
‘दैवी सामर्थ्य के बल पर ही धर्मसंस्थापना होती है’, ऐसा इतिहास कहता है । पांडवों को भगवान श्रीकृष्ण ने और छत्रपति शिवाजी महाराज को देवी भवानी ने आध्यात्मिक सामर्थ्य प्रदान किया था । धर्माचरण से ही आध्यात्मिक सामर्थ्य प्राप्त किया जा सकता है । हिन्दुओ, तुम भी हिन्दू राष्ट्र की स्थापना के लिए धर्माचरण कर आध्यात्मिक सामर्थ्य बढाओ !’
– सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के ओजस्वी विचार
कोटि कोटि प्रणाम !
सनातन धर्म के मूर्तिमान स्वरूप सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी के श्री चरणों में कोटि-कोटि वंदन !
संपादकीय : गुरुभ्यो नमः ।
प.पू. भक्तराज महाराजजी द्वारा अपने शिष्य डॉ. आठवलेजी के प्रति व्यक्त गौरवोद्गार !
इरोड (तमिलनाडु) में ‘महासुदर्शन याग’ एवं ‘आयुष्य होम’ भावपूर्ण वातावरण में संपन्न !