Pakistan-Sindh Hindu Minority : पाकिस्तान के सिंध में हिन्दू अल्पसंख्यकों को षडयंत्र पूर्वक बनाया जा रहा है लक्ष्य !

अल्पसंख्यक हिन्दू

कराची (पाकिस्तान) – पाकिस्तान के सिंध प्रांत में देश की सर्वाधिक हिन्दू अल्पसंख्यक जनसंख्या रहती है । इस प्रांत में ईशनिंदा के आरोपों के चलते बार-बार सांप्रदायिक हिंसा भडकती रहती है । प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, ये आक्रमण एक निश्चित नियम के अंतर्गत किए जाते हैं । हिंसक घटनाओं का आरंभ किसी आरोप से होती है, फिर धार्मिक नेताओं द्वारा भीड इकट्ठा की जाती है, अशांति फैलाई जाती है तथा अंत में प्रभावित हिन्दू समुदाय को बलपूर्वक वहां से खदेडने की प्रक्रिया आरंभ हो जाती है ।

हिन्दू किसान की हत्या तथा उससे उजागर हुई सच्चाई

नेपाल की समाचार एजेंसी ‘खबरहब’ की रिपोर्ट के अनुसार, सिंध में कुछ दिन पूर्व ही एक हिन्दू किसान की हत्या ने पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों की स्थिति पर एक बार फिर प्रकाश डाला है । पीडित व्यक्ति कोल्ही समुदाय का किसान था । भूमि के उपयोग को लेकर उसका एक शक्तिशाली स्थानीय जमींदार से विवाद हुआ था । इसी विवाद के उपरांत पीडित हिन्दू किसान की दिनदहाडे गोली मारकर हत्या कर दी गई । इस घटना के पश्चात पूरे सिंध में विरोध प्रदर्शन आरंभ हो गए । हिन्दू समुदायों ने राजमार्गों को जाम किया एवं न्याय की मांग की ।

अपराधियों को संरक्षण एवं भेदभाव

रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि यह प्रकरण केवल एक हत्या तक सीमित नहीं है । यह अपराधियों को मिलने वाले संरक्षण, सामंती ताकतों एवं धार्मिक भेदभाव की गहराई से जमी हुई व्यवस्था को उजागर करता है । इस घटना ने बीते कई दशकों से पाकिस्तान में हिन्दू अल्पसंख्यकों की वास्तविक स्थिति को विश्व के सामने उजागर किया है । कई अल्पसंख्यकों, विशेष रूप से हिन्दुओं के लिए, पाकिस्तान तेजी से एक प्रतिकूल स्थान बनता जा रहा है । यहां झूठे आरोप, बलपूर्वक धर्मांतरण, अपहरण, आर्थिक दबाव एवं लक्षित हिंसा जैसी घटनाएं सामने आती रही हैं ।

हिंदू महिलाओं एवं लडकियों पर अत्याचार

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में भी इसी तरह की हिंसक घटनाएं सामने आई हैं, जहां हिन्दुओं की जनसंख्या अत्यंत अल्प है । लाहौर स्थित ‘सेंटर फॉर सोशल जस्टिस’ के अध्ययन का विचार बताते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष २०२१ से २०२४ के बीच कम से कम ४२१ अल्पसंख्यक महिलाओं एवं लडकियों का बलपूर्वक धर्मांतरण किया गया । इनमें से ७१ प्रतिशत लडकियां अवयस्क थीं तथा उनमें से अधिकांश हिन्दू एवं ईसाई समुदाय से थीं ।

शारीरिक हिंसा के अलावा, सुनियोजित उत्पीडन ने भी हिन्दू नागरिकों के अस्तित्व को गंभीर संकट में डालने में उतनी ही संकटकारी भूमिका निभाई है । प्रत्येक वर्ष अवयस्क हिन्दू लडकियों के अपहरण, उन्हें इस्लाम स्वीकार करने के लिए विवश करने एवं मुस्लिम पुरुषों से उनका विवाह कराने के प्रकरण सामने आते हैं । ऐसे प्रकरणों में जब पीडित परिवार कानूनी रास्ता अपनाने का प्रयास करते हैं, तो उन्हें जान से मारने की धमकियां, सुनवाई में देरी एवं न्यायालयों के प्रतिकूल निर्णय का सामना करना पडता है । अधिकांश न्यायिक निर्णय कथित धर्मांतरण करने वालों के पक्ष में ही जाते हैं ।

कानूनी कमी एवं सरकार की उदासीनता

सार्वजनिक विवाद एवं कानूनी प्रयासों के उपरांत भी, बलपूर्वक धर्मांतरण को अपराध घोषित करने वाला कोई प्रभावी राष्ट्रीय कानून अब तक नहीं बनाया गया है । हिन्दू परिवारों के पक्ष में कोई ठोस कानूनी संरक्षण उपलब्ध नहीं है । इस कानूनी शून्य से अपराधियों का मनोबल (हौसला) बढा है एवं हिन्दू अभिभावकों में भय का वातावरण बन गया है ।

रिपोर्ट के अंत में कहा गया है कि सरकारी समर्थन की कमी एवं कट्टरपंथी इस्लामी संगठनों के प्रति बढती सहनशीलता के कारण पाकिस्तान में हिन्दू अल्पसंख्यकों के लिए अब यह विषय मात्र समानता का नहीं रह गया है, अपितु एक ऐसी व्यवस्था में केवल जीवित रहने का बन गया है, जो बार-बार उनके साथ अन्याय करती है ।