चेन्नई में ‘विश्व वारकरी संस्थान’की ओर से संत ज्ञानेश्वर महाराज का ७५० वां जयंती समारोह संपन्न !

  • सनातन संस्था की श्रीचित्‌शक्ति (श्रीमती) अंजली मुकुल गाडगीळजी के करकमलों से हुआ उद्घाटन !

  • तमिलनाडु के राज्यपाल आर्.एन. रवि भी थे उपस्थित

दीपप्रज्वलन कर समारोह का उद्घाटन करती हुईं श्रीचित्‌शक्ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळजी

चेन्नई (तमिलनाडू), १६ अगस्त (संवाददाता) : यहां विश्व वारकरी संस्थान ने एक भावपूर्ण समारोह का आयोजन कर संत ज्ञानेश्वर महाराज की ७५० वीं जयंती मनाई । इस समारोह में सनातन संस्था के संस्थापक सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी की एक आध्यात्मिक उत्तराधिकारिणी श्रीचित्‌शक्ति (श्रीमती) अंजली मुकुल गाडगीळजी को विशेषरूप से आमंत्रित किया गया था । इसके साथ ही इस समारोह में तमिलनाडु के राज्यपाल आर्.एन्. रवि मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे । इस समारोह में ७५० वारकरियों ने संत ज्ञानेश्वर महाराज की ७५० वीं जयंती के उपलक्ष्य में ज्ञानेश्वरी का पाठ किया । यह समारोह शहर के आड्यार क्षेत्र में स्थित श्री आनंद पद्मनाभ स्वामी मंदिर में संपन्न हुआ ।

‘ज्ञानोत्तर भक्ति’ ग्रंथ का लोकार्पण करते हुए बाईं ओर से श्रीचित्‌शक्ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळजी, डॉ. श्री रघुनाथदासजी महाराज, मा. राज्यपाल आर्.एन्. रवि, गणपति तुकारामजी महाराज एवं डॉ. रंगनजी महाराज
श्रीचित्‌शक्ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळ को संत ज्ञानेश्वर महाराज की मूर्ति प्रदान कर उन्हें सम्मानित करते हुए डॉ. श्री रघुनाथदासजी महाराज

इस समारोह का आरंभ श्रीचित्‌शक्ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळजी, साथ ही डॉ. श्री रघुनाथदासजी महाराज की माता गुरुमाता मीनालोचनी, डॉ. श्री रघुनाथदासजी महाराज एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती शुभलक्ष्मीजी के करकमलों से दीपप्रज्वलन किया गया । इस अवसर पर श्रीचित्‌शक्ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळजी एवं राज्यपाल आर्.एन्. रवि के हस्तों ‘विश्व वारकरी संस्थान’के उत्तराधिकारी डॉ. श्री रघुनाथदासजी महाराज द्वारा लिखित ‘राजविद्या’ (ज्ञानेश्वरी के ९ वें अध्याय पर का भाष्य), साथ ही ‘ज्ञानोत्तर भक्ति’ (संत ज्ञानेश्वर महाराज की सीख का रहस्य), इन ग्रंथों का लोकार्पण किया गया । डॉ. श्री रघुनाथदास महाराज ने श्रीचित्‌शक्ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळजी को संत ज्ञानेश्वर महाराज की मूर्ति प्रदान कर उन्हें सम्मानित किया ।

 ‘विश्व वारकरी संस्थान’ का कार्य !

विश्व वारकरी संस्थान विगत ३० वर्षाें से महाराष्ट्र की भक्ति-परंपरा का पूरे विश्व में प्रचार-प्रसार कर रहा है । इसके अंतर्गत इस संस्थान ने अब तक तमिलनाडु के १५ सहस्र लोगों को अभंग (भक्तिरचना) तथा ज्ञानेवश्वरी के पाठ का प्रशिक्षण दिया है । पूरे विश्व में फैले ५ लाख तमिल भक्त इस संस्थान के विभिन्न कार्यक्रमों में बढ-चढकर भाग लेते हैं ।