श्रीराम मंदिर में दान चोरी की घटना में बडे लोगों को छोड दिया गया । – Shankaracharya Avimukteshwaranand Saraswati

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का केवल कनिष्ठ कर्मचारियों पर अभियोग प्रविष्ट होने को लेकर आरोप ।

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती

संभल (उत्तर प्रदेश) – ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने श्रीराम मंदिर में दान की चोरी की घटना में अभियोग प्रविष्ट होने के बाद प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए आरोप लगाया कि ‘इसमें केवल कनिष्ठ कर्मचारियों के नाम सम्मिलित किए गए हैं, जबकि चोरी के लिए उत्तरदायी बडे लोगों को छोड दिया गया है’ । उनकी चल रही ‘गो धर्म यात्रा’ संभल पहुंचने के बाद वे पत्रकारों से बात कर रहे थे ।

प्रबंधन से शंकराचार्य, धर्माचार्य, संत, महंत, पुजारियों को दूर रखा गया ।

शंकराचार्य ने कहा कि दान की चोरी के विषय में क्या कहना ? श्रीराम मंदिर के संबंध में प्रारंभ से ही मनमाने निर्णय लिए गए हैं । इसमें न तो शास्त्रों का पालन हुआ, न वेदों का, और न ही धर्मगुरुओं के परामर्श पर विचार किया गया । राजनीतिक नेताओं द्वारा चुने गए लोगों को सम्मिलित करके प्रबंधन की स्थापना की गई, साथ ही संत, महंत तथा पुजारियों को इससे दूर रखा गया । यदि सब कुछ ईमानदारी से करना होता, तो इस प्रबंधन को ४ शंकराचार्यों, रामानंदाचार्य तथा अन्य धर्मगुरुओं के अधीन किया जा सकता था । इसके स्थान पर विश्वासपात्र राजनीतिक सहयोगियों की नियुक्ति की गई, जिससे प्रारंभ से ही उद्देश्य स्पष्ट होता है, ऐसा उन्होंने आगे कहा ।

बड़ी चोरियां बडे लोगों द्वारा की जाती हैं ।

दान चोरी के विरोध में अभियोग प्रविष्ट होने का उल्लेख करते हुए शंकराचार्य ने कहा कि हमने सुना है कि जिन लोगों ने नोट गिने, उनके विरुद्ध अभियोग प्रविष्ट किया गया है । उन्होंने तो केवल दान पेटी से निकाले गए नोटों को सीधा किया, उन्हें गिना एवं उनकी गड्डियां बनाईं । हमें उस बडी चोरी के बारे में बताइए, जो उसके बाद हुई । बड़े स्तर की चोरियां बडे लोगों द्वारा की जाती हैं । उनके विरुद्ध कोई अभियोग प्रविष्ट नहीं किया गया है । यदि इन आरोपों में तथ्य थे, तो पहले ही दिन, चाहे अज्ञात व्यक्तियों के विरुद्ध ही क्यों न हो, अभियोग प्रविष्ट करना चाहिए था । जांच के बाद अंततः घटना प्रविष्ट की गई। यह वास्तविकता दर्शाती है कि वहां जांच करने जैसा कुछ था । विरोधी केवल अनियमितताओं को सामने लाकर अपना कर्तव्य निभा रहे हैं ।

सनातन धर्म के लिए प्रतिबद्ध उम्मीदवारों को जनता समर्थन दे ।

यदि भाजपा गाय को ‘राजमाता’ घोषित करती है, तो उसे इसका सबसे अधिक लाभ मिल सकता है; लेकिन वह ऐसा नहीं कर रही है । यदि किसी अन्य दल को हमारी ‘गो धर्म यात्रा’ का राजनीतिक लाभ लेना है, तो हम उन्हें रोकेंगे नहीं । मतदाताओं को अपना समर्थन केवल सनातन धर्म के लिए प्रतिबद्ध ‘सच्चे’ उम्मीदवारों के लिए सुरक्षित रखना चाहिए तथा ऐसे दृष्टिकोण से अंततः एक वैकल्पिक राजनीतिक नेतृत्व का निर्माण होगा ।