साधकों के लिए सूचना

१. भगवान दत्तात्रेय का नामजप करें । : ‘आजकल अनेक साधकों को अनिष्ट शक्ति जनित कष्ट हो रहे हैं । पितृपक्ष के काल में (८.९.२०२५ से २१.९.२०२५ की अवधि में) इन कष्टों में वृद्धि होने के कारण इस कालावधि में प्रतिदिन न्यूनतम १ घंटा ‘ॐ ॐ श्री गुरुदेव दत्त ॐ’ नामजप करें । नामजप sanatan.org जालस्थल पर उपलब्ध है ।
नामजप के लिए लिंक – https://www.sanatan.org/hindi/a/149.html
जो साधक स्वयं को हो रहे अनिष्ट शक्तियों के कष्ट दूर होने हेतु आध्यात्मिक उपचार करते हैं, वे अपने उपचारों के नामजप के अतिरिक्त न्यूनतम १ घंटा भगवान दत्तात्रेय का नामजप करें । भगवान दत्तात्रेय का नामजप करते समय हाथ की पांचों उंगलियों के अग्र भाग जोडकर, किंतु उनमें थोडा अंतर रखकर अनाहतचक्र और मणिपुरचक्र पर न्यास करें ।
जो साधक उपचार नहीं करते, वे अपने व्यक्तिगत कार्य, स्नान, स्वच्छता-सेवा आदि के समय न्यूनतम १ घंटा यह नामजप हो, इस ओर ध्यान दें । तब भी अतृप्त पूर्वजों के कारण कष्ट प्रतीत हों, तो वे भी बैठकर और मुद्रा कर नामजप करें ।
२. पितृपक्ष की अवधि में पितृदोष से उत्पन्न कष्टों से रक्षा होने हेतु पूरे दिन में बीच-बीच में भगवान दत्तात्रेय से प्रार्थना और श्राद्धविधि करें ।
३. जिन साधकों को संभव हो, वे पितृपक्ष में श्राद्धविधि अवश्य करें । ऐसा करने से अतृप्त पूर्वजों के कष्ट तो दूर होंगे ही, साथ में साधना हेतु उनके आशीर्वाद भी मिलेंगे ।’
– (सद्गुरु) डॉ. मुकुल गाडगीळ, सनातन आश्रम, रामनाथी, गोवा (११.८.२०२५)
(और इनकी सुनिए…) ‘कुंकुम इस्लामी देशों से आता है, तो क्या फिर हिन्दु तिलक लगाना बंद कर देंगे ?’ – Priyank Kharge
साधको, वर्तमान आपातकाल में रात्रि के समय व्यक्तिगत वाहन से लंबी दूरी की यात्रा करने से बचें तथा अपरिहार्य परिस्थिति में ही आध्यात्मिक स्तर के उपाय करके रात्रि-यात्रा करें !
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