJS ),
महंत मावजीनाथ महाराज,
योगी निरंजननाथ,
राज्यमंत्री भरतशेठ गोगावले
सद्गुरु स्वाती खाडये,
अधिवक्ता पू. सुरेश कुलकर्णी… pic.twitter.com/p6xsXLpY0M— HinduJagrutiOrg (@HinduJagrutiOrg) March 22, 2026
मंदिर सुरक्षित रहे, तभी देवता, देश एवं धर्म सुरक्षित रहेंगे ! – योगी निरंजन नाथ, मुख्य न्यासी, आळंदी देवस्थान
जिस भूमि में ज्ञानेश्वर महाराज ने आयु के १६ वें वर्ष में ज्ञानेश्वरी की रचना की तथा छत्रपति शिवाजी महाराज ने अपनी आयु के १६ वें वर्ष में ‘हिन्दवी स्वराज’ की शपथ ली, उस पराक्रमी धरोहर के हम प्रतिनिधि हैं । वर्तमान समय में मंदिरों को बचाने के लिए सभी न्यासियों का एकत्रित होना ही ‘महाराष्ट्र मंदिर न्यास परिषद’ की सच्ची फलोत्पत्ति है । मंदिर सुरक्षित रहेंगे, तभी हमारे देवता, देश एवं धर्म सुरक्षित रहेंगे ।
आज भले ही जगन्नाथपुरी का मेला सबसे बडा माना जाता हो, तब भी व्यवस्थानप, नियोजन एवं भक्तिभाव के परिप्रेक्ष्य में महाराष्ट्र की ‘आषाढी बारी’ विश्व की सर्वश्रेष्ठ बारी है । भारत ने विश्व को व्यवस्थापन की देन दी है, उसके कारण विश्व को हमें व्यवस्थापन सिखाने की आवश्यकता नहीं है । मंदिरों की संपत्ति पर कुदृष्टि रखनेवालों का षड्यंत्र तोड डालिए । दुर्भाग्यवश हमारे ही कुछ लोगों ने मंदिरें की भूमियां हडप ली हैं । मंदिर की एक इंच भी भूमि हडपी नहीं जानी चाहिए, इसके लिए प्रत्येक न्यासी को सतर्क रहना चाहिए । कुछ लोग लोक ‘मंदिरों के स्थान पर विद्यालय-चिकित्सालय बनाईए’, ऐसा उपदेश देते हैं; परंतु कोरोना महामारी जैसी भीषण संकट में इन्हीं मंदिरों ने करोडों लोगों को अन्नदान कर उन्हें बचाया, इसे भूलाया नहीं जा सकता । जयसिंगपुर के श्री स्वामी समर्थ केंद्र तथा पुणे के दगडूशेठ हलवाई गणपति मंदिर की सेवा का आदर्श सभी के सामने है ।

इंद्रायणी की महाआरती एवं भक्ति का जागरण !योगी निरंजन नाथ ने बताया कि आळंदी में आरंभ की गई ‘इंद्रायणी महाआरती’में १० सहस्र से अधिक श्रद्धालु उपस्थित रह रहे हैं । अगले १० वर्षाें में बारी की भीड दोगुनी होगी, अतः देवताओं के उपचार शास्त्रोक्त पद्धति से किए गए, तभी ईश्वर सभी प्रकार के संकटों में हमारी सहायता करेंगे । आज हम देवताओं के प्रतिनिधियों के रूप में इस परिषद में एकत्रित हुए हैं तथा यही हिन्दू संगठनों की बडी सफलता है । |
मंदिर केवल उपासना के केंद्र नहीं हैं, अपितु वे भारतीय अर्थव्यवस एवं संस्कृति के प्राण हैं ! – संदीप सिंह, प्रखर हिन्दुत्वनिष्ठ अध्येता
विश्व के अनेक बडे शहर वहां चलाए जानेवाले कारखानों के कारण विख्यात हुए तथा कारखानों के बंद होते ही वे नष्ट हुए; परंतु अयोध्या, काशी, उज्जैन एवं तिरुपति जैसे शहर केवल मंदिरों के कारण ही विगत सहस्रों वर्षाें से जीवित हैं । मंदिर केवल प्रार्थना के स्थान नहीं हैं, अपितु वे हमारी अर्थव्यवस्था के आधारस्तंभ हैं । ‘समाज में मंदिर की अर्थव्यवस्था का महत्त्व’ विषय पर श्री. संदीप सिंह ने अपने विचार रखे ।
श्री. संदीप सिंह ने आगे कहा कि यदि मंदिर ही सुरक्षित नहीं रहे, तो हमारी संस्कृति नष्ट होगी । तमिलनाडू के मंदिर समाजमानस से टूट जाने से ही संकट में पडे हैं । यह चूक हमें महाराष्ट्र में नहीं होने देनी है । प्रत्येक हिन्दू को कार्यकर्ता बनकर धर्म की रक्षा करनी चाहिए ।
प्रत्येक हिन्दू प्रतिदिन मंदिर जाए !श्री. संदीप सिंह ने आगे कहा कि जन्मदिवस मनाते समय पाश्चात्त्य पद्धति से केक काटने के स्थान पर अपना जन्मदिवस मंदिर में मनाकर आप धर्म से नाता जोडिए । मंदिरों को अपने परिसर में आयुर्वेदिक वैद्यों को स्थान देना चाहिए, जिससे समाज की सेवा हो पेएगी । मैं मेरे ‘टी-शर्ट पर ‘मंदिर जाईए’, ऐसा लिखकर घूमता हूं । यह देखकर मेरे मित्र बढे हैं । हम हिन्दू हैं तथा हम मंदिर जाते हैं, इस पर हमें गर्व प्रतीत होना चाहिए । |

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