Sabarimala Gold Row : सबरीमाला मंदिर में सोना चोरी की घटना में मुख्य पुजारी की जमानत को स्वीकृति।

  • पुजारी के विरुद्ध कोई ठोस प्रमाण नहीं होने से अदालत की स्पष्ट टिप्पणी ।

  • केरल की वामपंथी सरकार पर पुजारियों को फंसाने का प्रयास करने का आरोप।

मुख्य पुजारी (तंत्री) कंदारारू राजीवरू

तिरुवनंतपुरम (केरल) — सबरीमाला मंदिर में सोना चोरी की घटना में मुख्य पुजारी (तंत्री) कंदारारू राजीवरू को ४१ दिनों की न्यायिक हिरासत (मजिस्ट्रेट की आज्ञा से उस व्यक्ति को कारगर में रखा जाए) के बाद जमानत दे दी गई । कोल्लम की सतर्कता से अदालत ने स्पष्ट किया कि इस प्रकरण में तंत्री का कोई भी प्रत्यक्ष या परोक्ष संबंध सिद्ध करने वाला प्रमाण उपलब्ध नहीं है । विशेष जांच दल द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों को न्यायालय ने निरस्त कर दिया है, फिर भी दल उच्च न्यायालय जाने की तैयारी में बताया गया है ।

तंत्री को लक्ष्य बनाने का आरोप 

तंत्री को बंदी बनाने का प्रारंभ से ही विरोध हुआ । विपक्षी दलों ने राज्य सरकार पर राजनीतिक उद्देश्य से कार्यवाही करने का आरोप लगाया । कहा गया कि पूर्व व वर्तमान देवस्वम मंत्रियों तथा त्रावणकोर देवस्वम मंडल के अध्यक्ष को बचाने के लिए तंत्री को निशाना बनाया गया ।

प्रतिशोध की कार्यवाही करने की बात सामने आई 

तंत्री ने कहा कि मंदिर की परंपराओं तथा धार्मिक विधियों की रक्षा के लिए उन्होंने मासिक धर्म आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश के प्रश्न पर कठोर दृष्टिकोण अपनाया था । उन्होंने राजनीतिक हस्तक्षेप होने को मना किया एवं परंपरा में हस्तक्षेप होने पर पूजा न करने की चेतावनी भी दी थी । मंदिर को प्रतिदिन खोलने के प्रस्ताव का भी उन्होंने विरोध किया था । इससे प्रभावशाली वर्ग असंतुष्ट हुए तथा उनकी छवि धूमिल करने के लिए उन्हें आर्थिक अनियमितताओं में फंसाने का प्रयास किया गया । मुख्य आरोपी उन्नीकृष्णन पोट्टी से उनका संबंध जोडने की भी कोशिश हुई ।

न्यायालय ने आरोप को निरस्त किया 

विशेष जांच दल ने कहा था कि १८ जून २०१९ को मंदिर प्रवेश द्वार की मूर्तियों तथा आवरण पर सोने की परत की मरम्मत के लिए तंत्री ने कहा था, परन्तु न्यायालय ने रिकॉर्ड में ऐसा कोई उल्लेख न होने की बात स्पष्ट की । २० जुलाई २०१९ तथा १८ मई २०१९ के प्रस्तावों पर तंत्री के हस्ताक्षर नहीं पाए गए । १० जुलाई २०१९ के प्रस्ताव पर किया गया हस्ताक्षर केवल मंडल द्वारा मांगे गए अभिप्राय तक सीमित था । अदालत ने कहा कि नियमों के अनुसार तंत्री का उत्तरदायित्व पूजा तथा धार्मिक विधियों तक सीमित है, जबकि रखरखाव का दायित्व त्रावणकोर देवस्वम मंडल के अधिकारियों का है ।

राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप 

तंत्री के विरुद्ध साक्ष्य न होने के बाद भी मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के नेताओं ने उन पर सार्वजनिक रूप से आरोप लगाए । राज्य सचिव एम. वी. गोविंदन ने उन्हें “मुख्य चोर” तक कहा । दूसरी ओर यह प्रश्न भी उठाया गया कि “प्रवर्तन निदेशालय ने जांच क्यों नहीं की ?”

इस घटना में पूर्व विधायक ए. पद्मकुमार सहित तीन लोगों एवं मुख्य आरोपी उन्नीकृष्णन पोट्टी को बंदी बनाया है । बताया जाता है कि मार्च २०१९ में सोने के आभूषण पिघलाने का कार्य संबंधित देवस्वम अध्यक्ष की जानकारी तथा सहमति से हुआ था ,बाद में वही सोना अनुपलब्ध पाया गया । इससे राजनीतिक विवाद अधिक तीव्र हो गया तथा आरोप लगाया गया कि तंत्री को बंदी बनाना, मूल घटना से ध्यान हटाने का प्रयास थी ।

संपादकीय भूमिका 

पुजारियों को फंसाने वालों पर कार्यवाही के निर्देश दिए जाएं, जनता की ऐसी ही भावना है ।