
न्यूयॉर्क (अमेरिका) – पाकिस्तानी आतंकवादियों को बचाने के लिए चीन एक बार फिर सामने आया है और उसने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में लष्कर-ए-तोयबा और जैश-ए-मोहम्मद के ५ आतंकवादियों को ‘वैश्विक आतंकवादी’ घोषित करने का प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया । भारत ने यह प्रस्ताव प्रस्तुत किया था । भारत की राष्ट्रीय अन्वेषण एजेंसी द्वारा प्रस्तुत प्रमाणों से यह बताया गया था कि ये आतंकवादी भारत में किए गए अनेक बडे आतंकवादी आक्रमणों में सहभागी थे ।
१. अब्दुल रऊफ अशगर, साजिद मीर, अब्दुल रहमान मक्की, तल्हा सईद और शाहीद महमूद रहमतुल्ला ऐसे उनके नाम हैं । ये आतंकवादी २६ नवंबर २००८ के मुंबई पर आक्रमण, वर्ष २०१६ में वायुसेना के पठानकोट स्थित अड्डे पर आक्रमण, वर्ष २०१९ का पुलवामा स्थित आक्रमण, वर्ष २००१ का संसद पर आक्रमण और वर्ष १९९९ में विमान अपहरण में सहभागी थे ।
२. भारत ने ‘द रेजिस्टेंट फ्रंट’ इस लष्कर-ए-तोयबा की उपशाखा पर भी संयुक्त राष्ट्रों में प्रतिबंध लगाने के लिए ३ बार प्रस्ताव प्रस्तुत किया था; परंतु चीन ने सभी प्रस्तावों में अडचन डाली । पहलगाम स्थित आक्रमण के पीछे यही संगठन है ।
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भारत ने स्पष्ट रूप से कहा है कि, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में इस प्रकार आतंकवादियों का पक्ष लेना यह आतंकवाद विरोधी लडाई में बाधा उत्पन्न करने वाला तथ्य है ।
संपादकीय भूमिकाएक ओर चीन अपने देश में जिहादी आतंकवादी उत्पन्न न हों; इसलिए १० लाख से अधिक मुसलमानों को सुधार गृहों में बंद कर रहा है तो दूसरी ओर पाकिस्तानी आतंकवादियों का निरंतर पक्ष ले रहा है, इससे उसका भारत-द्वेष स्पष्ट होता है । ऐसे चीन का भारत को बहिष्कार ही करना चाहिए ! |
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