मन्दिरों का दान ईश्वर का धन है, सरकार का नहीं ! – Himachal Pradesh HC

  • हिमाचल प्रदेश में सरकारी योजनाओं पर मन्दिरों का पैसा व्यय करने पर रोक !

  • मन्दिरों का पैसा सडक, पुल अथवा किसी भी निजी उद्यमों के लिए उपयोग न किया जाए, ऐसा दिया आदेश ।

शिमला (हिमाचल प्रदेश) – भक्तों द्वारा दिया गया दान केवल धार्मिक एवं सामाजिक कार्यों के लिए ही उपयोग किया जाना चाहिए । दान की राशि देव की है, सरकार की नहीं । यह राशि अब सडक, पुल अथवा किसी भी निजी उद्यमों के लिए उपयोग नहीं की जाएगी, ऐसा निर्णय हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने दिया है । न्यायालय ने ऐसे ३१ क्षेत्रों की विस्तृत सूची प्रसिद्ध की है, जिन क्षेत्रों में इस राशि का उपयोग किया जा सकता है ।

मन्दिरों के पैसों का मुख्य उपयोग वेद एवं योग शिक्षा के लिए किया जाएगा ।

१. न्यायालय ने बोला कि, इस पैसे का मुख्य उपयोग वेद एवं योग शिक्षा के अध्ययन, प्रसार एवं आवश्यक सुविधाओं के निर्माण के लिए किया जाएगा । साथ ही मन्दिरों का रखरखाव, पुजारी का वेतन एवं सामाजिक विकृतियों को नष्ट करने के लिए इस का उपयोग किया जानेवाला है ।

२. न्यायालय ने विशेषकर अस्पृश्यता एवं जातीय भेदभाव नष्ट करने के लिए अन्तर्जातीय विवाहों को प्रोत्साहन देनेवाले उपक्रमों को आरम्भ करने का आदेश दिया है ।

मन्दिरों द्वारा मासिक आय एवं व्यय की जानकारी सार्वजनिक करना बन्धनकारक ।

न्यायालय ने स्पष्ट किया कि, मन्दिर शिक्षा एवं समाज कल्याण का केन्द्र रहे हैं । प्रत्येक मन्दिर को अपनी मासिक आय एवं व्यय की जानकारी एवं लेखापरीक्षण प्रतिवेदन सार्वजनिक रूप से फलक पर अथवा जालस्थल पर प्रदर्शित करना आवश्यक होगा, जिस से भक्तों का विश्वास बना रहे ।

मन्दिर के निधि का दुरुपयोग होने पर सम्पूर्ण राशि सम्बन्धितों से ही वसूल की जाएगी । – न्यायालय की चेतावनी

उच्च न्यायालय ने स्पष्ट चेतावनी दी कि, मन्दिर के निधि का अपव्यय (दुरुपयोग) करना आपराधिक कृत्य होते हुए धार्मिक स्वतन्त्रता का अपमान है । यदि किसी भी विश्वस्त संस्था ने निधि का अपव्यय किया होगा, तो वह सम्पूर्ण राशि सम्बन्धितों से ही वसूल की जाएगी ।

कहां हो रहा था निधि का अपव्यय ?

प्राप्त जानकारी के अनुसार मन्दिरों का दाननिधि अब तक सडक एवं पुल का निर्माण, सरकारी कल्याण योजना एवं सार्वजनिक भवन निर्माण जैसी अधार्मिक कार्यों में उपयोग किया जा रहा था । इस के अतिरिक्त व्यक्तिगत लाभ के लिए, निजी उद्यमों में निवेश करने के लिए एवं मन्दिर में आनेवाले मान्यवर मेहमानों के लिए महंगी भेंटवस्तु क्रय करने के लिए भी यह निधि का उपयोग किया जा रहा था । न्यायालय ने इन सभी व्ययों पर तत्काल प्रतिबन्ध लगाने का आदेश दिया है ।

संपादकीय भूमिका

मन्दिरों के सरकारीकरण के कारण ही देश के मन्दिरों की यह स्थिति हो गई है । हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय का निर्णय सम्पूर्ण देश के मन्दिरों के लिए लागू किया जाना चाहिए एवं इस के लिए हिन्दुओं के धार्मिक संगठन, सन्त आदि को इस के लिए अब व्यापक जनआन्दोलन आरंभ करना चाहिए ।