
सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव में हिन्दू जनजागृति समिति के स्वरक्षा प्रशिक्षणवर्ग के वीरों ने स्वरक्षा प्रदर्शन प्रस्तुत किए । हिन्दुओं पर हो रहे आघातों की बढती घटनाओं को देखते हुए उनका प्रतिकार कर स्वयं की रक्षा कैसे करनी चाहिए ?, इसके स्फूर्तिदायक प्रदर्शन देखने का श्रध्दालुओं को अवसर मिला । पहलगाम का आतंकी आक्रमण, हिन्दू युवति पर २० बार हथियार से वार कर उसकी की गई हत्या, दुकान में ‘हनुमानचालिसा’ का पाठ चलानेवाले हिन्दू के दुकान में तोडफोड करनेवाले धर्मांध, चलती बस में महिलाओं का शीलभंग करनेवाला वासनांध जैसे प्रसंगों में हिन्दुओं को स्वयंसिद्ध होकर स्वयं की रक्षा कैसे करनी चाहिए ?, इसके संबंध में प्रसंग दिखाए गए । इन प्रसंगों को देखकर दर्शकों ने उत्स्फूतर्ता से नारे लगाए तथा इससे प्रत्येक धर्मप्रेमी में हिन्दुओं पर हो रहे आघातों के विरुद्ध उत्पन्न क्षोभ देखने को मिला ।

महोत्सव स्थल पर स्वरक्षा प्रदर्शन के समय बाण के आकार की रचना कर नानचाकू, जबकि धनुष का आकार बनाकर स्वरक्षा के प्रसंग साकार करते समय सभी की क्रिया एकत्रित होने से प्रशिक्षित भगवा शेला धारण किया हुआ हिन्दुओं का समूह प्रतिकार के लिए तैयार हो रहा है, ऐसा शौर्य का जागरण करनेवाला वातावरण बना था ।

वेंगरूळ, तहसील भुदरगड, जिला कोल्हापुर के ‘सव्यसाची गुरुकुलम्’ के छात्रों ने ‘सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव’ में छत्रपति शिवाजी महाराज के काल की (शिवकालीन) शौर्यकला प्रस्तुत कर उपस्थित धर्मप्रेमियों में क्षात्रतेज का जागरण किया ! इस अद्भुत एवं ध्यानाकर्षक युद्धकलाओं के प्रस्तुतीकरण से शिवकालीन क्षात्रतेज का पुनर्जागरण हुआ । शिवाजी महाराज के सैनिक मुगलों से किस प्रकार लडे होंगे ? प्रस्तुतीकरण के समय चलाया गया वीरश्री युद्ध पार्श्वसंगीत तथा क्षात्रतेजयुक्त नारेबाजी के कारण पूरा वातावरण शिवमय बनकर उपस्थित धर्मप्रेमियों में वीरश्री का जागरण हुआ ! शिवाजी महाराज से लेकर रानी लक्ष्मीबाई तक जिस युद्धकला ने विदेशी आक्रांताओं को पराजित किया था, उस युद्धकला का जो विस्मरण हो रहा है, ऐसी स्थिति में ‘सव्यसाची गुरुकुलम्’ के छात्रों ने शिवकालीन अनोखी युद्धकला प्रस्तुत कर ‘शिवकाल भले ही इतिहास बन चुका है; परंतु शिवतेज आज भी जीवित है । हम संवाहक हैं, उस शक्ति के जो अधर्म की निर्दालक है !’ इसकी प्रतीति कराई !

वर्तमान में चाहे हिन्दू लडकियां हों, महिलाएं हों अथवा युवक हों; उनपर केवल धर्म के आधार पर आक्रमण हो रहे हैं । धर्मांधों की आक्रामक प्रवृत्ति के कारण हिन्दुओं को उनके ही देश में खुलेआम घूमना कठिन हो गया है । समाज में अनैतिकता बढने से लडकियों तथा महिलाओं के शीलभंग की घटनाएं भी सामान्य हो गई हैं । हिन्दुओं में इन आक्रमणों का सामना करने की शारीरिक, मानसिक तथा आध्यात्मिक तैयारी नहीं है । हिन्दुओं को स्वरक्षा प्रशिक्षण लेना अब अनिवार्य हो गया है । शारीरिक तैयारी की अपेक्षा मानसिक एवं आध्यात्मिक तैयारी महत्त्वपूर्ण है । हिन्दू जनजागृति समिति के स्वरक्षा प्रशिक्षणवर्गाें के माध्यम से यही तैयारी करवाई जाती है । भारतीय सेना भले ही सीमा पर लडकर भारतीयों की रक्षा करती है, तब भी आंतरिक शत्रुओं के कारण यहां के बहुसंख्यक हिन्दू असुरक्षित हैं । देश के पुलिस, प्रशासन भी विगत ७५ वर्षाें के धर्मनिरपेक्षता के संस्कारों के कारण धर्मांधों के विरुद्ध कार्यवाही करते समय संकीर्ण नीति अपनाते हैं । इसलिए अब हिन्दुओं को स्वरक्षा हेतु स्वयं को तैयार करना आवश्यक है ।
– श्री. हर्षद खानविलकर, युवा संगठक, हिन्दू जनजागृति समिति
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