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(‘बारव’ अर्थात सीढियोंवाला कुआं । वह अधिकांश चतुष्कोनीय अथवा अष्टकोनीय आकार का होता है ।)

मंचर (जिला पुणे) – यहां ऐतिहासिक पांडवकालीन बारव है । इस स्थान पर प्रत्यक्षरूप से शिलालेख, गोमुख एवं पत्थर में की गई कलाकारी है तथा यह वास्तु हिन्दू पद्धति के होने के स्पष्ट प्रमाण हैं । तब भी इस स्थान पर अवैध दरगाह बनाकर उसे ‘वक्फ’ के रूप में घोषित किया गया है । पुणे के जिलाधिकारी, साथ ही पुणे ग्रामीण पुलिस से इसकी बार-बार शिकायत कर भी कोई कार्रवाई नहीं की गई, उल्टे निर्माणकार्य का आकार बढाया गया । प्रांताधिकारी को जो स्थान पिछले ६ महिने पूर्व खाली दिखाई दिया, अब उस पर कब्रस्तानसदृश्य निर्माणकार्य किया गया है । केवल इतना ही नहीं, अपितु इस स्थान पर वर्ष २०२१ में मृतक हुए व्यक्ति की कब्र दिखाई गई है । ६ महिने पूर्व जिस कब्रस्तान का कोई अस्तित्व नहीं था, उस कब्रस्तान में वर्ष २०२१ में मृत्यु हो चुके व्यक्ति की कब्र कैसे हो सकती है ?

प्रशासन द्वारा इस गंभीर घटना की अनदेखी करने के विरोध में भाजपा की सांसद प्रा. डॉ. (श्रीमती) मेधा कुलकर्णी ने स्थानीय हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों के साथ घटनास्थल जाकर आंदोलन किया ।

इस आंदोलन मबें सर्वश्री प्रमोद बाणखेले, संदीप बाणखेले, गणेश बाणखेले, अक्षय चिखले, महेश पिंगळे, चैतन्य महाजनसहित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, विश्व हिन्दू परिषद एवं बजरंग दल के अनेक कार्यकर्ता बडी संख्या में उपस्थित थे ।

इस प्रकरण में उपमंडल पुलिस अधिकारी ने पुणे ग्रामीण पुलिस अधीक्षक एवं प्रांताधिकारी से बातचीत कर ८ दिन में कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है । सांसद (श्रीमती) मेधा कुलकर्णी ने यदि यह कार्रवाई नहीं हुई, तो इस आंदोलन को और कडा करने की चेतावनी दी है ।
पुलिस का दमनतंत्र तथा हिन्दुओं की आस्था की अवमानना !
आंदोलन के समय एक क्षोभजनक घटना हुई । सांसद (श्रीमती) कुलकर्णी ने इस स्थान पर हिन्दू देवता का चित्र लगाने का प्रयास किया, तब पुलिस ने उनके हाथ से देवता का चित्र छीन लिया । उन्होंने पुलिस से यह प्रश्न करते हुए कहा, ‘‘उन्हें (मुसलमानों को) यहां दर्गाह बनाने से तथा हरा रंग लगाने से कोई नहीं रोकता, तो मुझे ‘ॐ’ लिखने के तथा देवता का चित्र लगाने से क्यों रोका जा रहा है ?
हिन्दू सहिष्णु हैं; परंतु उनकी सहिष्णुता का अंत न देखिए !
सांसद (श्रीमती) कुलकर्णी ने इस समय प्रशासन को बताया कि हिन्दू कभी भी कानून-व्यवस्था नहीं बिगाडते अथवा किसी की भूमि नहीं हडपते; परंतु धर्मांधों द्वारा श्री गणेश विसर्जन शोभायात्रा पर किया जानेवाला पथराव तथा हिन्दुओं की धरोहरों पर होनेवाले अतिक्रमण अब सहन नहीं किए जाएंगे । हिन्दू आक्रामक नहीं होता; परंतु उसकी सहिष्णुता का कोई अंत न देखें ।’’
संपादकीय भूमिका
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