
मुंबई – १८ जून को आजाद मैदान में होने वाले ‘गाज़ा-फिलिस्तीन समर्थन’ मोर्चे को मुंबई पुलिस ने अनुमति देने से मना कर दिया । इससे मुंबई की कानून-व्यवस्था पर संभावित संकट टल गया है । इस निर्णय से सामाजिक सौहार्द्र बनाए रखने के लिए प्रयासरत हिन्दुओं के संगठित प्रयासों को सफलता मिली है, वहीं समाज में धार्मिक वैमनस्य फैलाने का प्रयास करने वाले आतंकवाद समर्थक फिलिस्तीनप्रेमी समूह की स्पष्ट पराजय हुई है । इस संदर्भ में मोर्चे के माध्यम से आतंकवाद का समर्थन करने का प्रयास किया जा रहा था, ऐसे प्रत्येक प्रयास को विफल किया जाना चाहिए, ऐसा मत हिन्दु राष्ट्र समन्वय समिति के राष्ट्रीय संयोजक श्री. सुनील घनवट ने व्यक्त किया ।
श्री. सुनील घनवट आगे बोले –

१. मुंबई परिमंडल १ के पुलिस उपायुक्त डॉ. प्रवीण मुंडे ने इस मोर्चे को अनुमति देने से मना किया । वर्ष २०१२ के आजाद मैदान दंगों की पुनरावृत्ति न हो और सार्वजनिक सुरक्षा की दृष्टि से यह निर्णय लिया गया है, ऐसा समझा जाता है । उस समय म्यांमार प्रकरण के विरोध में निकाला गया मोर्चा हिंसक दंगों में परिवर्तित हो गया था । ऐसी ही स्थिति इस मोर्चे के माध्यम से पुनः उत्पन्न होने की आशंका थी ।
२. इस मोर्चे का विरोध करने के लिए हिन्दु राष्ट्र समन्वय समिति, हिन्दु जनजागृति समिति, बजरंग दल, भाजपा, शिवसेना, हिन्दु एकता जागृत समिति, महाराष्ट्र मंदिर महासंघ, मानव सेवा प्रतिष्ठान और भूमिपुत्र सामाजिक संस्था ने मिलकर मुंबई पुलिस आयुक्त (कानून-व्यवस्था) से मुख्यालय में भेंट की और मोर्चे को अनुमति न दी जाए, ऐसी मांग की थी ।
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