संपादकीय : वांगचुक सजा के पात्र ही हैं !

सोनम वांगचुक

भारत के केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख में हुई हिंसा में अब तक 4 लोग मारे गए हैं और 80 से अधिक घायल हुए हैं । वर्तमान में, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल और सेना तैनात हैं और तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है । इस हिंसा में सरकारी संपत्ति का काफी नुकसान हुआ । पुलिस की गाडियां जलाई गईं, भाजपा का कार्यालय जलाया गया । इन सबके लिए जिम्मेदार है, तथाकथित पर्यावरणवादी सोनम वांगचुक का आंदोलन! उन्होंने 10 सितंबर को अनशन आरंभ किया । उनकी मांग थी कि, ‘लद्दाख को राज्य का दर्जा मिले और लद्दाख की भूमि, संस्कृति, सभ्यता की रक्षा के लिए 6वीं अनुसूची का पुनर्गठन हो ।’ ये ऐसी मांगें नहीं थीं, जिन पर तुरंत कार्रवाई करनी पडे और जिसके लिए उन्होंने चरमपंथी रुख अपनाकर स्थानीय युवाओं को भडकाया । उनकी मांगों पर विचार करें तो लद्दाख जैसे केवल 3 लाख की जनसंख्यावाले भू-प्रदेश को राज्य का दर्जा कैसे दिया जा सकता है ? केंद्र सरकार ने लद्दाख को स्थानीय लोगों की मांग के अनुसार वर्ष 2019 में केंद्रशासित प्रदेश का दर्जा देकर उसके विकास का मार्ग प्रशस्त किया था । इसलिए उन्हें वास्तव में इस पर संतुष्ट रहना चाहिए था; लेकिन कहते हैं न, एक मांग पूरी होने पर अगली मांग शुरू हो जाती है । लद्दाख के मामले में भी यही हुआ ।

लद्दाख को अस्थिर करने का प्रयास

अब उनकी ‘6वीं अनुसूची का पुनर्गठन कर लद्दाख के नागरिकों और संस्कृति को संरक्षण प्रदान किया जाए’ की मांग के संबंध में, वहां ऐसा कौन-सा बडा संकट आ गया है कि सरकार को तुरंत उनकी मांग माननी पडे । इस मांग के लिए दीर्घकालिक चर्चा के द्वार हमेशा खुले हैं । इसके लिए भी इतना चरमपंथी रुख अपनाने की आवश्यकता नहीं थी । उनके अनशन आंदोलन में 2 लोग अत्यधिक बीमार होकर अस्पताल में भर्ती हुए एवं उसके बाद युवाओं की भीड को भडकाया गया । इस आंदोलन को नेपाल और बांग्लादेश के युवाओं द्वारा किए गए आंदोलनों जैसा बताया गया । परिणामस्वरूप, कोई मुद्दा न होते हुए भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह गलतफहमी फैल गई कि ‘मानो भारत में लद्दाख में अन्याय हो रहा है ।’ पहले से ही अस्थिर जम्मू-कश्मीर के साथ शांत लद्दाख में भी कुछ उपद्रव पैदा कर उसे भी अशांत करने का प्रयास इस तथाकथित पर्यावरणवादी वांगचुक ने किया । सरकार ने उन्हें बंदी बनाकर सही कदम उठाया है । उनकी संस्थाओं की विदेशी फंड लेने की अनुमति रद्द करना भी सरकार का अच्छा निर्णय है । अब सरकार ने उनकी संस्था की गहन जांच शुरू कर दी है; हालांकि अभी तक जांच का विवरण सामने नहीं आया है । फिर भी वांगचुक से गलती हुई है यह निश्चित है ।

सोनम वांगचुक की हेराफेरी !

भारत में ‘चमकोगिरी’ (पब्लिसिटी स्टंट) करने के लिए, पर्यावरणवादी, समाजवादी, प्रगतीशील, विज्ञानवादी, अहिंसावादी, गांधीवादी, बुद्धिवादी आदि विशेषण स्वयं को लगाकर लोग अच्छी खासी लोकप्रियता प्राप्त करते हैं । सामाजिक कार्यकर्ता का पद तो तथाकथित समाजवादियों के कारण बदनाम हो गया है । फिर वह तीस्ता सेटलवाड हों, मेधा पाटकर हों अथवा कोई और । वही हाल तथाकथित पर्यावरणवादी सोनम वांगचुक का है । अभिनेता आमिर खान की फिल्म ‘३ इडियट्स’ में एक वैज्ञानिक के किरदार के कारण उन्हें प्रसिद्धि मिली । सोशल मीडिया पर पर्यावरण संरक्षण की बडी-बडी बातें करते हुए वे वीडियो के माध्यम से दूसरों को उपदेश देते रहते हैं; लेकिन उनके कारनामे अब तक क्यों नहीं खुले ? छुप-छुपकर पैसा कमाकर उन्होंने क्या धंधे किए हैं ? यह समाज के सामने आना आवश्यक है ।

वांगचुक ने अनशन के 7वें दिन भयानक जहर उगला । वांगचुक ने एक स्थानीय कलाकार के कथन का संदर्भ देते हुए बताया कि, ‘वह कह रहा था कि पहले यदि चीन ने इस जगह पर आने का प्रयास किया, तो हम उसे रोकते थे । अब यदि वह आया, तो हम उसे भारत में घुसने के रास्ते दिखाएंगे’, इस कलाकार को जैसा लगता है, वैसा न हो; इसलिए सरकार को हमारी मांगें माननी चाहिए ।
मांग मनवाने का यह कौन-सा तरीका है? वांगचुक सीधे शत्रु देश को भारत पर आक्रमण करने और यदि वह आक्रमण करे तो उसे सहायता करने की धमकी दे रहे हैं । वास्तव में, यह खुला देशद्रोह है । इसके लिए उन्हें तुरंत कठोर सजा मिलना आवश्यक है । इससे यह भी पता चलता है कि वह चीन के मोहरे हैं और अपने स्वार्थ के लिए वे किसी भी हद तक जा सकते हैं । यह बल उन्हें कहां से मिला ? निश्चित रूप से यह अचानक पैदा नहीं हुआ है । इसके लिए उनके आर्थिक स्रोतों को देखने की आवश्यकता है ।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सोनम वांगचुक की संस्था ‘हिमालय इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव लद्दाख’ के ट्रस्ट के कुल 7 बैंक खाते थे । उनमें से उन्होंने केवल 4 घोषित किए थे और 3 छुपाए थे । इन बैंक खातों में कुल 21 करोड रुपए देश और विदेश से आए । इसी प्रकार वांगचुक का एक प्रतिष्ठान (फर्म) भी है । उसके बैंक खाते में उन्होंने अपने ट्रस्ट को मिले साढे छह करोड रुपये भेजे थे । इसके अलावा, उनके कुल 9 व्यक्तिगत बैंक खाते होते हुए भी उन्होंने केवल एक का ही खुलासा किया था । उनके व्यक्तिगत खाते पर भी देश-विदेश से करोडों रुपए वर्ष 2013 से आ रहे थे । विदेश से ये पैसे वांगचुक को किसलिए भेजे गए थे ? इसकी जांच करने की आवश्यकता है । वांगचुक की संस्था पर सरकारी भूमि का दुरुपयोग करने का आरोप होने के कारण वह भूमि भी उनसे वापस ले ली गई थी,अर्थात इस तरह बैंक खातों को छिपाना, बडी मात्रा में विदेश से पैसे प्राप्त करना, सरकारी भूमि का दुरुपयोग, ये किस तरह के लक्षण हैं ? आज तक सामने आए झूठे सामाजिक कार्यकर्ता, श्रद्धा निर्मूलन के नाम पर काम करनेवाली संस्थाओं की एक विशिष्ट कार्यप्रणाली ही है । विदेश से करोडों रुपए के चंदे जुटाओ, उसकी जानकारी सरकार को न दो और पैसों का लेखा-जोखा भी पेश न करो । इन पैसों से भारत विरोधी, हिन्दू विरोधी गतिविधियां करो और देश को अस्थिर करो, यह एक ‘मोडस ऑपरेंडी’ अथवा ‘टूलकिट’ ही है । हिंसा होने पर उसे न रोककर भाग निकलनेवाले वांगचुक की इस देशविरोधी मानसिकता को कभी क्षमा नहीं किया जाना चाहिए । समर्थ रामदास स्वामी जी की भाषा में कहें तो, देश से द्रोह करनेवाला पशु है । उसे भगा देना चाहिए । यह वचन ऐसे देशद्रोहियों पर लागू होता है ।

स्वार्थी मांगों के लिए देश को बंधक बनानेवाले और शत्रु देशों से साठगांठ करनेवालों पर कठोर कार्रवाई करनी चाहिए !