
गुरुसेवा तो श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी की सांस है । केवल कुछ ही घंटे विश्राम कर वे दिन-रात गुरुसेवा में लीन रहती हैं । इस विषय में वे कहती हैं, ‘दिन-रात कितनी भी सेवा क्यों न करूं, ‘और कितनी करूं’, ऐसा लगता है । ‘विश्राम के लिए रात में आंखें बंद ही नहीं होने चाहिए, बस सेवा ही करती रहूं’, ऐसा लगता है । ‘अखंड कार्यरत रहकर परिपूर्ण सेवा कर’ उन्होंने कर्मयोग को साध लिया है ।
‘आज्ञापालन’ का गुण पूर्णरूपेण धारण करनेवालीं श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी
अध्यात्म में ‘आज्ञापालन’ सभी गुणों का राजा है । श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी की विशेषता यह है कि वे परिपूर्ण आज्ञापालन करती हैं । ‘गुरु के मन की बात जानकर कृति करना’, इस आज्ञापालन के अगले चरण के अनुसार वे गुरु को प्रिय लगनेवाली सेवाएं करती हैं ।
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के ओजस्वी विचार
कोटि कोटि प्रणाम !
सनातन धर्म के मूर्तिमान स्वरूप सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी के श्री चरणों में कोटि-कोटि वंदन !
संपादकीय : गुरुभ्यो नमः ।
प.पू. भक्तराज महाराजजी द्वारा अपने शिष्य डॉ. आठवलेजी के प्रति व्यक्त गौरवोद्गार !
इरोड (तमिलनाडु) में ‘महासुदर्शन याग’ एवं ‘आयुष्य होम’ भावपूर्ण वातावरण में संपन्न !