Shankhnad Mahotsav Delhi : सनातन संस्था का शंखनाद महोत्सव, सांस्कृतिक पुनर्जागृति का शंखनाद है ! – गजेंद्र शेखावत, केंद्रीय सांस्कृतिक मंत्री

सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव देहली २०२५

केंद्रीय सांस्कृतिक मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत

सनातन संस्था द्वारा आयोजित सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव, सांस्कृतिक पुनर्जागृति का शंखनाद है, ऐसा मत केंद्रीय सांस्कृतिक मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने यहां बोलते हुए व्यक्त किया । ‘सनातन संस्था के रौप्यमहोत्सवी वर्षपूर्ति के निमित्त से आयोजित इस हिन्दू राष्ट्र शंखनाद महोत्सव में सहभागी होना हमारे लिए गौरवशाली क्षण है । सनातन संस्कृति के प्रवाह को निरंतर प्रवाहित रखने के संकल्प के साथ आयोजित इस सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव में सहभागी होना यह भाग्यशाली क्षण है’, ऐसा भी श्री. शेखावत ने कहा ।

शेखावत ने कहा कि, ‘धर्मेण जयति राष्ट्रम् ।’ अर्थात धर्म राष्ट्र को विजय प्राप्त करवाता है । धर्म के मार्ग पर चलने से ही कोई भी राष्ट्र विजय प्राप्त कर सकता है । डेढ महीने पूर्व जब इस कार्यक्रम की संकल्पना प्रस्तुत की जा रही थी, तब से इस कार्यक्रम में उपस्थित रहने की मैंने सिद्धता की थी; परंतु राजनीतिक क्षेत्र में दायित्व स्वीकारकर सक्रिय होने के कारण तत्कालिक आपातस्थिति की चुनौतियों का सामना करना पडा । इसलिए मैं यहां उपस्थित नहीं रह सका । इसलिए मैं खेद व्यक्त करता हूं ।

भगवान श्रीराम का मंदिर ५०० वर्षोंपूर्व जिन आक्रामकों ने तोडा था, उसका ध्वज निकाल दिया था, तब भारतीय संस्कृति का सूर्यास्त हुआ था । ५०० वर्षों की कालरात्र समाप्त होकर श्रीराम का भव्यदिव्य मंदिर निर्माण होकर उसमें श्रीरामलल्ला विराजित हुए । तब से भारतीय संस्कृति का पुनश्च उदय होता गया । तभी से भारतीय संस्कृति और उसके मूल्य नए रूप में पूरे विश्व में फैल चुके हैं । ‘वंदे मातरम्’ गीत से भारतियों का खोया हुआ आत्मविश्वास जगाया गया । आज समाज को संगठित करने के लिए ‘वंदे मातरम्’ की आवश्यकता है, जितनी डेढ सौ वर्ष पहले थी । ‘वंदे मातरम्’ यह केवल एक गीत नहीं था, किंतु वह एक मंत्र हुआ था । ‘वंदे मातरम्’ ने स्वतंत्रता सेनानियों को प्रेरणा दी । वह परस्परों को मिलने का माध्यम हुआ था । वह सभी को संगठित करनेवाला गीत था ।

छत्रपति शिवाजी महाराज के शस्त्र हमारे लिए प्रेरणादायी हैं, हमारे लिए वह इतिहास की  स्मृतियां जागृत करनेवाला माध्यम है । जो समाज हमारा मूल इतिहास भूलता है, वह समाज प्रगति नहीं कर सकता । आक्रामकों ने २ सहस्र वर्षों में भारत पर अनेक बार आक्रमण कर सनातन संस्कृति को नष्ट करने का प्रयत्न किया; परंतु वे सफल नहीं हुए । हमारे संतों ने सनातन संस्कृति की रक्षा की । उन्होंने लाेगों में वह चेतना जागृत रखी । हम बचपन से हमारे इतिहास से जुड गए हैं । मातृभूमि के लिए प्राणार्पण करने की सीख हमें मिली । ब्रिटिशों ने यह जानकर भारतियों का इतिहास नष्ट करने का प्रयत्न किया ।

संस्कृति की रक्षा के लिए प्रयत्नरत सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी का अभिनंदन !

सनातन संस्था के संस्थापक सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी ने सनातन के सहस्रों साधकों को साधनापथ पर एकत्रित कर संस्कृति की रक्षा के लिए सभी को नियोजित पद्धति से संगठित किया, इसलिए मैं उनके चरणों में वंदन करता हूं । उनके इस सार्थ प्रयत्न के लिए भारत के संस्कृतिमंत्री के रूप में मैं आभार व्यक्त करता हूं, उनका अभिनंदन करता हूं । विगत २५ वर्षों में सनातन संस्था ने लोगों को केवल अध्यात्म की उन्नति के मार्ग पर लाया नहीं, किंतु समाज का नैतिक बल और राष्ट्रबल बढाने के साथ धर्मजागृति का महान कार्य किया है । इस महोत्सव का आयोजन केवल ‘शंखनाद’ शब्द तक सीमित नहीं है, अपितु भारत की पुनर्जागृति का उद्घोष है । भारत की खोई संस्कृति का पुनश्च उदय हो रहा है, यह इस महोत्सव से दिखाई दे रहा है ।

भारत को शक्तिशाली देश बनाने के सनातन संस्था के प्रयत्न अभिनंदनीय !

आज भारत सांस्कृतिक उत्क्रांति के मार्ग पर है । हमारा देश परिवर्तन की स्थिति में है । सनातन संस्था ने ‘वंदे मातरम्’ का परिचय सभी को करवाया, इसलिए मैं उनके प्रति आभार व्यक्त करता हूं । ‘वंदे मातरम्’ पुनश्च एक बार सभी को जोडकर उस माध्यम से भारत को पुनश्च एक संपन्न और शक्तिशाली देश बनाने के सनातन संस्था के प्रयत्न अभिनंदनीय हैं !

केंद्रीय सांस्कृतिक मंत्री गजेंद्रसिंह शेखावत की शस्त्र प्रदर्शनी को भेंट !

केंद्रीय सांस्कृतिक मंत्री गजेंद्रसिंह शेखावत ने १४ दिसंबर को भारत मंडपम् के शिवकालीन शस्त्र प्रदर्शनी को भेंट दी । उस समय सनातन संस्था के संस्थापक सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के जीवन पर आधारित प्रदर्शनी तथा रुद्राक्ष, शालीग्राम की प्रदर्शनी को भी भेंट दी । प्रदर्शनी के बारे में उन्होंने संतोष व्यक्त किया ।