Maharashtra MNC Elections : महाराष्ट्र में महानगरपालिका चुनाव में तत्त्वनिष्ठ राजनीति की धज्जियां उडीं !

मुंबई , १ जनवरी (वार्ता.) – महानगरपालिका के चुनाव में प्रत्याशी नहीं बनाया; इसलिए ‘पक्ष की ओर से धन लेकर प्रत्याशी पद दिया गया’ ऐसे आरोप लगाते हुए राज्य में इच्छुक प्रत्याशियों (उम्मीदवारों) ने यह कह कर उत्पात मचाया है । पक्षनिष्ठा को तिलांजलि देते हुए पक्षश्रेष्ठी को अपशब्द कहना, अपने ही पक्ष का कार्यालय फोडना, आत्मदाह का प्रयत्न करना, पक्षश्रेष्ठी को काले झण्डे दिखाना, प्रत्याशी आवेदन पत्र लेकर जानेवाली गाडियों का पीछा करना, ऐसे राजनीति एवं राजनीतिक दलों की प्रतिष्ठा को धूमिल करनेवाले असंख्य कृत्य राज्य में घटे । राज्य की इस स्वार्थी, बिकाऊ, तत्त्वशून्य एवं निम्नकोटी की राजनीति के विषय में सामाजिक माध्यमों से बडे स्तर पर आलोचना की जा रही है ।

१. पक्ष के लिए परिश्रम करनेवालों को प्रत्याशी पद न मिलना, तथा प्रत्याशी न बनाने पर पक्षनिष्ठा को त्याग देना, ऐसे कार्य हुए । छत्रपति संभाजीनगर में प्रत्याशी न बनाए जाने से भाजपा के कार्यकर्ताओं ने ‘मंत्री अतुल सावे एवं सांसद भागवत कराड ने पक्ष के निष्ठावानों को प्रत्याशी पद न देकर बाहर से आए हुए लोगों को प्रत्याशी बना दिया’, ऐसा आरोप लगाया । इतना ही नहीं, अपितु सावे एवं कराड की गाडियां रोककर उन्हें अभद्र भाषा में अपशब्द कहे । एक कार्यकर्ता ने आत्मदाह करने का प्रयत्न किया ।

२. नाशिक में प्रत्याशी का आवेदन पत्र न मिलने के कारण इच्छुक उम्मीदवारों ने भाजपा के नगर अध्यक्ष सुनील केदार एवं विधायक सीमा हीरे की गाडियों का पीछा किया । नाशिक में प्रत्याशी न बनाए जाने वाले इच्छुक उम्मीदवारों ने कांग्रेस के कार्यालय को ताला लगा दिया ।

३. नागपुर में राष्ट्रवादी कांग्रेस के पदाधिकारी अविनाश पर्दीकर को प्रत्याशी न बनाए जाने पर उनके समर्थकों ने राष्ट्रवादी कांग्रेस के कार्यालय के टीवी एवं खिडकियों के कांच फोड दिए । नागपुर में भाजपा के इच्छुकों को उमेदवारी न मिलने के कारण केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी के घर के बाहर उनके समर्थकों ने प्रदर्शन कर आत्मदाह का प्रयत्न किया ।

४. उद्धव बाळासाहेब ठाकरे पक्ष के कार्यकर्ताओं ने प्रत्याशी न बनाने के कारण उद्धव ठाकरे के मुम्बई स्थित ‘मातोश्री’ इस निवास स्थान के बाहर प्रदर्शन किए । दहीसर में युति में स्थान भाजपा को दिए जाने से शिवसेना के विधायक प्रकाश सुर्वे को उनके ही कार्यकर्ताओं ने काले झण्डे दिखाए ।

५. बीड के परली में प्रत्याशी आवेदन पत्र को लेकर राष्ट्रवादी कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में मारपीट हुई । कोल्हापुर में कांग्रेस के पुराने पदाधिकारियों की उपेक्षा किए जाने के कारण पक्ष कार्यालय के सम्मुख उन्होंने घोषणाएं दीं ।

६. सोलापुर में भाजपा के पुराने पदाधिकारियों की उपेक्षा करने के कारण उन्होंने पक्ष के जिला कार्यालय पर मोर्चा निकाला अथवा कार्यालय की तोडफोड की ।

७. चंद्रपुर में प्रत्याशी पद न मिलने के कारण भाजपा एवं कांग्रेस इन पक्षों के अनेक कार्यकर्ताओं ने पक्ष का त्यागपत्र दिया ।

८. पुणे में प्रभाग क्रमांक ३६ (अ) में शिवसेना के २ उम्मीदवारों को प्रत्याशी के आवेदन पत्र दिए जाने से उनमें से एक उम्मीदवार ने दूसरे उम्मीदवार का आवेदन पत्र छीनकर खा लिया ।

इस प्रकार राज्यभर में प्रत्याशी पद न मिलने के कारण इच्छुक उम्मीदवारों द्वारा उत्पात मचाने की सैकडों घटनाएं घटीं ।

मुंबई में भाजपा की प्रत्याशियों का नकली (बनावटी) आवेदन पत्र !

मुंबई के प्रभाग क्रमांक १७३ में भाजपा की ओर से प्रत्याशी आवेदन पत्र न मिलने के कारण शिल्पा केलुसकर ने बनावटी प्रत्याशी आवेदन पत्र चुनाव आयोग के पास जमा किया । यह प्रत्याशी का आवेदन पत्र चुनाव आयोग ने वैध भी घोषित कर दिया । इसलिए इस प्रभाग में भाजपा के २ उम्मीदवार हो गए हैं । इस विषय में भाजपा के मुंबई अध्यक्ष अमित साटम ने चुनाव आयोग के पास परिवाद किया है । भाजपा ने आरम्भ में शिल्पा केलुसकर को प्रत्याशी आवेदन पत्र दिया था; परंतु पश्चात उसे निकाल लिया । इस आवेदन के आधार पर शिल्पा केलुसकर ने बनावटी प्रत्याशी आवेदन पत्र बनाने का परिवाद में उल्लेख किया गया है ।

संपादकीय भूमिका

  • प्रत्याशी न बनाए जाने से सभी दलों के इच्छुक प्रत्याशियों द्वारा पक्ष कार्यालय फोडना, आत्मदाह का प्रयत्न, पक्षश्रेष्ठी को अपशब्द कहना, ऐसे हिंसक कृत्य कर उत्पात मचाया गया !
  • क्या ऐसे स्वार्थी राजनीतिज्ञ समाज का कभी हित साधेंगे ?
  • प्रत्याशी नहीं बनाया; इसलिए सीधे कानून हाथ में लेनेवाले भविष्य में कभी प्रत्याशी पद पाकर चुनकर आने के पश्चात कैसा व्यवहार करेंगे ?, इसका विचार न करना ही श्रेष्ठकर है ! ऐसे लोगों पर चुनाव लडने के लिए स्थायी रूप से प्रतिबन्ध लगा देना चाहिए !