कल्याण स्थित के.सी.गांधी इंग्लिश विद्यालय में विद्यार्थियों के टीका, चूड़ियों आदि पर प्रतिबंध !

 

कल्याण (जिला ठाणे) – यहां के प्रसिद्ध के.सी. गांधी इंग्लिश विद्यालय में विद्यार्थियों का माथे पर टीका अथवा टिकली लगाना, छात्राओं का हाथों में चूडियां धारण करना तथा विद्यार्थियों का रक्षा-सूत्र अथवा धागा बांधना आदि हिन्दुओं के अत्यंत प्राथमिक धर्माचरण पर प्रतिबंध लगाया गया है । विद्यालय प्रशासन के इस निर्णय के कारण अभिभावकों में घोर आक्रोश व्याप्त है । इस विषय में कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका के शिक्षण विभाग ने विद्यालय प्रशासन से स्पष्टीकरण मांगा है ।

टीका लगाने पर पिटाई की धमकी !

इस विषय में अभिभावकों ने प्रसार माध्यमों को कहा कि यदि विद्यालय में कोई विद्यार्थी टीका अथवा छात्रा टिकली लगाकर आती है, तो उनका टीका बलपूर्वक मिटाया जा रहा है । इसमें कुछ विद्यार्थियों की पिटाई भी की गयी है, ऐसा दावा अभिभावकों ने किया है । विद्यार्थियों ने यदि टीका लगाकर विद्यालय में प्रवेश किया तो उन्हें दंड दिया जायेगा, ऐसी धमकी भी शिक्षकों की ओर से दी गयी है, ऐसा अभिभावकों का दावा है । (यदि इस दावे में सत्यता है, तो यह अत्यंत आक्रोशोत करने वाला कृत्य है । यदि किसी मुसलमान छात्रा का हिजाब उतारने का विचार मात्र किसी ने वाणी से प्रकट किया, तो उनके विरोध में ‘सर तन से जुदा’ की घोषणाएं करते हुए हिंसा की जाती, यही सत्य है ! – संपादक)

इस विषय में क्रोधित अभिभावकों ने विद्यालय के प्रधानाध्यापक के पास शिकायत की तो सभी विद्यार्थियों को टीका, टिकली, गंध, चूडियां तथा रक्षा-सूत्र धारण करने पर प्रतिबंध लगाया गया है, ऐसी सूचना प्रधानाध्यापक ने दी ।

महापालिका शिक्षण विभाग के पास शिकायत !

विद्यालय के हिन्दू विद्यार्थियों को धर्माचरण करने देने के निर्णय के विरोध में अभिभावकों ने ठाकरे गुट के कल्याण विधानसभा संघटक रूपेश भोइर के पास शिकायत की है । भोइर ने इस विषय में कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका के शिक्षण विभाग के पास आपत्ति की ।

संपादकीय भूमिका

  • हे हिन्दुओ, अपनी संतानो पर विपरीत कुसंस्कार करनेवाले ऐसे विद्यालयों में विद्यार्थियों को डालना है या नहीं, यह आप स्वयं निश्चित करें ! यह एक प्रकार का धर्मान्तरण ही है, यह ध्यान में रखकर इसकी गंभीरता जानो !
  • हिन्दू धर्म में धर्माचरण की छोटी सी क्रिया भी चैतन्य प्रदान करनेवाली है । अतः संतानों को लाभ ही होनेवाला है, यह धर्मशास्त्र ध्यान में रखकर अभिभावकों को संतानों को धर्माचरण करने देने पर दृढ रहना चाहिए !
  • अन्य धर्मावलंबी विद्यार्थियों को धर्माचरण के विषय में धमकी देने का साहस क्या विद्यालय के शिक्षकों में है ?