महाकुंभ के समापन के बाद प्रधानमंत्री मोदी की श्रद्धालुओं से अपील !
नई दिल्ली – महाकुंभ संपन्न हुआ…एकता का महायज्ञ संपन्न हुआ. जब एक राष्ट्र की चेतना जागृत होती है, जब वो सैकड़ों साल की गुलामी की मानसिकता के सारे बंधनों को तोड़कर नव चैतन्य के साथ हवा में सांस लेने लगता है, तो ऐसा ही दृश्य उपस्थित होता है । इतना बड़ा आयोजन करना आसान नहीं था । मैं गंगा, यमुना और सरस्वती माता से प्रार्थना करता हूं कि यदि हमारी पूजा में कोई कमी रह गई हो तो कृपया हमें क्षमा करें । महाकुंभ के सफल समापन के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक ब्लॉग पोस्ट में कहा, “यदि हम श्रद्धालुओं की सेवा करने में कम रहे हैं तो मैं लोगों से क्षमा मांगता हूं ।” उन्होंने ‘एकता का महाकुंभ : युग परिवर्तन की दृष्टि’ शीर्षक से अपने विचार प्रस्तुत किए।
महाकुंभ संपन्न हुआ…एकता का महायज्ञ संपन्न हुआ। प्रयागराज में एकता के महाकुंभ में पूरे 45 दिनों तक जिस प्रकार 140 करोड़ देशवासियों की आस्था एक साथ, एक समय में इस एक पर्व से आकर जुड़ी, वो अभिभूत करता है! महाकुंभ के पूर्ण होने पर जो विचार मन में आए, उन्हें मैंने कलमबद्ध करने का… pic.twitter.com/TgzdUuzuGI
— Narendra Modi (@narendramodi) February 27, 2025
प्रधानमंत्री मोदी द्वारा व्यक्त विचार
१. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार, प्रशासन और जनता ने मिलकर एकता के इस महाकुंभ को सफल बनाया । चाहे केंद्र हो अथवा राज्य, वहां कोई शासक अथवा प्रशासक नहीं था, हर कोई श्रद्धाभाव से भरा सेवक था ।
२. अगर हमने स्वतंत्रता के बाद भारत की इस शक्ति के विराट स्वरूप को पहचाना होता, और इस शक्ति को सबके कल्याण के लिए, सबके आनंद के लिए लगाया होता, तो आज भारत गुलामी के परिणामों से उभरकर एक महान शक्ति बन चुका होता; परंतु हम तब ऐसा नहीं कर सके ।
३. यह महाकुंभ कार्यक्रम आधुनिक प्रबंधन पेशेवरों, योजना तथा नीति विशेषज्ञों के लिए अध्ययन का एक नया विषय बन गया है । आज पूरे विश्व में इतनी बड़ी घटना की कोई तुलना नहीं है । ऐसा कोई दूसरा उदाहरण नहीं है ।
४. प्रयागराज में हुआ महाकुंभ का ये आयोजन, आधुनिक युग के मैनेजमेंट प्रोफेशनल्स के लिए, प्लानिंग और पॉलिसी एक्सपर्ट्स के लिए, नए सिरे से अध्ययन का विषय बना है. आज पूरे विश्व में इस तरह के विराट आयोजन की कोई दूसरी तुलना नहीं है, ऐसा कोई दूसरा उदाहरण भी नहीं है.पूरी दुनिया आश्चर्यचकित है कि कैसे एक नदी तट पर, त्रिवेणी संगम पर इतनी बड़ी संख्या में करोड़ों की संख्या में लोग जुटे । इन करोड़ों लोगों को ना औपचारिक निमंत्रण था, ना ही किस समय पहुंचना है, उसकी कोई पूर्व सूचना थी. बस, लोग महाकुंभ चल पड़े…और पवित्र संगम में डुबकी लगाकर धन्य हो गए ।
५. भारत के युवाओं का इस महाकुंभ में आगे आकर भाग लेना एक बड़ा संदेश है । इससे यह सिद्ध होता है कि भारत की युवा पीढ़ी हमारी परम्पराओं और संस्कृति की वाहक है । वह अनुभव करती हैं कि इसे आगे ले जाना उनका दायित्व है । वे इसके लिए दृढ़ संकल्पित एवं समर्पित हैं ।
६. आध्यात्मिक क्षेत्र के शोधकर्ता यदि करोड़ों भारतीयों के इस उत्साह का अध्ययन करें तो पाएंगे कि अपनी विरासत पर गर्व करने वाला भारत अब एक नई ऊर्जा के साथ आगे बढ रहा है। मुझे लगता है कि ये उस युग के परिवर्तन की आवाज है, जो भारत का नया भविष्य लिखने जा रही है ।
७. जैसे एकता के महाकुंभ में, प्रत्येक श्रद्धालु, चाहे निर्धन हो अथवा अमीर, बच्चा हो अथवा बूढ़ा, देश हो अथवा विदेश… गांव हो अथवा शहर, किसी भी जाति का, किसी भी विचारधारा का, सभी एकता के महाकुंभ में एक महायज्ञ के लिए एक हो गए । ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ का यह अविस्मरणीय दृश्य कऱोडों देशवासियों के आत्मविश्वास का महापर्व बन गया । अब इस तरह हमें एक साथ आना होगा और विकसित भारत के महान उद्देश्य के लिए एकत्र होना होगा ।

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