Corporate Jihad : धर्मांतरण अस्वीकार करने के कारण ‘विप्रो’ (Wipro) की हिन्दू महिला कर्मचारी को सेवामुक्त किया !

  • ‘टी.सी.एस.’, ‘एस.बी.आई.’ के पश्चात ‘विप्रो’ में भी कॉर्पोरेट जिहाद ?

  • पीडिता ने पत्रकार परिषद में प्रदान की सूचना

  • ‘विप्रो’ प्रबंधन ने धर्मांतरण के लिए प्रेरित करने वाली शाहिना रफीक नामक महिला कर्मचारी को प्रदान किया संरक्षण !

पुणे, ३ जून (वार्ता.) – नाशिक के ‘टी.सी.एस.’ (TCS) में घटित स्तब्ध करने वाली घटना के पश्चात मुंबई के स्टेट बैंक (SBI) में लव जिहाद का प्रकरण सामने आया था । अब पुणे के ‘विप्रो’ नामक प्रतिष्ठित संस्थान से भी ‘कॉर्पोरेट जिहाद’ तथा धार्मिक उत्पीडन का अत्यंत गंभीर प्रकरण सम्मुख आया है । इस विषय में हिंजवडी पुलिस थाने में अभियोग प्रविष्ट किया गया है । संबंधित पीडित हिन्दू महिला ने हिन्दू जनजागृति समिति द्वारा आयोजित पत्रकार परिषद में प्रत्यक्ष उपस्थित रहकर इस प्रकरण का धैर्यपूर्वक उद्घाटन किया ।

समिति ने इस रोषजनक घटना की सार्वजनिक भर्त्सना की है । ‘इस प्रकरण में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस तत्काल ध्यान देकर संपूर्ण विषय का उच्च स्तरीय अन्वेषण कराएं एवं दोषियों पर कठोर वैधानिक कार्रवाई करें’, ऐसी मांग समिति के महाराष्ट्र एवं छत्तीसगढ राज्य के संगठक श्री. सुनील घनवट तथा पीडित महिला ने पत्रकार परिषद में की ।

पुणे स्थित ‘श्रमिक पत्रकार भवन’ में संपन्न हुई इस पत्रकार परिषद में पीडित हिन्दू महिला (‘विप्रो’ की पूर्व कर्मचारी), हिन्दू जनजागृति समिति के पुणे जिला समन्वयक श्री. पराग गोखले, ‘राष्ट्रभक्त अधिवक्ता समिति’ के अधिवक्ता विवेक भोसले, अधिवक्ता गोपाल तेलंग तथा रणरागिनी शाखा की कु. क्रांति पेटकर उपस्थित थीं ।

पत्रकार परिषद में बाएं से अधिवक्ता गोपाल तेलंग, कु. क्रांति पेटकर, वक्तव्य देती हुई पीडिता, श्री. सुनील घनवट, अधिवक्ता विवेक भोसले तथा पराग गोखले

क्या है प्रकरण ?

‘विप्रो’ में कार्यरत रहते समय पीडिता पर इस्लाम धर्म स्वीकार करने तथा एक मुसलमान व्यक्ति के साथ शारीरिक संबंध स्थापित करने के लिए तीव्र मानसिक दबाव निर्मित किया गया । इस धर्मविरोधी एवं अनैतिक कृत्य को उसने दृढतापूर्वक अस्वीकार करते हुए संस्थान प्रबंधन (‘कंपनी मैनेजमेंट’) के समक्ष शिकायत की; किंतु प्रबंधन ने आरोपी पर कार्रवाई करने के स्थान पर पीडिता को ही सेवा से निष्कासित कर दिया ।

कॉर्पोरेट क्षेत्र में हिन्दू महिलाओं की सुरक्षा तथा संस्थान प्रबंधन की पारदर्शिता संकट में ! – पीडिता

पीडिता हिन्दू महिला

पीडित हिन्दू महिला ने सूचित किया कि जब वह ‘विप्रो’ में निष्ठापूर्वक कर्तव्य संपादन कर रही थी, तब ‘टीम’ (दल) की शाहिना रफीक नामक एक महिला सहकर्मी ने मेरे व्यक्तिगत जीवन में जानबूझकर अवांछित हस्तक्षेप करना प्रारंभ किया । शाहिना ने उसके परिचित ‘शेख’ नामक मुसलमान व्यक्ति से शारीरिक संबंध स्थापित करने, साथ ही स्वयं का मूल हिन्दू धर्म त्यागकर इस्लाम स्वीकार करने का अत्यधिक आग्रह किया । ‘यदि तुम इस्लाम स्वीकार कर मुसलमान व्यक्ति के साथ रहोगी, तो तुम्हें दुबई में वैभवशाली एवं शांतिपूर्ण जीवन जीने का अवसर मिलेगा’, ऐसे प्रलोभन भी निरंतर दिए गए । सतत के धार्मिक तथा मानसिक उत्पीडन से व्यथित होकर पीडिता ने शाहिना से वार्तालाप पूर्णतः बंद कर दिया एवं केवल कार्यालयीन कार्य हेतु सीमित संपर्क रखा ।

पीडिता के अनुसार इस बढते कष्ट एवं उत्पीडन की नियमानुसार शिकायत उसने संस्थान के वरिष्ठ अधिकारियों से की थी; किंतु ‘विप्रो’ प्रशासन ने शाहिना रफीक पर कोई भी दंडात्मक अथवा प्रतिबंधात्मक कार्रवाई नहीं की । इसके विपरीत शाहिना ने प्रतिशोध की भावना से पीडिता का गुप्त रूप से एवं तथ्यों को तोड-मरोडकर ध्वन्यांकित (रिकॉर्ड) किया हुआ संभाषण देकर मिथ्या शिकायत की । इस संपूर्ण प्रकरण में वरिष्ठ अधिकारियों ने शाहिना का खुला पक्ष लेते हुए उस पर कार्रवाई करने से मना कर दिया, साथ ही ‘विप्रो’ के HR (मानव संसाधन विभाग) तथा प्रबंधन समिति ने पीडिता का पक्ष, उसकी पूर्व शिकायत तथा साक्ष्यों को पूर्णतः अस्वीकार करते हुए एकपक्षीय कार्रवाई की ।

पीडिता की सहमति के बिना बलपूर्वक उसके ‘लैपटॉप’ से त्यागपत्र प्रस्तुत किया !

अगस्त २०२५ के अंत में एच.आर. प्रतिनिधि प्रशांत जी.आर. ने पीडिता को एक ‘माइक्रोसॉफ्ट टीम्स’ बैठक के लिए आमंत्रित किया । उस बैठक के समय ‘तकनीकी युक्तियों’ (टेक्निकल ट्रिक्स) का उपयोग करके पीडिता के ‘लैपटॉप’ का ‘स्क्रीन कंट्रोल’ स्वयं के हाथ में ले लिया तथा उसे कोई पूर्व सूचना दिए बिना, उसकी सहमति के बिना बलपूर्वक उसका त्यागपत्र प्रस्तुत करवा दिया ।

बलपूर्वक त्यागपत्र लिखवाना श्रम एवं श्रमिक नियमों का प्रत्यक्ष उल्लंघन ! – अधिवक्ता विवेक भोसले

बिना किसी पूर्व सूचना के, नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों की अवहेलना करके तथा अन्वेषण के उपरांत स्वयं का पक्ष प्रस्तुत करने का वैधानिक अवसर दिए बिना बलपूर्वक त्यागपत्र लेना, यह भारतीय श्रम एवं श्रमिक नियमों का प्रत्यक्ष उल्लंघन है, ऐसा अधिवक्ता भोसले ने इस अवसर पर कहा ।

न्याय के लिए ५० लाख रुपये की क्षतिपूर्ति के साथ ‘विप्रो’ प्रशासन को वैधानिक सूचना !

इस संस्थागत अन्याय तथा उत्पीडन के विरुद्ध पीडिता ने अपने अधिवक्ताओं के माध्यम से ‘विप्रो’ प्रशासन को वैधानिक सूचना (लीगल नोटिस) प्रेषित की है । उसके मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं…

१. पीड़िता को हुए अत्यधिक मानसिक कष्ट तथा सामाजिक प्रतिष्ठा की हानि के प्रतिपूरक ‘विप्रो’ प्रशासन ५० लाख रुपये की आर्थिक क्षतिपूर्ति प्रदान करे ।

२. दबाव में तथा बलपूर्वक लिया गया त्यागपत्र विधि की दृष्टि से अवैध है, अतः इसे तत्काल निरस्त किया जाए ।

३. पीडिता को पूर्ण वेतन तथा ‘सेवा निरंतरता’ के साथ पुनः सम्मानपूर्वक सेवा में सम्मिलित किया जाए ।

४. संस्थान पीडिता से आधिकारिक लिखित क्षमायाचना करे तथा मुख्य संदेहास्पद शाहिना रफीक सहित उसे संरक्षण देने वाले दोषी अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई करे ।

१५ दिनों में उचित कदम न उठाने पर अभियोग प्रविष्ट करने की पीडिता की चेतावनी !

आगामी १५ दिनों में संस्थान ने इस पर उचित कदम नहीं उठाए, तो दीवानी, फौजदारी तथा श्रम न्यायालय में ‘विप्रो’ के विरुद्ध प्रत्यक्ष अभियोग प्रविष्ट करने की चेतावनी पीडित हिन्दू महिला ने दी है । पीडिता ने अत्यंत धैर्यपूर्वक पत्रकारों के प्रश्नों के उत्तर दिए । पीडिता के वक्तव्य में आत्मविश्वास तथा अन्याय के विरुद्ध संघर्ष करने का संकल्प दृष्टिगोचर हो रहा था; किंतु कुछ प्रसंगों में वह अपने अश्रुओं को रोक नहीं पाई ।

पुणे के आईटी क्षेत्र में हिन्दू विरोधी कार्यसूची (एजेंडा) सहन नहीं की जाएगी ! – हिन्दू जनजागृति समिति

श्री. सुनील घनवट

इस प्रकरण में पीडिता को न्याय दिलाने के लिए हिन्दू जनजागृती समिति पीडिता के साथ खडी है । यह घटना सुनियोजित ‘कॉर्पोरेट जिहाद’ का ही अंश है । बहुराष्ट्रीय संस्थानों में उच्च पदों पर आसीन होकर हिन्दू महिलाओं के धार्मिक तथा व्यक्तिगत स्वातंत्र्य का दमन करने का यह प्रकार अत्यंत चिंताजनक है । यह केवल एक ही घटना नहीं है, अपितु ऐसे अनेक प्रकरण घटित होने की संभावना से अस्वीकार नहीं किया जा सकता । पुणे के आईटी क्षेत्र की यह हिन्दू विरोधी कार्यसूची और उत्पीडन किसी भी परिस्थिति में सहन नहीं किया जाएगा । क्या अन्य बडे संस्थानों में भी ऐसे प्रकार घटित हो रहे हैं ? सरकार को इसकी व्यापक जांच करनी चाहिए । यदि किसी भी हिन्दू महिला पर इस प्रकार का अन्याय, धार्मिक उत्पीडन अथवा धर्मांतरण के लिए दबाव आ रहा हो, तो वे भयभीत न होकर हिन्दू जनजागृति समिति के ७७३८२ ३३३३३ क्रमांक पर संपर्क करें, ऐसा आवाहन श्री. घनवट ने किया ।

संपादकीय भूमिका

  • निरंतर घटित होने वाली ‘कॉर्पोरेट जिहाद’ की ऐसी घटनाओं को देखते हुए मुसलमान चाहे कितने भी उच्च शिक्षित हो जाएं तथा प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्यरत हो जाएं, तथापि उनके मन में हिन्दुओं के धर्मांतरण के धर्मांध इक्षा समाप्त नहीं होते । सरकार को ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए धर्म के आधार पर कुछ निर्णय लेना अब आवश्यक हो गया है, इसे ध्यान में रखना चाहिए !
  • ‘कॉर्पोरेट जिहाद’ का प्रकरण उजागर होने वाला विप्रो यह तृतीय संस्थान है । क्या यह सब हिमशैल का ऊपरी छोर (टिप ऑफ द आइसबर्ग) है, यह देखना समय की आवश्यकता है !
  • ‘विप्रो’ के प्रमुख अजीम प्रेमजी तथा उनके पुत्र रशीद प्रेमजी विश्व के सर्वाधिक धनवान मुसलमानों में से एक हैं । आज तक उनका धर्मनिरपेक्ष स्वरूप ही संसार के समक्ष रहा है, परंतु ऐसी घटनाओं से ‘विप्रो’ में वास्तव में क्या चल रहा है, यह देखा जाना संस्थान के सहस्रों हिन्दू कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए आवश्यक है !