कार्ला (पुणे) स्थित आई श्री एकविरा देवस्थान में वस्त्रसंहिता लागू की गई है ।

अंग प्रदर्शन करने वाले तथा अत्यंत अल्प वस्त्र पहनकर आने वालों को मंदिर में प्रवेश नहीं मिलेगा ।

श्री एकविरा देवस्थान

(वस्त्रसंहिता का अर्थ : मंदिर में प्रवेश करते समय कौन-से वस्त्र पहनने चाहिए, इस विषय में बनाए गए नियम)

कार्ला (ता. मावल, जिला पुणे) – यहां के श्री एकविरा देवस्थान ट्रस्ट ने आई श्री एकविरादेवी के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं हेतु वस्त्रसंहिता लागू करने का निर्णय लिया है । लाखों भक्तों की आस्था का केन्द्र तथा आगरी एवं कोली समाज की कुलदेवी श्री एकविरा देवी मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं, स्त्री एवं पुरुष दोनों के लिए यह नियम ७ जुलाई से लागू होगा । यह नियम दुकानदारों एवं स्थानीय लोगों पर भी लागू होगा । इस निर्णय के अनुसार मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को भारतीय पारंपरिक वस्त्र पहनना अनिवार्य है । अंग प्रदर्शन करने वाले एवं अत्यंत अल्प वस्त्र पहनकर आने वालों को मंदिर में प्रवेश नहीं दिया जाएगा, ऐसा देवस्थान की ओर से स्पष्ट किया गया है । इस विषय में २७ जून को देवस्थान ट्रस्ट की बैठक हुई थी । उसमें सभी सदस्यों के एकमत से यह निर्णय लिया गया । मंदिर के धार्मिक वातावरण की पवित्रता बनाए रखने हेतु यह निर्णय लिया गया है ऐसा ट्रस्ट की ओर से बताया गया ।

इस वस्त्रसंहिता पर निर्णय हेतु हुई बैठक में ट्रस्ट के अध्यक्ष दीपक हुलावले, प्रमुख विश्वस्त सांसद सुरेश उर्फ बाल्या मामा म्हात्रे, उपाध्यक्ष सागर देवकर, सचिव नवनाथ देशमुख, सहसचिव महेन्द्र देशमुख आदि पदाधिकारी उपस्थित थे ।

वस्त्रसंहिता के नियम

महिलाओं के लिए : साडी, सलवार-कुर्ता अथवा अन्य कोई भारतीय पारंपरिक पोशाक
पुरुषों के लिए : धोती-कुर्ता, कुर्ता-पायजामा, पैंट-शर्ट अथवा पूर्णतः अंग ढंके हों, ऐसा भारतीय पारंपरिक पोशाक

निषिद्ध वस्त्र

मंदिर में पश्चिमी पोशाक, शॉर्ट्स, मिनी स्कर्ट्स, हाफ पैंट, फटी हुई जीन्स आदि पहनकर आना निषिद्ध किया गया है ।

 

संपादकीय भूमिका

श्री एकविरा देवस्थान का यह निर्णय अभिनंदनीय है । राज्य के अनेक मंदिर अब इस प्रकार के निर्णय लेने लगे हैं । अब इसी प्रकार मंदिरों को हिन्दुओं को धर्मशिक्षा देने के लिए भी प्रयास आरम्भ करने चाहिए, जिससे हिन्दुओं को उनके धर्म का महत्त्व, धार्मिक विधियों के पीछे के कारण, अध्यात्मशास्त्र आदि का ज्ञान प्राप्त हो एवं उनकी श्रद्धा में वृद्धि हो सके ।