JeM Commandor Admits : मसूद अजहर ने ही रचा था संसद तथा मुंबई पर आक्रमण का षड्यंत्र

जैश-ए-मोहम्मद का आतंकवादी कमांडर मसूद इलियास काश्मिरी ने एक अन्य स्वीकृति दी !

मसूद इलियास काश्मिरी एवं मसूद अझहर

इस्लामाबाद (पाकिस्तान) – मसूद इलियास काश्मिरी जो जैश-ए-मोहम्मद का आतंकवादी कमांडर है, उसने एक अन्य स्वीकृति दी है । उसने वर्ष २००१ में देहली स्थित भारतीय संसद तथा वर्ष २००८ में मुंबई में हुए आतंकवादी आक्रमणों के पीछे जैश का प्रमुख मसूद अजहर होने की बात कही । इस समय उसने बालाकोट तथा बहावलपुर स्थित जैश के ठिकानों का भी उल्लेख किया । उसने कहा कि बालाकोट की भूमि से मसूद अजहर की गतिविधियां चल रही थीं ।

आतंकवादियों के अंतिम संस्कार में पाकिस्तान के सैन्याधिकारी

आतंकवादी काश्मिरी ने यह भी बताया कि भारत के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के समय बहावलपुर स्थित जैश के शिविर में मारे गये आतंकवादियों के अंतिम संस्कार में सम्मिलित होने का आदेश सीधे पाकिस्तानी सेनाप्रमुख ने अपने वरिष्ठ सैन्याधिकारियों को दिया था । इतना ही नहीं, अपितु सरकार तथा प्रसारमाध्यमों में समन्वय करनेवाले’इंटर सर्विस पब्लिक रिलेशन (आई.एस्.पी.आर.) के महासंचालक ने बहावलपुर तथा जैश-ए-मोहम्मद के बीच संबंध छिपाने का भी प्रयास किया था ।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ के अभियान के बाद आतंकवादी संगठनों में अत्यधिक भय !

काश्मिरी की इस स्वीकृति के बाद एक और बड़ी बात सामने आई है । ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के अभियान के बाद आतंकवादी संगठनों में अत्यधिक भय उत्पन्न हुआ है । काश्मिरी ने मंच से ‘मिशन-ए-मुस्तफा’ (मुहम्मद पैग़म्बर के नाम पर चलाया जानेवाला तथाकथित धार्मिक अभियान) के लिए विभिन्न आतंकवादी समूहों को एकत्र आने का आह्वान किया । उसने कहा कि कुछ लोगों ने जिहाद को अस्वीकार किया है; किन्तु मैं शेष लोगों के साथ मिलकर पुनः जिहाद को जीवित रखना चाहता हूं ।

अमेरिका, भारत एवं इस्रायल में युद्धों का कारण मसूद अजहर

काश्मिरी ने आगे कहा कि आज विश्व में अमेरिका, भारत तथा इस्रायल में युद्धों का कारण यदि कोई है, तो वह मसूद अजहर है । ‘अल्-जिहाद’ की ध्वनि बेंजामिन नेतान्याहू तक पहुंचनी चाहिए । इस समय काश्मिरी ने लोगों को जिहाद जीवित रखने के लिए हाथ ऊपर उठाकर घोषणाएं करने का भी आह्वान किया ।

संपादकीय भूमिका

पाकिस्तान का आतंकवादी खुलकर यह स्वीकार कर रहा है, इससे अब वैश्विक समुदायों को पाकिस्तान को ‘आतंकवादी देश’ घोषित करके उसपर सभी स्तरों पर बहिष्कार करना चाहिए ! इसके लिए अब भारत को भी मांग करनी चाहिए !