‘ख़ालिद का शिवाजी’ चलचित्र का वास्तविक स्वरूप उजागर करने वाले हिन्दुत्वनिष्ठ को पुलिस ने दिया नोटिस !

मुंबई – छत्रपति शिवाजी महाराज की सेना में ३५ प्रतिशत मुसलमान थे, उनके ११ अंगरक्षक मुसलमान थे तथा उनके लिए शिवाजी महाराज ने रायगढ पर एक मस्जिद का निर्माण किया था — इस प्रकार का कपोलकल्पित इतिहास ‘ख़ालिद का शिवाजी’ इस चलचित्र में प्रस्तुत किया गया है ।

ऐसे मनगढ़ंत चलचित्र पर कार्रवार्ई करने के स्थान पर, इस चलचित्र का वास्तविक स्वरूप सामाजिक माध्यमों के द्वारा प्रस्तुत करनेवाले ‘सकल हिन्दू समाज ग्रुप १’ इस ‘व्हॉट्सएप’ समूह के व्यवस्थापक श्री प्रमोद काटे को ही पुलिस ने कार्रवार्ई की चेतावनी सहित नोटिस भेजा है ।

सामाजिक माध्यमों पर इस प्रकार का संदेश प्रसारित करने पर अपराध प्रविष्ट करने की चेतावनी इस नोटिस में दी गई है । २ अगस्त के दिन भांडुप पुलिस थाने से श्री प्रमोद काटे को यह नोटिस भेजा गया ।

‘ख़ालिद का शिवाजी’ चलचित्र के प्रकरण में हिन्दू महासंघ के ‘सेंसर बोर्ड’ को नोटिस !

किसी भी परिस्थिति में यह चलचित्र प्रदर्शित नहीं होने देंगे ! – हिन्दू महासंघ

मुंबई – छत्रपति शिवाजी महाराज के संदर्भ में असत्य इतिहास दर्शानेवाले ‘ख़ालिद का शिवाजी’ इस चलचित्र को किसी भी परिस्थिति में हम प्रदर्शित नहीं होने देंगे — ऐसी चेतावनी हिन्दू महासंघ की ओर से दी गई है । इस विषय में हिन्दू महासंघ ने चलचित्र परिनिरीक्षण मंडल को विधिसम्मत नोटिस भी भेजा है ।

यह इतिहास को विकृत करने का प्रयास है । यदि इस चलचित्र के प्रदर्शन को अनुमति प्राप्त हुई, तो उसके परिणामों के लिए चलचित्र परिनिरीक्षण मंडल उत्तरदायी रहेगा — ऐसी चेतावनी भी हिन्दू महासंघ ने नोटिस में दी है । हिन्दू महासंघ ने चलचित्र परिनिरीक्षण मंडल को भेजे गए पत्र की प्रतिलिपि गृहमंत्री श्री देवेंद्र फडणवीस को भी प्रेषित की है ।

‘ख़ालिद का शिवाजी’ इस चलचित्र का निर्माण मिचेल थेवर ने किया है तथा निर्देशन राज मोरे ने किया है । ‘शिवाजी अंडरग्राउंड इन भीमनगर मोहल्ला’ इस आपत्तिजनक नाटक पर आधारित इस चलचित्र की निर्मिति की गई है । गोवा के इफ्फी (इंडियन पैनोरमा एनडीएफसी फ़िल्म फेस्टिवल) तथा अजंता-एलोरा अंतरराष्ट्रीय चलचित्र महोत्सव २०२४ में इस चलचित्र का नामांकन किया गया है । फ्रांस में होनेवाले ‘कान’ चलचित्र महोत्सव के लिए भी इस चलचित्र का चयन किया गया है ।

संपादकीय भूमिका

  • हिन्दुत्वनिष्ठों पर कानून का डंडा चलाने वाले पुलिस अधिकारी, धर्मान्ध मुसलमानों के समक्ष सदा ही दुम दबाकर रहते हैं — यह ध्यान में रखें !
  • अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर छत्रपति शिवाजी महाराज के संदर्भ में झूठा इतिहास दिखानेवाले ऐसे चलचित्र को चलचित्र परिनिरीक्षण मंडल (सेंसर बोर्ड) से अनुमति कैसे प्राप्त होती है ? इस विषय में शासन को जांच करनी चाहिए । ‘व्यवस्था’ अब भी हिन्दूविरोधी ही है, यह इससे स्पष्ट होता है !