
गुरुसेवा तो श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी की सांस है । केवल कुछ ही घंटे विश्राम कर वे दिन-रात गुरुसेवा में लीन रहती हैं । इस विषय में वे कहती हैं, ‘दिन-रात कितनी भी सेवा क्यों न करूं, ‘और कितनी करूं’, ऐसा लगता है । ‘विश्राम के लिए रात में आंखें बंद ही नहीं होने चाहिए, बस सेवा ही करती रहूं’, ऐसा लगता है । ‘अखंड कार्यरत रहकर परिपूर्ण सेवा कर’ उन्होंने कर्मयोग को साध लिया है ।
‘आज्ञापालन’ का गुण पूर्णरूपेण धारण करनेवालीं श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी
अध्यात्म में ‘आज्ञापालन’ सभी गुणों का राजा है । श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी की विशेषता यह है कि वे परिपूर्ण आज्ञापालन करती हैं । ‘गुरु के मन की बात जानकर कृति करना’, इस आज्ञापालन के अगले चरण के अनुसार वे गुरु को प्रिय लगनेवाली सेवाएं करती हैं ।
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