पाकिस्तान से भारत आए विस्थापित हिन्दुओं के लिए ‘निमित्तेकम्’ संस्था के माध्यम से संघर्ष करनेवाले राजस्थान के श्री. जय आहुजा !

‘पाकिस्तान में वहां के अल्पसंख्यक हिन्दुओं पर अत्याचार किए जाते हैं । उनकी लडकियों तथा महिलाओं के साथ बलात्कार किए जाते हैं, साथ ही बलपूर्वक अल्पायु लडकियों का धर्मांतरण कर उनका विवाह कर दिया जाता है । हिन्दुओं की हत्याएं वहां की सामान्य बात हो गई हैं । मुसलमान बन जाने पर वे इन अत्याचारों से छूट जाते हैं; परंतु स्वधर्म को बचाए रखने हेतु विगत कुछ वर्षाें से वहां के सहस्रों हिन्दुओं ने अपने घर-बार छोडकर भारत में शरण ली है । नागरिकता कानून के अनुसार कुछ विशिष्ट प्रक्रिया से पार होकर (गुजरकर) भारत की नागरिकता प्राप्त करने में उन्हें बहुत ही कानूनी समस्याएं थीं । उसके कारण विगत अनेक वषों से पाकिस्तान से भारत आए विस्थापित हिन्दुओं को भारत की नागरिकता न मिलने से उन्हें यहां दयनीय जीवन व्यतीत करना पड रहा है । ऐसे विस्थापित हिन्दुओं के पुनर्वास के लिए श्री. जय आहुजा ने ‘निमित्तेकम्’ नाम की संस्था स्थापित की है । इस संस्था के माध्यम से उन्होंने ३ सहस्र से अधिक पाकिस्तानी हिन्दुओं को भारत की नागरिकता दिला दी है । उन्होंने १० सहस्र पाकिस्तानी हिन्दुओं को आधिकारिकरूप से पाकिस्तान से सुरक्षित छुडाया है, इसके साथ ही कानूनी प्रक्रिया से भारत में उनका पुनर्वास करना, उन्हें रोजगार दिलाना तथा उन्हें भारत की नागरिकता दिलाना; इसके लिए वे निरंतर संघर्ष कर रहे हैं ।

श्री. आहुजा पाकिस्तान से भारत आए पीडित हिन्दुओं की व्यथा सुनते हैं । उसके लिए वे उनकी झोपडियों में जाकर यथासंभव उनकी सहायता करने का प्रयास करते हैं । उसके कारण पाकिस्तानरूपी नर्क से वहां के हिन्दुओं को छुडानेवाले श्री. जय आहुजा विस्थापित हिन्दुओं के लिए ‘देवदूत’ बन गए हैं ।

विशेष स्तंभ

छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा स्थापित हिन्दवी स्वराज हेतु जिस प्रकार उनके सैनिकों एवं सेनापतियों का त्याग सर्वोच्च है, उस प्रकार आज भी अनेक हिन्दुत्वनिष्ठ एवं राष्ट्रप्रेमी नागरिक हिन्दू धर्म एवं राष्ट्र की रक्षा हेतु ‘सैनिक’ के रूप में कार्य कर रहे हैं । उनकी तथा हिन्दू धर्म की रक्षा हेतु उनके संघर्ष की जानकारी देनेवाले ‘हिन्दुत्व के वीर योद्धा’ इस लेख द्वारा अन्यों को भी प्रेरणा मिलेगी ! – संपादक

१. विस्थापित हिन्दुओं का पुनर्वास करने की ओर मुडने का कारण

श्री. जय आहुजा ने वर्ष २०१० में पाकिस्तानी विस्थापित हिन्दुओं के पुनर्वास का कार्य आरंभ किया । इस काल में ‘ऑर्कुट’ एवं ‘फेसबुक’ जैसे सामाजिक माध्यम सामान्य लोगों के जीवन के भाग बनते जा रहे थे । सनातन धर्म का प्रथम शक्तिपीठ तथा उनकी कुलदेवी श्री हिंगलाजमाता का मंदिर पाकिस्तान में है । उस मंदिर की स्थिति जानने हेतु श्री. आहुजा ने पाकिस्तान के लोगों को ‘फ्रेंड रिक्वेस्ट’ (मित्रता करने का अनुरोध) भेजा । उस माध्यम से डॉ. राजेश लखानी से उनकी मित्रता हुई । वे भी जन्म से भारतीय हैं तथा उनके पूर्वज सिंध से विस्थापित होकर भारत आए थे । वे उस समय अदानी चिकित्सकीय महाविद्यालय के प्रौद्योगिकी विभाग के प्रमुख थे तथा ‘वर्ल्ड प्रेस’ के ब्लॉग लिखते थे । पाकिस्तान में बंदूक का भय दिखाकर ९ वर्ष की हिन्दू लडकी का अपहरण कर ४५ वर्ष के व्यक्ति के साथ बलपूर्वक उसका विवाह करा दिया गया था, श्री. आहुजा को उनके माध्यम से यह समाचार ज्ञात हुआ । उस समय श्री. आहुजा की लडकी भी ९-१० वर्ष की थी । इसके कारण पाकिस्तान की हिन्दू लडकियों तथा वहां के हिन्दू समाज पर होनेवाले अत्याचार की गंभीरता उनके ध्यान में आई । ‘उनके दादाजी ने वर्ष १९४७ में पाकिस्तान से भारत लौटने का निर्णय न लिया होता, तो पाकिस्तान में उन्हें उनके परिवार की रक्षा के लिए कितना संघर्ष करना पडता’, इसका उन्हें भान हुआ । अतः हम भारतीयों कों ‘परिवार एवं स्वधर्म को बचाने हेतु पाकिस्तान से भारत आनेवाले हिन्दुओं को अपनी बाहों में समा लेना चाहिए’, ऐसा उन्हें लगा; क्योंकि हिन्दुओं को शरण लेने के लिए इस पृथ्वी पर भारत के अतिरिक्त अन्य कोई देश नहीं है । तब से श्री. आहुजा ने पाकिस्तानी विस्थापित हिन्दुओं की पीडा अल्प करने का कार्य आरंभ किया । वर्ष २०१४ में भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार आने पर आई अनुकूलता की अवधि में श्री. आहुजा ने ‘निमित्तेकम्’ नाम से एक संस्था की स्थापना की । इस संस्था में १२ विस्थापित पाकिस्तानी हिन्दू वेतन लेकर काम करते हैं । इस संस्था के माध्यम से श्री. आहुजा ने ३ सहस्र पाकिस्तानी हिन्दुओं को भारत की नागरिकता दिलाई ।

२. ‘निमित्तेकम्’ संस्था का कार्य

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२ अ. विदेश विभाग के अंतर्गत कार्य

पाकिस्तान में विस्थापित हिन्दुओं के संदर्भ में पॉडकास्ट वैभव सिंह के साथ चर्चा करते हुए श्री. जय आहूजा

श्री. जय आहुजा ने १० सहस्र पीडित हिन्दुओं को पाकिस्तान से छुडाया । ‘निमित्तेकम्’ का कार्य वहीं से आरंभ होता है । जब पाकिस्तान का हिन्दू भारत आने का निर्णय लेता है, तब वह भारत में रहनेवाले उसके मित्रों, परिजनों अथवा परिचितों से चलित भ्रमणभाष से संपर्क करता है । भारतीय नागरिकता की ‘स्पॉन्सरशिप गारंटी’ के कागदपत्रों के बिना पाकिस्तान के दूतावास में भारतीय वीजा के लिए आवेदन नहीं किया जा सकता । वीजा के लिए इस्लामाबाद के भारतीय दूतावास में धारिकाएं प्रविष्ट करने हेतु भारतीय प्रत्याभूत (गारंटर) की आवश्यकता होती है । ‘निमित्तेकम्’ संस्था यह प्रत्याभूति (गारंटी) लेने के कागदपत्र बनाकर देती है । इन कागदपत्रों को भारतीय सरकारी अधिकारी से प्रमाणित करवाकर उन्हें आधिकारिकरूप से पाकिस्तान तक पहुंचाना तथा उन लोगों के वीजा के कागदपत्र वहां के भारतीय दूतावास में प्रविष्ट करना, ‘निमित्तेकम् संस्था’ ये काम करती है । उसके उपरांत प्रत्याभूत (गारंटर) की पडताल का काम गुप्तचर विभाग करता है । इसमें ३-४ महीने का समय लगता है ।

Pakistani Hindus & Their Miserable Situation Explained by Jay Ahuja
(सौजन्य : Defensive Offence)

यह पडताल उचित पद्धति से पूरी होकर उसके आगे की प्रक्रिया हो, साथ ही संबंधित व्यक्तियों को वीजा मिले, इसके लिए श्री. आहुजा तथा ‘निमित्तेकम संस्था’ का समूह प्रयास करता है । किसी को पाकिस्तान से भारत आना हो, तो यह संस्था उसे यह सुविधा प्रदान करती है, साथ ही प्रत्याभूत (गारंटर) बनने हेतु उनके संबंधियों को प्रेरित करती है ।

नागरिकता अधिनियम संशोधन

श्री. जय आहुजा

पिछली नागरिकता कानून में, पाकिस्तान से आए हिन्दू ७ वर्ष से भारत में रह रहे हैं, यदि १९४७ से पूर्व उनका जन्म भारत में हुआ है अथवा उनके पूर्वज विभाजन के पूर्व भारत के नागरिक हैं, तो वे प्राथमिकता के आधार पर भारत की नागरिकता प्राप्त कर सकते हैं । इन स्थितियाें के कारण, विस्थपितों को नागरिकता के लिए बाधा का सामना करना पडा था  । इस संदर्भ में केंद्र सरकार को नागरिकता में सुधार करके वर्ष १९४७ की स्थिति तथा ७ वर्ष की सीमा को हटा देना चाहिए । उसके अनुसार केंद्र सरकार ने ७ वर्ष की सीमा को हटाकर उसे ५ वर्ष कर दिया ।

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२ आ. गृहमंत्रालय के अंतगर्त कार्य

संबंधित व्यक्ति जब पाकिस्तान से भारत की सीमा तक पहुंचता है, तब यह प्रकरण विदेश मंत्रालय के नहीं, अपितु गृहमंत्रालय के अंतर्गत आता है । उसके उपरांत तुरंत ही ‘सीआईडी’ कार्यालय जाकर पंजीकरण किया जाता है । अधिकतर पाकिस्तान के पीडित हिन्दू ९० दिन की यात्रा वीजा (विजिटर वीजा) लेकर भारत आते हैं । उसके उपरांत उनके वीजा का रूपांतरण दीर्घकालीन वीजा में करने हेतु शरणार्थी बनने के संदर्भ में आवेदन शपथपत्र (एफिडेविट) प्रस्तुत किए जाते हैं । उसके उपरांत उनका आवेदन पारित होकर उन्हें भारत में शरण मिलेगी, इसकी प्रत्याभूति (गारंटी) ली जाती है ।

Man Who Rescued 10,000 Pakistani Hindus, They Need Modi’s Help Jai Ahuja, Nimittekam
(सौजन्य : Dharmansh Foundation)

२ इ. विस्थापित हिन्दुओं के बच्चों की शिक्षा की समस्या का समाधान करना

वर्ष २०१२ में राजस्थान में शिक्षा-अधिकार के अंतर्गत विस्थापितों के बच्चे यहां के विद्यालयों में प्रवेश लेने के पात्र बन पाए । उसके उपरांत अन्य राज्यों ने भी इस पद्धति का अनुकरण किया । उसके कारण शिक्षा-अधिकार के अंतर्गत विस्थापितों के बच्चे अच्छे विद्यालयों में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं ।

२ ई. विस्थापित लोगों के लिए चिकित्सा सुविधा

डॉ. ओमेंद्र रत्न

श्री. आहुजा के सहयोगी डॉ. ओमेंद्र रत्न कान, नाक एवं गला के विशेषज्ञ हैं । वे ‘निमित्तेकम’ के विभाग संभालते हैं । उन्होंने जयपुर एवं जोधपुर के डॉक्टरों को इससे जोडकर रखा है । जो विस्थापित हिन्दू पाकिस्तानी पासपोर्ट धारक हैं, उन्हें भारत के ‘आयुष्मान भारत’ जैसी योजनाओं से लाभ नहीं होता । इस कारण अल्प व्यय पर विस्थापित हिन्दुओं का उपचार होने के लिए उन्होंने तत्कालीन गृहमंत्री राजनाथ सिंह से संपर्क किया । उनके माध्यम से, स्वास्थ्य मंत्रालय की मदद से जोधपुर एम्स को एक पत्र लिखा गया था । उस समय से उन्हें स्वास्थ्य सुविधाएं मिल रही हैं ।

३. हिन्दू जनजागृति द्वारा आयोजित ‘चर्चा हिन्दू राष्ट्र की’ में ‘ऑनलाइन’ सेमिनार की भागीदारी

श्री. जय आहुजा

श्री. जय आहूजा ने वर्ष २०२१ में हिन्दू जनजागृति के विशेष ‘ऑनलाइन’ सेमिनार के अंतर्गत कोरोना टीकाकरण में धर्मनिरपेक्षता से हिन्दू-मुस्लिम भेद पर एक विशेष सेमिनार में भाग लिया था ।

🚩 विशेष संवाद : 💉 कोरोना टीकाकरण में सेक्युलरवादियों का हिन्दू-मुस्लिम भेद !

टीकाकरण करते हुए उन्होंने पाकिस्तान से विस्थापित हिन्दुओं के विरुद्ध भेदभाव करने के विषय में आवाज उठाई । उन्होंने कहा कि हिन्दू राष्ट्र के बिना इस स्थिति में कोई परिवर्तन नहीं होगा ।

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