फुटबॉल मैच के बाद भडकी राष्ट्रव्यापी दंगों पर ‘ब्यूरो ऑफ ह्यूमन राइट्स एंड जस्टिस’ संस्था की मांग

पेरिस (फ्रांस) – यहां ‘चैंपियंस लीग’ फुटबॉल प्रतियोगिता के फाइनल मैच में ‘पेरिस सेंट-जर्मेन’ (PSG) टीम ने ‘आर्सेनल’ टीम पर विजय प्राप्त की । ३० मई को हुए इस मैच के उपरांत पूरे फ्रांस में रात के समय ही बङे स्तर पर हिंसा भडक उठी । इसके विरोध में ‘ब्यूरो ऑफ ह्यूमन राइट्स एंड जस्टिस’ संस्था ने तत्काल एक बयान जारी किया । संस्था द्वारा इस हिंसा की कडे शब्दों में निंदा की गई है और देश की सार्वजनिक कानून-व्यवस्था नीति में आमूल-चूल परिवर्तन करने के साथ-साथ ‘शून्य सहनशीलता’ की नीति अपनाने की मांग की गई है । विश्वसनीय सूत्रों से ‘सनातन प्रभात’ को मिली जानकारी के अनुसार, दंगाइयों में से कई लोग अल्जीरिया, मोरक्को, ट्यूनीशिया, सीरिया और अन्य अफ्रीकी देशों के मुस्लिम शरणार्थी हैं ।

हिंसा का दायरा इस प्रकार था…!
गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज द्वारा घोषित आधिकारिक आंकडों के अनुसार, रात के समय हुई झडपों और संघर्ष के मामलों में देशभर में ७८० लोगों को बंदी बनाया गया । यह हिंसा ७१ नगरपालिकाओं के क्षेत्रों तक फैल गई थी । इन घटनाओं में सुरक्षा बलों के ५७ सैनिक और २१९ नागरिक घायल हुए । इसमें एक व्यक्ति की मौत भी हुई है और पेरिस में चाकूबाजी की कई गंभीर घटनाएं सामने आई हैं ।
यह प्रकरण पूर्व-नियोजित था ! – ब्यूरो ऑफ ह्यूमन राइट्स एंड जस्टिस

‘ब्यूरो ऑफ ह्यूमन राइट्स एंड जस्टिस’ ने इस दावे को पूर्ण रूप से अस्वीकार कर दिया कि यह पूरी घटना ‘फुटबॉल प्रशंसकों की स्वाभाविक और सहज प्रतिक्रिया’ थी । संस्था के अध्यक्ष श्री दीपन मित्रा ने ‘सनातन प्रभात’ के प्रतिनिधि से बात करते हुए कहा कि यह एक पूर्व-नियोजित आक्रमण था । पिछले वर्ष के उत्सव के दौरान भी हमने हिंसा का बिल्कुल ऐसा ही मामला देखा था । अब यह एक ‘दीर्घकालिक संकट’ बन चुका है, जो फ्रांसीसी गणराज्य की दीर्घकालिक सुरक्षा के लिए गंभीर संकट उत्पन्न कर रहा है । यदि प्रशासन ने अभी इस पर कडा नियंत्रण नहीं पाया, तो भविष्य में फ्रांस को इसकी भारी कीमत चुकानी पडेगी । श्री मित्रा ने इस अवसर पर सख्त निवारक उपाय करने का भी पुरजोर अनुरोध किया । उन्होंने यह भी कहा कि सार्वजनिक सुरक्षा नीति को तुरंत लागू करते समय ‘शून्य सहनशीलता’ की नीति होनी चाहिए ।
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