Marbat Nagpur : लव जिहाद, ऑपरेशन सिंदूर, मंहगाई एवं भ्रष्टाचार के प्रतीकचिन्ह बने आकर्षण के केंद्र !

नागपुर में मारबत शोभायात्रा

मारबत शोभायात्रा में लव जिहाद तथा डॉनल्ड ट्रम्प’ की मूर्तियां

नागपुर : यहां २३ अगस्त को मारबत शोभायात्रा निकाली गई । भले ही यह उत्सव धार्मिक एवं पारंपरिक हो, तब भी इसमें सामाजिक संदेश भी दिया जाता है । उसके कारण मारबतियों का दर्शन करने हेतु तथा शोभायात्रा में सहभागी होने के लिए बडी भीड उमड आई थी । इस शोभायात्रा में अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प, साथ ही लव जिहाद, ऑपरेशन सिंदूर, आतंकवाद, मंहगाई, भ्रष्टाचार, व्यसनाधीनता आदि विषयों पर प्रदर्शित किए गए प्रतिकात्मक मूर्तियों ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया ।

१. इस शोभायात्रा में ‘महंगाई के राक्षस का वध कीजिए’, ‘पीली मारबत बोलती है’, ‘शहर को स्वच्छ रखिए’, ‘भ्रष्टाचार करनेवालों को जनता छोडेगी नहीं’, ‘यातायात की समस्या का समाधान कीजिए’, ‘नागरिकों को राहत दीजिए, पानी के अभाव पर उपाय कीजिए; अन्यथा जनता प्रश्न पूछेगी’ जैसे नारे लगाए गए ।

२. ‘जागनाथ बुधवारी’ से तेली समुदाय की पीली, जबकि बारदाना मार्केट से ‘काली मारबत’ की शोभायात्रा निकली । इतवारी के नेहरू मूर्ति चौक पर दोनों मारबतियों का मिलन हुआ ।

३. कोई अनुचित घटना न हो; इसके लिए ३ सहस्र पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी । काली मारबत की शोभायात्रा का १४४ वर्षाें का, जबकि पीली मारबत की शोभायात्रा का १४५ वर्षाें का इतिहास है । इन दोनों मारबतियों की शोभायात्रा एक ही समय पर निकली ।

‘पीली मारबत’ तथा ‘काली मारबत’ क्या है ?

लोगों की रक्षा के लिए आयोजित की जानेवाली पीली मारबत की शोभायात्रा

महाराष्ट्र के विदर्भ में बैलों के पूजन के त्योहार के दूसरे दिन मारबत उत्सव मनाया जाता है । १४५ वर्षाें का इतिहास प्राप्त यह उत्सव केवल धार्मिक समारोह नहीं है, अपितु समाज की अनिष्ट प्रवृत्तियों का विरोध तथा समाज के जागरण के साधन के रूप में यह उत्सव आज भी उतने ही हर्षाेल्लास से मनाय जाता है । वर्ष १८८५ में ‘जागनाथ बुधवारी’ परिसर के तेली समुदाय ने पीली मारबत शोभायात्रा निकालने की परंपरा आरंभ की । लोगों की रक्षा के लिए निकाली जानेवाली ‘पीली मारबत’ देवी की मूर्ति होती है । इस विशेषता के कारण ‘पीली मारबत’ केवल श्रद्धा का प्रतीक नहीं है, अपितु यह उत्सव मातृत्व एवं लोककल्याण की भावना भी संजोता है । शोभायात्रा के उपरांत उसका दहन किया जाता है, जिससे अनिष्ट प्रवृत्तियों के विनाश का तथा अच्छे विचारों के स्वागत का संदेश दिया जाता है । उसकी शोभायात्रा के समय महिलाएं बडी संख्या में छोटे बच्चों को साथ लेकर मारबत के दर्शन के लिए उपस्थित होती हैं ।

१४४ वर्ष पूर्व ‘काली मारबत’ की शोभायात्रा का आरंभ हुआ । श्रीकृष्ण को मारने आईं पुतना मौसी के प्रतीक के रूप में काले रंग की मूर्ति खडी की जाती है । ‘काली मारबत’ समाज में चल रहे अन्याय, दुष्प्रवृत्तियों तथा अंधविश्वासों का विरोध करती है ।