सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी की भांति ही व्यापक स्तर पर कार्य करनेवालीं एकमेवाद्वितीय श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) बिंदा नीलेश सिंगबाळजी !

श्रीसत्‌शक्ति (श्रीमती) बिंदा नीलेश सिंगबाळ

१. एक ही समय पर अनेक स्तरों पर कार्य करनेवालीं तथा जिनके कार्य करने पर काल का भी बंधन नहीं है, ऐसी श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी !

‘श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी के कार्य का विस्तार अब बहुत ही बढ गया है । कार्य करने के लिए उन पर काल का भी बंधन नहीं रहा है । ‘महर्षि उन्हें अवतार क्यों कहते हैं ?’, वह उनकी प्रचुर समष्टि कार्य करने की क्षमता से ध्यान में आता है । वे एक झटके में अनंत साधकों की समस्याओं का समाधान करती हैं ।

श्रीचित्‌शक्ति (श्रीमती) अंजली मुकुल गाडगीळ

२. साधना के संदर्भ में साधकों का उचित दिशादर्शन कर उनकी फलोत्पति बढानेवालीं श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) सिंगबाळजी !

पहले वे केवल रामनाथी, गोवा के सनातन के आश्रम के साधकों का ही साधना के विषय में मार्गदर्शन करती थीं । उसके उपरांत धीरे-धीरे उनमें कार्य करने की क्षमता बढी । उसके उपरांत वे आश्रम के साथ ही प्रसार के साधकों का भी मार्गदर्शन करने लगीं । वे साधकों की सभी प्रकार की समस्याओं का समाधान करने लगीं तथा साधना में उनका उचित दिशादर्शन भी करने लगीं । सनातन संस्था के कार्य से संबंधित जो सेवाएं हैं, उन्हें करनेवाले साधकों का सत्संग लेकर उन्हें साधना में अच्छे ढंग से तथा परिपूर्ण पद्धति से स्थापित कर उनकी फलोत्पत्ति बढाना भी उनके लिए संभव होने लगा । तब परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी भी (गुरुदेवजी भी) उनकी प्रशंसा करने लगे ।

३. अप्रत्यक्षरूप से अनेक विभिन्न सेवाएं करनेवाले साधकों का बडी सहजता से दायित्व स्वीकारकर सद्गुरुपद प्राप्त करनेवालीं श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी !

आश्रम में विभिन्न राज्यों के साधकों के शिविर होते हैं । उसके लिए साधक जब आश्रम में आते हैं, उस समय मां की ममता देना भी उनके कार्य का एक अंग है । दैनिक ‘सनातन प्रभात’ से संबंधित सेवा करनेवाले, कला, निर्माणकार्य एवं प्रसार, साथ ही अन्य अनेक विभिन्न सेवाएं करनेवाले साधकों की साधना का अप्रत्यक्ष दायित्व वे बडी सहजता से स्वीकार करने लगीं । उनकी साधना की गति इतनी तीव्र थी कि देखते-देखते कब उन्होंने सद्गुरुपद प्राप्त किया, यह किसी के ध्यान में भी नहीं आया ।

४. अनेक बार साधकों का मार्गदर्शन कर चैतन्य के स्तर पर कार्य करनेवालीं श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी !

आगे जाकर महर्षि उनके नाडीवाचन में श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी के अवतारी कार्य का बार-बार उल्लेख करने लगे । वे उन्हें ‘श्री महालक्ष्मी की अवतार’ कहने लगे । मैंने उनकी यह यात्रा बहुत निकटता से देखी है । अब उनका कार्य चैतन्य के स्तर पर चल रहा है । वे अनेक बार मुझे सूक्ष्म का कार्य भी बताते हुए कहती हैं, ‘‘अनेक बार साधकों का मार्गदर्शन करते समय निश्चितरूप से उनकी क्या आवश्यकताएं हैं, यह बात मुझे पहले ही समझ में आ जाती है अथवा अनेक बार आगे होनेवाले प्रसंगों की सूचनाएं भी मिलती हैं ।’’ हममें संवाद भी होता है । उनके साथ होनेवाले संवाद से मुझे ऊर्जा भी प्राप्त होती रहती है । उनकी बातों से मुझे समष्टि कार्य के अनेक दृष्टिकोण एवं पहलू भी सीखने को मिलते हैं । उनका चल-दूरभाष आना हमारे लिए चैतन्य के स्तर की एक पाठशाला ही होती है ।

५. ‘श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) सिंगबाळजी के अथक प्रयासों से पृथ्वी पर रामराज्य अवतरित होगा’, इसमें कोई संदेह नहीं !

एक ही समय अनेक साधकों की समस्याओं का समाधान करते समय उन्हें उसका तनाव आया हो, ऐसा मैंने कभी नहीं देखा । इससे ही उनमें विद्यमान देवत्व समझ में आता है । वर्तमान में वे दिन-रात साधक, समाज एवं राष्ट्र के लिए अथक परिश्रम कर रही हैं । ‘श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) सिंगबाळजी के अथक प्रयासों से पृथ्वी पर श्री रामराज्य अवतरित होगा’, इसमें कोई संदेह नहीं हैं ।

६. श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) सिंगबाळजी की पुकार सुनकर साधकों की रक्षा हेतु भगवान श्रीविष्णु दौडे चले आएंगे, इसमें किसी को भी लेशमात्र संदेह नहीं होना चाहिए !

अकेले भक्त प्रल्हाद के प्रयासों के फल के रूप में जैसे भगवान श्रीविष्णु को नरसिंह अवतार लेना पडा, वैसे ही श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) सिंगबाळजी की पुकार सुनकर साधकों की रक्षा हेतु भगवान श्रीविष्णु दौडे चले आएंगे, इसमें किसी को भी लेशमात्र भी संदेह नहीं होना चाहिए । उनके कार्य की गति तथा उनके कार्य करने की अष्टावधानता को पहचानना भी हमारी क्षमता के बाहर की बात है । श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) सिंगबाळजी, हम केवल आपके चरणों में नतमस्तक हो सकते हैं ।

‘आज आपके जन्मदिवस के उपलक्ष्य में आप अपने चैतन्य का वरदहस्त हम अज्ञानी बालकों के मस्तक पर अखंड रखें तथा आपकी कृपा की अमृतवर्षा हम पर अविरत होती रहे’, यही श्रीमन्नारायण के चरणों में प्रार्थना है ।’

– श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) अंजली मुकुल गाडगीळजी (२७.९.२०२४)