
‘दैवी सामर्थ्य के बल पर ही धर्मसंस्थापना होती है’, ऐसा इतिहास कहता है । पांडवों को भगवान श्रीकृष्ण ने और छत्रपति शिवाजी महाराज को देवी भवानी ने आध्यात्मिक सामर्थ्य प्रदान किया था । धर्माचरण से ही आध्यात्मिक सामर्थ्य प्राप्त किया जा सकता है । हिन्दुओ, तुम भी हिन्दू राष्ट्र की स्थापना के लिए धर्माचरण कर आध्यात्मिक सामर्थ्य बढाओ !’
– सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम !
संपादकीय : आर्थिक अनुशासन
हिन्दू जनजागृति समिति के हिन्दू राष्ट्र संपर्क अभियान अंतर्गत राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी की मध्य प्रदेश यात्रा !
ज्ञानमूर्ति, निर्गुण तत्त्व की नित्य अनुभूति देनेवाले एवं ब्रह्मानंद में निमग्न रहनेवाले सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी
सच्चिदानंद परब्रह्म गुरुदेवजी द्वारा ३० वर्ष पूर्व दिए गए आशीर्वचन को साधक क्षण-क्षण अनुभव कर रहे हैं !
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी एकमेवाद्वितीय एवं अवतारी पुरुष क्यों हैं ?