मानवाधिकार आयोग ने मांगा स्पष्टीकरण
(एम्स अर्थात ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, अर्थात अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान)
भोपाल (मध्य प्रदेश) – यहां के ‘एम्स’ में सहायक प्राध्यापक के पद पर कार्यरत एक हिन्दू महिला डॉक्टर ने आत्महत्या कर ली है । ‘एम्स’ के एक विभाग प्रमुख डॉ. परवेज द्वारा निरंतर किए जाने वाले मानसिक उत्पीडन एवं अपमान से तंग आकर डॉ. सृष्टि ने मूर्छित करने की औषधि अत्यधिक मात्रा में सेवन कर आत्महत्या की ऐसा आरोप है । इस गंभीर प्रकरण का संज्ञान लेते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भोपाल पुलिस, ‘एम्स’ प्रशासन एवं स्वास्थ्य मंत्रालय को ज्ञापन भेजकर विस्तृत प्रतिवेदन मांगा है ।
१. आत्महत्या से पहले डॉ. सृष्टि ने डॉ. परवेज के आचरण के विरुद्ध अस्पताल प्रशासन में ३ बार आरोप किए थे ; किन्तु प्रबंधन ने आरोपी डॉक्टर पर कार्रवाई करने के स्थान पर प्रकरण को दबाने का प्रयास किया, ऐसा आरोप है । (इसके कारण अब डॉ. परवेज के साथ में ही चुप्पी साधने वाले ‘एम्स’ प्रबंधन पर भी कठोर से कठोर कार्रवाई होनी चाहिए! – संपादक)
२. डॉ. परवेज के उत्पीडन एवं प्रशासन की उपेक्षा से महिला डॉक्टर मानसिक रूप से टूट गईं एवं उन्होंने यह कठोर कदम उठा लिया ।
३. आयोग को प्राप्त आरोप के अनुसार डॉ. परवेज डॉ. सृष्टि का निरंतर अपमान करते थे । इस प्रकरण की गंभीरता पर ध्यान दिलाते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के प्रियंक कानूनगो ने कहा कि एक डॉक्टर का इस प्रकार आत्महत्या करना व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न निर्माण करने वाली घटना है । आरोप होने पर भी आरोपी पर प्रतिबंधात्मक कार्रवाई क्यों नहीं हुई, यह यक्ष प्रश्न आयोग ने भोपाल पुलिस एवं ‘एम्स’ प्रशासन से पूछा है ।
४. इस प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषी पर कठोर कार्रवाई की जाए, ऐसी मांग की गई है ।

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