
‘दैवी सामर्थ्य के बल पर ही धर्मसंस्थापना होती है’, ऐसा इतिहास कहता है । पांडवों को भगवान श्रीकृष्ण ने और छत्रपति शिवाजी महाराज को देवी भवानी ने आध्यात्मिक सामर्थ्य प्रदान किया था । धर्माचरण से ही आध्यात्मिक सामर्थ्य प्राप्त किया जा सकता है । हिन्दुओ, तुम भी हिन्दू राष्ट्र की स्थापना के लिए धर्माचरण कर आध्यात्मिक सामर्थ्य बढाओ !’
– सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के ओजस्वी विचार
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