Vaishno Dhaba : ढाबे का कर्मचारी ‘गोपाल’ निकला ‘तजम्मुल’ !

  • मुजफ्फरनगर की घटना से मचा हडकंप

  • ‘वैष्णो ढाबे’ का संचालक (मालिक) हिन्दू नहीं, मुसलमान निकला !

मुजफ्फरनगर (उत्तर प्रदेश) – यहां कावड यात्रा-मार्ग पर स्थित ढाबों एवं उपहारगृहों की हिन्दू संगठनों द्वारा जांच करने पर यह सामने आया है कि वे हिन्दू देवी-देवताओं के नाम रखकर मुसलमानों द्वारा चलाए जा रहे थे । इस प्रकरण में, वैष्णो ढाबे के कर्मचारी ने पहले अपना नाम ‘गोपाल’ बताया था एवं हिन्दू संगठनों को आरोपी सिद्ध करने का प्रयत्न किया था; किंतु अब उसने स्वीकार किया है कि, उसका वास्तविक नाम तजम्मुल है एवं उसे ढाबे के मुसलमान संचालक सनव्वर ने ही हिन्दू नाम बताने के लिए कहा था । इससे यह स्पष्ट हुआ है कि धर्मांध मुसलमान कावड यात्रियों से छल कर रहे हैं ।

आधार कार्ड से हुई पहचान स्पष्ट!

तजम्मुल के आधार कार्ड से उसका वास्तविक नाम तजम्मुल एवं उसके पिता का नाम मकसूद होना सामने आया । तजम्मुल मुजफ्फरनगर के बझेरी क्षेत्र का रहनेवाला है । तजम्मुल के गांव के लोगों ने भी इसकी पुष्टि की है । तजम्मुल ने स्वयं समाचार चैनलों के सामने स्वीकार किया है कि, ‘ढाबे के मालिक सनव्वर ने डेढ महीने पूर्व बलपूर्वक मेरा नाम गोपाल रखा था । उस समय मैं मानसिक रूप से अस्वस्थ था ।’

मालिक ने हिन्दू दिखने के लिए हाथ में ‘ब्रेसलेट’ पहनने को कहा

तजम्मुल आगे बोला कि, हॉटेल मालिक का मुझे झूठी पहचान देने के पीछे व्यवसाय बचाना ही एकमात्र हेतु था । मालिक को भय था कि, यदि कोई मुसलमान कर्मचारी होगा, तो ग्राहक ढाबे में नहीं रुकेंगे; इसलिए उसने मेरी वास्तविक पहचान छुपाई । होटल मालिक ने मुझे बताया कि, तुम्हारा नाम ‘गोपाल’ है, तुम्हें ‘पंडितजी का लडका’ कहा जाएगा एवं तुम्हें हिन्दुओं जैसा दिखने के लिए तुम्हारे हाथ पर ‘ब्रेसलेट’ भी पहनाया जाएगा ।

क्या है प्रकरण?

यशवीर महाराज ने चेतावनी देते हुए अपने अनुयायियों को कावड यात्रा-मार्ग के ढाबों की जांच करने के लिए कहा था । उनकी जांच के समय वैष्णो ढाबे में उपर्युक्त घटना हुई । इस प्रकरण में कर्मचारियों से मार-पीट करने, एवं उनके वस्त्र उतारकर धर्म की जांच करने का आरोप लगा था । इसके पश्चात पुलिस ने यशवीर महाराज को नोटिस भी भेजी थी ।

(और इनकी सुनिए…) ‘दुकानदारों से जाति एवं धर्म पूछना अनुचित !’ – समाजवादी पार्टी

धर्म छुपाकर अन्य धर्म का होने की बात कहना योग्य है, ऐसा समाजवादी पक्ष का कहना है क्या? मुसलमानों को अपना धर्म छुपाकर दुकान क्यों चलानी पडती है ? इसका उत्तर समाजवादी पक्ष को देना चाहिए । निष्ठा से मुसलमानों का पक्ष लेनेवाले ऐसे पक्षकारों को हिन्दुओं को राजनीतिक स्तर पर सदैव के लिए समाप्त करना चाहिए !

समाजवादी पक्ष के नेता रविदास मेहरोत्रा ने कहा कि, भाजपा एवं आतंकवादी में कोई भी भेद नहीं है; क्योंकि वे नाम पूछकर धर्म जानते हैं । दुकानदारों से जाति एवं धर्म पूछना अनुचित है ।

 

संपादकीय भूमिका

मुसलमानों को अपने ढाबों के नाम मुस्लिम रूप से रखने में क्या आपत्ति है ? उन्हें हिन्दू देवी-देवताओं के नाम क्यों रखने पडते हैं ? क्या मुसलमानों के धार्मिक नेता इन प्रश्नों का उत्तर देंगे ?